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Thursday, March 4, 2021

अमरीकी और चीनी अर्थव्यवस्था पर ट्रेड वार का असर दिखने लगा

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चीनी अर्थव्यवस्था में अमेरिका से ट्रेड वार के चलते गिरावट देखने को मिल रही थी । हाल में ही चाइना इंटरनेशनल कैपिटल द्वारा किये गए एक सर्वे के आंकड़े जारी किए जिसके अनुसार पिछले एक साल (जुलाई 2018 से जुलाई 2019)में ट्रेड वार के चलते चीन में १९ लाख लोगों की नौकरियाँ चली गई है । वहीं अमेरिकी अर्थव्यवस्था की  हालत भी  ट्रेड वार  की वजह से ही ख़राब हो रही है और वाइट हाउस को मंदी से निपटने के लिए उपाय शुरू करना पड़े हैं ।

अमेरिका ने बारी-बारी से चीन के उत्पादों पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी कर दी थी और चीन में लोगों की नौकरियाँ खत्म होने के कारण सिर्फ ट्रेड वार ही  है । अमेरिकी थिंक टैंक प्रिंटर्स इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल इकोनामिक के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट देखने को मिली है, इसका कारण है कि चीन का सेवा आधारित अर्थव्यवस्था की तरफ रुझान बढ़ रहा है । इस समय चीन में नौकरियों की हालत बेहद खराब है ।

हालात ऐसे हो गए हैं कि चीन सरकार द्वारा विकसित सामाजिक प्रणाली की सफलता भी संशय की स्थिति में है । इसके लागू होने से चीन के लोगों पर अद्भुत पूर्ण नियंत्रण की अनुमति मिल जाती है । इसलिए इसके प्रभावी ढंग से लागू होने में विशेषज्ञों को संदेह है । अमेरिका का चीन के साथ लगभग $112 का वार्षिक आयात होता है, जिस पर अमेरिका द्वारा 15% का शुल्क लगने की वजह से कपड़े,जूते,खेल के सामान और उपभोक्ता वस्तुएँ महंगी हो जाएंगी क्योंकि चीन से आयातित उपभोक्ता वस्तुओं पर भी अमेरिका ने आयात शुल्क लगा दिया है, जिस वजह से अमेरिका में खुदरा सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी हो जाएगी और ये बढ़ी हुई लागत कंपनियां ग्राहकों से वसूलेगी ।

एक सर्वेक्षण से पता चला है कि अमेरिका से ट्रेड वार  की वजह से चीन में विनिर्माण क्षेत्र की मांग में गिरावट दर्ज की गई है । वहीं अमेरिका द्वारा  चीनी वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने से चीनी निर्यातकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि चीन के लिए सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है और इस साल जुलाई में चीन द्वारा अमेरिका को होने वाला निर्यात 6.5 फीसदी के स्तर पर पहुंच गया है । ट्रेड वार की वजह से चीन की विकास दर पिछले 26 सालों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है और जून में ख़त्म हुई  तिमाही में चीन की विकास दर 6.3 फीसदी थी । वही ट्रेड वार के चलते अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महगाई बढ़ने की सम्भावना जताई जा रही है ।

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