राम विलास पासवान
राजनीति

एलजेपी के संस्थापक और बिहार के दिग्गज नेता राम विलास पासवान नही रहे, जाने उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ बाते

बिहार के दिग्गज नेता और कैबिनेट मंत्री रामविलास पासवान अब दुनिया मे नही रहे। वह लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और गुरुवार की रात उनका निधन हो गया। वह एलजीपी के संस्थापक रहे हैं।

रामविलास पासवान को मौके की पहचान करने, जोड़-तोड़ करने और दोस्त और दुश्मन को बदलने की कला में माहिर समझा जाता था।

लेकिन इसके बावजूद उनका राजनीतिक जीवन हमेशा से उतार चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने बिहार की राजनीति में अपनी जिंदगी के 51 साल गुजारे हैं। कई बार वह इस तरह से भी टूट जैसे लगा कि उनका राजनीतिक जीवन खत्म हो जाएगा।

लेकिन वह चालाकी फिर से हालात को बदल देते और दमदार तरीक़े के साथ खड़े होते थे। उनकी इसी काबिलियत की वजह से लालू प्रसाद यादव उन्हें मजाक में मौसम बैज्ञानिक  भी कहा करते थे।

पहली बार 1969 में विधायक बनने के साथ ही रामविलास पासवान का राजनीतिक जीवन शुरू हुआ था। वह अपने उस समय में राम मनोहर लोहिया,जयप्रकाश नारायण और कर्पूरी ठाकुर के करीबी थे।

इसके अलावा नीतीश कुमार, अटल बिहारी वाजपेई और लालू प्रसाद से भी उनका दोस्ताना संबंध रहा है। रामविलास पासवान ने 1983 में दलित सेना का गठन किया और राजनीति में एक वक्त गुजारा।

दलित राजनीति में रामविलास पासवान ने कांशीराम और मायावती से अलग हटकर अपनी एक पहचान बनाई। 1977 की बात है जब उन्होंने संसदीय चुनाव में हाजीपुर से जीत दर्ज की थी। उन्होंने उस लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी से उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर होने लगी।

रामविलास पासवान ने 11 चुनाव लड़े हैं जिसमें से उन्हें 9 बार जीत हासिल हुई है और अपने जीवन काल में उनके नाम छह  प्रधानमंत्रियों के साथ उनकी सरकार में मंत्री रहने का रिकॉर्ड भी दर्ज है।

पहली बार रामविलास पासवान 1977 में लोकसभा में हाजीपुर की सीट से जीतकर पहुंचे थे। उसके बाद 2014 तक उन्होंने 8 बार लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। वर्तमान समय में वह मोदी सरकार में उपभोक्ता मामले तथा खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री थे और राज्यसभा के सदस्य थे।

राजनीति की सियासत के हिसाब से देखें तो साल 2005 से 2009 का समय रामविलास पासवान के लिए बेहद मुश्किल दौर था। लेकिन हार जीत तो राजनीति का सिलसिला है।

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साल 2000 में रामविलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के स्थापना की और साल 2005 में कांग्रेस से गठबंधन किया और उन्हें कामयाबी भी मिली। पहली बार एलजेपी के पास 29 विधायक थे। हालांकि कुछ ही महीने के भीतर उनकी पार्टी विखर गई।

बिहार का हाजीपुर जहां से रामविलास पासवान 1977 में भारी मतों से रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी। साल 2009 में जदयू के नेता राम सुंदर दास ने उन्हें उसी सीट से हरा दिया था। इसके बाद वह केंद्र की राजनीति में लौट आए थे और लालू प्रसाद से अलग बिहार में अपनी एक राजनीतिक जमीन तैयार करने में लग गए।

Ram Vilas Paswan

रामविलास पासवान अपने परिवार से बेहद लगाव रखते थे पहले वहां अपने भाइयों को राजनीत में लाये। उसके बाद अपने बेटे को भी राजनीत में उतार दिया।

हालांकि इसके पहले वह अपने बेटे चिराग पासवान को फिल्मी दुनिया में लांच करने का सपना देखते थे। इसके लिए वह कोशिश भी किए हैं लेकिन जब कामयाबी नही मिली तो अपनी राजनीतिक विरासत को उन्होंने अपने बेटे को सौंप दिया।

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इन दिनों बिहार में चुनावी चर्चा है अब याद यह देखा जाएगा कि रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान कितने कामयाब होते हैं।

रामविलास पासवान के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सहित कई केंद्रीय मंत्रियों और दिग्गज नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

रामविलास पासवान के अचानक निधन से देश भर में शोक का माहौल बना हुआ है। राष्ट्रपति भवन पर राष्ट्रध्वज को आधा झुका दिया गया है और देश की राजधानी समेत सभी राज्यों की राजधानी में आज राष्ट्रध्वज को आधा झुका दिया है।

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