चीन हॉगकॉग में भी थियानमेंन स्कवायर जैसे करवाही न कर दे

चीन के खिलाफ हांगकांग में चल रहे विरोध प्रदर्शन को चीन दबाने की पूरी कोशिश कर रहा है ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि कहीं चीन हांगकांग में  थियानमेन स्कवायर जैसी कोई कार्यवाही न कर दे  चीन को हांगकांग के मुद्दे पर सारी दुनिया सवालों के कटघरे में खड़ा कर रही है क्योंकि ऐसी संभावना जताई जा रही है कि चीनी सरकार द्वारा हांगकांग में हो रहे विरोध प्रदर्शन को बलपूर्वक दबाया जा सकता है चीन पहले भी अपनी सेना की ताकत से प्रदर्शनकारियों की आवाज को दबाया है उईगर मुसलमानों की आवाज को दबाने के लिए भी सेना का प्रयोग चीन सरकार करती रहती है सरकार द्वारा उइगरों को जेल में डालना, मस्जिदों को तोड़ना और यहां तक कि उनको आतंकवादी कह के मरवा दिया जाता है तो ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि चीनी सरकार द्वारा ऐसी कार्यवाही हॉगकॉग में चल रहे विरोध प्रदर्शन के खिलाफ भी हो सकती है क्योंकि चीनी सरकार ने हांगकांग की सीमा पर काफी ज्यादा मात्रा में सेना की तैनाती कर दी है और प्रदर्शनकारियों की आवाज को दबाने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा  सख्ती को बढ़ाया जा रहा है कई बार प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पे हो चुकी हैं हालात इतने खराब हो गए हैं कि हवाई उड़ाने भी इससे प्रभावित है और हवाई अड्डे को बंद कर दिया गया है ब्रिटेन और चीन के बीच हुए समझौते के अनुसार हॉगकॉग न्यायालय चीन से अलग स्वतंत्र रूप से काम करता है और लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी दी गई है इसके बावजूद चीन लगातार इनकी आवाज को दबाने की कोशिश करता रहता है हांगकांग में चल रहे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चीन उनके अधिकारों हो कम किया जा रहा हैै और उन्हें समाप्त कर रहा है और उनकी आजादी को छीनने की भी कोशिश कर रहस है जिसके खिलाफ प्रदर्शनकारी आवाज उठा रहे हैं लेकिन चीन इन्हें बलपूर्वक दबाना चाहता है चीन अपनी सेना को  प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए पूरी तरीके से तैयार करना है इसलिए पूरा विश्व इस आशंका से डर रहा है कि कहीं थियानमेंन चौक जैसी घटना ना हो जाए

दरअसल  4 जून 1989 को  लोकतंत्र समर्थकों द्वारा थियानमेन चौक में शांतिपूर्वक लोग प्रदर्शन कर रहे थे तो सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों को फौजी बूटों के नीचे रौंद डाल गया था चीनी सेनाओं द्वारा इस कार्रवाई में दस हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस घटना में सिर्फ 200 लोग मारे गए थे और लगभग 7000 लोग घायल हुए थे चीन की सरकार इस मामले को लेकर हमेशा ही चुप के साध लेती थी लेकिन ब्रिटिश की एक रिपोर्ट में इस दौरान मारे गए लोगो के बारे में खुलासा किया गया था उस समय चीन में ब्रिटिश के राजदूत एलन डोनाल्ड के टेलीग्राम का जिक्र किया गया है ,जिसमें उन्होंने इस घटना के बारे में बताया था और इसका दस्तावेज आज भी ब्रिटेन के नेशनल आर्काइव में मौजूद है इस रिपोर्ट पर रूस और अमेरिका के विशेषज्ञों ने भी अपनी सहमति दी है

तीन दशक बीत जाने के बाद भी चीनी सरकार इस मामले पर कुछ भी कभी नहीं बोलती और ना ही किसी को इस मामले पर बहस करने की अनुमति है यहां तक कि चीन में इस पर इंटरनेट पर भी पाबंदी है चीन में 1979 में विरोध प्रदर्शन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व महासचिव और उधर सुधारवादी हू याओ बांग  की मृत्यु के बाद शुरू हुआ था, क्योंकि चीन के रुधवादियो और सरकार की आर्थिक और राजनीतिक नीतियों का विरोध हुयाओबाग कर रहे थे और ऐसा माना जाता है कि इसी लिए सरकार  ने उन्हें मरवा दिया वे कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के चेयरमैन के पद पर भी रह चुके थे इसके अलावा पार्टी के टॉप अधिकारियों में से थे जब हू को दिल का दौरा पड़ा था तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन 15 अप्रैल को उनका मृत्यु हो गई और बाद में खबर आएगी उनकी पत्नी की तरफ से उनके इलाज में कोताही बरती गई थी और धीरे धीरे यह लोगो मे फैल गया लोग उसका आरोप सरकार पर लगाने लगाने लगे

हू की मृत्यु पर 1 जून को तत्कालीन राष्ट्रपति ली पोंग को ज्ञापन देने के लिए लगभग पचास हजार लोग थियानमेंन चौक पर इकट्ठा हुए थे प्रदर्शन 3- 4 जून को जोरों पर था इस प्रदर्शन को दबाने के लिए चीन ने अपनी सेना को चल रहे प्रदर्शन को बल पूर्वक भंग करने के लिए अनुमति दे दी और  विरोध को दबाने के लिए चीनी सेना ने बंदूक और टैंकों का भी इस्तेमाल किया था तो दुनिया भर के लोगों का आशंका है कि चीन फिर से ऐसा न कर दे

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