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Monday, January 25, 2021

बच्चों के लिए पैक जूस भी जंक फूड जैसे ही हानिकारक

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आज कल के पेरेंट्स अपने बच्चों की सेहत का बहुत खयाल रखते है और उन्हें जंक फूड से दूर रखने की कोशिश करते हैं, पर वही पेरेंट्स लाड़ प्यार में अपने बच्चों को फलों के पैक जूस या ऐसी अन्य चीजें देते है । अभी एक रिसर्च में सामने आया है कि 2-18 साल के उम्र के बच्चों की सेहत के लिए इस तरह के पेय पदार्थ हानिकारक होते है । रिसर्च के मुताबिक दो साल से कम उम्र के शिशुओं और छोटे बच्चों को ऐसे पेय पदार्थ पीने को नही देना चाहिए क्योंकि ये पेय पदार्थ उनकी सेहत के लिए सही नही होते हैं ।

रिसर्च के अनुसार छोटे बच्चों को पैक पेय पदार्थ के बजाय मौसमी फल खाने के लिये देना चाहिए जिसे वो मुँह से खा सकते हों क्योकि ऐसे मुँह की एक्सरसाइज भी हो जाती है और ताजा चीजे खाने को मिल जाती है । जागरूक पैरेंट को चाहिए कि वो अपने बच्चों को ऐसे फलो के पेय पदार्थ और चीनी से बने पेय पदार्थ को खाने को न दे बल्कि उन्हें ताजे फल खाने के लिए दे । बाल विशेषज्ञ की शीर्ष संस्था इंडियन अकैडमी आफ पीडियाट्रिक्स की ओर से एक सलाहकार समूह द्वारा फास्ट फूड के लिए एनर्जी ड्रिंक  पर एक गाइडलाइन जारी की गई है और इस गाइडलाइन को ड्रिंक पर लिखने की सिफारिश की गई है ।

इसमें कहा गया है कि यदि बच्चों को फलो का पैक जूस दिया जाता है तो उसकी एक मात्रा निर्धारित होनी चाहिए । 2 से 5 साल के बच्चों आधा कप और 5से 8 साल के बच्चों को एक कप ही ऐसे पेय पदार्थ दिया जा सकता है । बाल रोग विशेषज्ञ  डॉ हेमा गुप्ता मित्तल का कहना है कि यदि बच्चों को जूस  जैसी चीजें देना ही है तो उन्हें ताजे फलों का रस पीने को दे । छोटे बच्चे और  वयस्क को कार्बोनेटेड युक्त पेय पदार्थ, चाय और कॉफी का सेवन करने से बचना चाहिए और यदि स्कूल जाने वाले बच्चे और किशोर चाय और कॉफी का सेवन करते हैं तो उन्हें सीमित मात्रा में ही इसे लेना चाहिए ।

आज के समय में मार्केट में ऐसे पेय पदार्थों कीभरमार है जो बच्चों की सेहत को खराब करते हैं और बच्चों में मोटापा का इजाफा भी करते हैं । भारतीय बच्चों में फास्ट फूड और चीनी युक्त मीठे पेय पदार्थ की खपत को रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं । सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की तरफ से 9 से 14 साल तक की उम्र के 200 बच्चों पर एक टेस्ट किया गया जिसमें पाया गया कि 93% ऐसे बच्चे हैं जो फ़ास्ट फूड खाते हैं और 68% हफ्ते में एक बार से ज्यादा शुगर युक्त मीठे पेय पदार्थ का इस्तेमाल करते हैं । विशेषज्ञों का मानना है कि इसी का नतीजा है कि अधिक वजन/मोटापा, कार्डियोमेटाबॉलिक, हाई ब्लड प्रेशर संबंधी लक्षण और दाँतो के खराब होने जैसे समस्या की घटना होती है ।

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