भारतीय महिला को पांच प्रमुख बीमारियों से सचेत रहना चाहिए

महिलाएं परिवार के ड्राइवर की तरह होती है अगर ऐसे में अगर वे खुद ही स्वस्थ ना हो तो पूरी फैमिली को प्रॉब्लम हो सकती है

इसलिए महिलाओं को होने वाली 5 सामान्य बीमारीयो के बारे में हम बताने जा रहे हैं जिनसे महिलाओं को सचेत रहने की जरूरत है

भारतीय महिलाओं में ये बात बड़ी नेचुरल है की वो परिवार के सभी लोगों के बारे में सपने से ज्यादा सोचते हैं

परिवार और बच्चों का ध्यान रखना अछि बात है लेकिन आपको अपनी सेहत का भी उतना ही ख्याल रखना चाहिए ताकि आप बिमारियों से बचे रह सकें


  • ब्रैस्ट कैंसर

2013 के ग्लोबल बर्डन ऑफ़ कैंसर के अनुसार ब्रैस्ट कैंसर भारत में महिलाओं की मृत्यु का एक प्रमुख कारण है

1990 और 2013 ने ब्रैस्ट कैंसर के मरीज़ों की संख्या करीब करीब दोगुनी हो गयी ही और इससे भी बुरी बात ये है की इतनी खतरनाक होते हुए भी महिलाओं को इसका पता तब चलता है जब ये बीमारी तीसरे या चौथे स्टेज पर होती है।

जहाँ तक ब्रैस्ट कैंसर का सवाल है महिलाओं को 2 भागों में बाँटा जा सकता है एक वो जिनकी फैमिली हिस्ट्री है और दूसरे जिनकी नही है

अगर आपकी फैमिली हिस्ट्री है तो आपका रॉक बहुत ज्यादा है और ऐसी महिलाओं को नियमित तौर पर डॉक्टर से मिलते रहना चाहिए और जांच कराती रहनी चाहिए

जिनकी हिस्ट्री वैसी नही है उनके लिए यही अच्छा होगा की आप self examination करती रहें और डॉक्टर से मिलती रहें।

लेकिन इसके लिए भी उन्हें डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा और जानना पड़ेगा की जांच कैसे की जाती है, कब करनी चाहिए आदि उदाहरण के लिए पीरियड से पहले या बाद में

अगर किसी बात का शक हो तो डॉक्टर के पास जाएँ और पूछे की क्या करना चाहिए, मेम्मोग्राम करवाना होगा या ब्रेस्ट का अल्ट्रासाउंड 40 या 45 साल की उम्र के बाद तो महिलाओं को अपने ब्रैस्ट की नियमित अल्ट्रासाउंड या मेम्मोग्राम करवाते रहना चाहिए।” 


  • सर्वाइकल कैंसर

क्या आप जानते हैं की सर्वाइकल कैंसर दुनियाभर में और भारत में भी दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है ? दुनियाभर में हर साल 5 लाख महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर पाया जाता है जिनमे से करीब 280,000 की मौत हो जाती है  

भारत में सर्वाइकल कैंसर होने की सामान्य उम्र 45 से 59 साल है सर्वाइकल कैंसर हमारे देश में महिलाओं की मृत्यु का एक बड़ा कारण है

pap smear जैसा एक आसान सा टेस्ट इसके बचाव में मददगार साबित होता है, और अगर किसी तrhकी अनियमितता पायी जाए तो आपको तुरंत इसका इलाज़ करवा लेना चाहिए

हर महिला को चाहे वो शादी शुदा हों या न हों 18 साल की उम्र के बाद से हर तीन साल पर pap smear टेस्ट कराना ही चाहिए

इसके अलावा आप सर्वाइकल कैंसर वैक्सीन भी ले सकते हैं जो आजकल आसानी से उपलब्ध है लेकिन बिना किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ के सलाह के ऐसा न करें

  • Endometriosis

ये एक बीमारी है जो तब नज़र में आई जब सुपर मॉडल पद्म लक्ष्मी ने घोषणा की की वो इस बीमारी से पीड़ित हैं। ये एक सामान्य मेडिकल प्रॉब्लम है जो दुनियाभर में करीब 89 मिलियन reproductive age group की महिलाओं को प्रभावित करता है

Endometriosis Society of India के द्वारा जारी की गयी एक स्टडी में 2500 डॉक्टर ने भाग लिया और बताया की भारत के 26 मिलियन 18 से 35 की उम्र के बीच की महिलायों endometriosis की समस्या है

“Endometriosis बदकिस्मती से महिलाओं से तो क्या स्त्री रोग विशेषज्ञों और डॉक्टर से भी नहीं पहचाना जाता है

ऐसा इसीलिए है की इसका मुख्य कारण होता है पीरियड के दौरान दर्द जो की आम तौर पर सभी महिलाओं को होता ही है

 फिर भी चाहे जो भी मामला हो एक स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए . नहीं पहचाने जाने पर शरीर के अंदर भी ब्लीडिंग शुरू हो सकती है

इसका कोई इलाज़ भले न हो लेकिन शुरुवाती स्तर पर इसका पता चल जाने पर इसके रोकथाम के इंतज़ाम किये जा सकते हैं .”

सबसे अच्छा तरीका है की अगर पीरियड के दौरान आपको ज्यादा दर्द हो तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखायेंहो सकता है शुरू में लोग आप पर हँसे क्योंकि पीरियड के दौरान दर्द बहुत आम बात है लेकिन इसे शुरुवाती स्तर पर जानना भी बहुत जरूरी है

4 .  एनीमिया और कुपोषण

भारत में कुल आबादी के 50 फीसदी लोगों को एनीमिया होती है और इसे महिलाओं के संदर्भ में साइलेंट किलर भी कहा जा सकता है

समस्या ये भी है की महिलाएं इस समस्या से पुरुषों से ज्यादा प्रभावित हैं . माना जाता है की भरत में 20 से 30 फीसदी maternal deaths एनीमिया के वजह से होती है और करीब 56 फीसदी महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं

एनीमिया भारतीय महिलाओं में बहुत साधारण बात हो गयी है क्योंकि हम आज भी पुरुष प्रधान देश में रहते हैं जहाँ आज भी बहुत सी महिलाएं परिवार के खाने के बाद बचा हुआ खाना खाती हैं

लेकिन बच्चे वही पैदा करती हैं इसीलिए उन्हें बेहतर पोषण की जरूरत होती है एनीमिया के मुख्य लक्षण हैं कमजोरी, आलस, थकान, पीरियड के दौरान बहुत ज्यादा खून निकलना।

एनीमिया होने के 2 कारण हो सकते हैं पहला पोषक तत्वों की कमी और दूसरा पीरियड के दौरान बहुत ज्यादा खून बह जाना

पीरियड के दौरान बहुत ज्यादा खून बह जाने से भी एनीमिया हो जाता है अगर आपको पीरियड से जुड़े कोई भी प्रॉब्लम हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिलें

महिलाओं कक ज्यादा से ज्यादा हरी सब्ज़ियाँ, सोया, पनीर, दूध आधी खाना और पीना चाहिए नॉन वेजिटेरिअन लोग चिकन या मीट भी खा सकते हैं


  • हृदय रोग

भारत में हमें लगता है की सिर्फ पुरुषों को ही हार्ट प्रॉब्लम होती है या हाइपरटेंशन होता है लेकिन मैं आपको बता दूँ की इससे पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की मौत होती है

महिलाओं में होर्मोनस बहुत ज्यादा होते हैं लेकिन डॉक्टर से उनकी जांच कराते रहना भी बहुत जरूरी है

रिसर्च बताते हैं की महिलाओं में हार्ट अटैक कई बार misdiagnose हो जाते हैं या पकड़ में नही आते हैं  क्योंकि उन्हें अक्सर नहीं पता होता है की फ़्लू, पीठ दर्द, सांस तेजी से लेना, जबड़े में दर्द होना आदि भी दिल का दौरा पड़ने के लक्षण होते हैं

इससे बचने का एक ही तरीका है वो ये की आप अपने लाइफस्टाइल में बदलाव लाए, खाने पिने में ध्यान रखें  समय आ गया है की महिलाएं परिवार के साथ साथ अपना भी ख्याल रखना शुरू कर दें।

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