23.4 C
Delhi
Monday, March 8, 2021

वैज्ञानिको ने सुई के बराबर का बनाया इंडोस्कोप

Must read

अगले 10 सालों में Artificial Sun से रोशन होगी दुनिया आइए जानते हैं इस तकनीक के बारे में

अगर सब कुछ ठीक रहा और काम सही ढंग से चलता रहा तो अगले 10 सालों में धरती Artificial Sun की रोशनी पा सकेगी। मैसाच्युसेट्स...

क्या पैसे से खुशी हासिल की जा सकती है? क्या कहता है शोध

अक्सर हर किसी के मुँह से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि हमें अपनी जिंदगी में बेहद खुश रहना चाहिए। मुश्किलें जिंदगी...

आइए जानते हैं उन देशों के बारे में जहां पेट्रोल की कीमत है पानी के बराबर

हमारे देश में दिन-ब-दिन पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती जा रही हैं। जिससे आम जनता परेशान हो रही है। कई शहरों में पेट्रोल...

एंजेलिना जोली ब्रैड पिट से अलग होकर क्यों उससे दूर नहीं जा सकी

ब्रैंजलिना नाम से मशहूर ब्रेंड पिट और एंजेला जोली की ग्लैमरस जोड़ी ने जब अलग होने का फैसला उनके फैंस के लिए एक सदमे...

वैज्ञानिको ने बहुत ही छोटा इंडोस्कोप तैयार किया है जो लगभग सुई के आकार का है और लेंस रहित है इस बेहद छोटे आकार वाले इंडोस्कोप के जरिए शरीर के अंदर कोशिकाओं से भी छोटी वस्तु की 3डी तस्वीर ली जा सकती है यह बिना लेंस वाला छोटा इंडेस्कोप यांत्रिकी कंपोनेंट वाले इंडेस्कोप की नोक दो सौ माइक्रोन की है मतलब इंसान के बाल के बराबर की चौड़ाई का  

जीवित ऊतकों के अंदर की तस्वीरों को सामने लाने वाले इस नए इंडेस्कोप के जरिये विभिन्न प्रकार के शोधों और चिकित्सा विज्ञान में नए प्रयोग में सहायक होगा जर्मनी की ड्रेसडेन यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं का कहना है कि यह लेंस रहित फाइवर इंडेस्कोप सुई के आकार का है और बेहद संकरे मार्ग से अंदर जा के अंदर की तस्वीरों को ले सकता है ये तस्वीरे उच्च क्वालिटी की होती है शोधकर्ताओं का कहना है कि यह नया इंडेस्कोप ऑप्टोजेनेटिक्स में विशेष रूप से उपयोगी होगा

ऑप्टोजेनेटिक्स एक जैविक तकनीकी है जिसके जरिये जीवो के न्यूरान में छोटी कोशिकाओं को नियंत्रित करने के लिए प्रकाश का इस्तेमाल किया जाता है   इस इंडोस्कोप का  कोशिकाओं ऊतकों की निगरानी करने और टेस्ट करने में इस्तेमाल किया जा सकेगा इसके पहले परंपरागत इंडोस्कोप में तस्वीरों को लेने के लिए कैमरे और प्रकाश का प्रयोग किया जाता है पिछले कुछ वर्षों में शरीर के अंदर की तस्वीरों को लेने के लिए कोई सारि वैकल्पिक तरीकों को अपनाया गया लेकिन उसमें कोई सारी खामियों के चलते बहुत कारगर नही सबीथो सके

यह नया इंडोस्कोप बनाने के लिए कोहरेन्ट फाइबर बंडल की नोक पर पतली कांच की प्लेट का इस्तेमाल हुआ जो कि 150 माइक्रोन मोटी थी कोहरेन्ट फाइबर बंडल में लगभग दस हजार कोरे होती जब यह केंद की तरफ चमकती है तो एक बीम निकलती है और कांच की वजह से परावर्तित हो जाती है यह शरीर के छोटे छोटे ऑब्जेक्ट की 3डी तस्बीर बना देती है

- Advertisement -corhaz 3

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -corhaz 300

Latest article

अगले 10 सालों में Artificial Sun से रोशन होगी दुनिया आइए जानते हैं इस तकनीक के बारे में

अगर सब कुछ ठीक रहा और काम सही ढंग से चलता रहा तो अगले 10 सालों में धरती Artificial Sun की रोशनी पा सकेगी। मैसाच्युसेट्स...

क्या पैसे से खुशी हासिल की जा सकती है? क्या कहता है शोध

अक्सर हर किसी के मुँह से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि हमें अपनी जिंदगी में बेहद खुश रहना चाहिए। मुश्किलें जिंदगी...

आइए जानते हैं उन देशों के बारे में जहां पेट्रोल की कीमत है पानी के बराबर

हमारे देश में दिन-ब-दिन पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती जा रही हैं। जिससे आम जनता परेशान हो रही है। कई शहरों में पेट्रोल...

एंजेलिना जोली ब्रैड पिट से अलग होकर क्यों उससे दूर नहीं जा सकी

ब्रैंजलिना नाम से मशहूर ब्रेंड पिट और एंजेला जोली की ग्लैमरस जोड़ी ने जब अलग होने का फैसला उनके फैंस के लिए एक सदमे...

आइए जानते हैं हमारे Solar System के किस ग्रह को Vacuum Cleaner कहा जाता है

Solar System और ग्रहों की दुनिया अपने आप में बेहद दिलचस्प और अजीब होती है। इसे जितना को समझने की कोशिश की जाती है...