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Saturday, March 6, 2021

सावधान !! कच्चे दूध से भी ज्यादा जहरीला है पैकेज्ड दूध

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देशभर में दूध को लेकर एक सर्वे किया गया है और इससे चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं । देश में मिलने वाले कच्चे दूध की तुलना में पैक किया हुआ दूध दुगना जहरीला होता है । यह बात खाद्य नियामक भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के द्वारा देशभर में कराए गए सर्वे के आधार पर पता लगी है ।

इस सर्वे में इस सर्वे में कई सारे बड़े ब्रांड के पैकेज्ड दूध (प्रोसेस्ड मिल्क) और कच्चे दूध के नमूने लिए गए । ये नमूने निर्धारित गुणवत्ता और तय मानक पर खरे नहीं उतरे ।

बता दें पैकेट दूध के 10.4 फीसदी नमूने सुरक्षा मानकों के मानक पर फ़ेल रहे, वही कच्चा दूध के 4.8 फ़ीसदी नमूने सुरक्षा मानक में फेल हुए । इस तरीके से कच्चे दूध की तुलना में प्रोसैस्ड मिल्क के दुगने नमूने सुरक्षा मानक पर खरे नहीं उतरे हैं ।

इनमें अफलाटॉक्सिन एम1 एंटीबायोटिक और कीटनाशक जैसे जहरीले पदार्थ पाए गए । प्रोसैस्ड मिल्क में अफलाटॉक्सिन अधिक मात्रा में पाया गया । दरअसल अफलाटॉक्सिन का इस्तेमाल पशु आहार में होता रहा है ।

इस सर्वे में तमिलनाडु,दिल्ली, केरल, पंजाब, यूपी, महाराष्ट्र और उड़ीसा के सैंपल में अफलाटॉक्सिन पाया गया है और वही महाराष्ट्र, यूपी, आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश के सैंपल में एंटीबायोटिक अधिक मात्रा में मिले हैं । भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के मुताबिक गुणवत्ता मानकों पर प्रोसेस दूध के 37.7 फ़ीसदी नमूने फेल हो गए ।

अगर सुरक्षा मानक की बात करें तो इन नमूनों में केवल 12 नमूने में ही मिलावट पाई गई और यह ज्यादातर मामला तेलंगाना क्षेत्र का था ।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के प्रमुख ने कहा है कि लोग समझते हैं कि दूध में मिलावट ज्यादा गंभीर समस्या है लेकिन मिलावट से भी बड़ी समस्या दूध का प्रदूषित होना है क्योंकि इन नमूनों में फैट, एसएनएफ माल्टोसेक्टरीन और सुगर की मात्रा तय मानक से अधिक मिली है ।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने राष्ट्रीय दुग्ध सर्वे 2018 की अंतरिम रिपोर्ट जारी कर दी है । इसी में मिलावटी दूध को लेकर कई सारे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए । जल्द ही इस रिपोर्ट के आधार पर बड़े कदम उठाए जाएंगे ।

विशेषज्ञों का कहना है कि पशु आहार में ऐसे रसायनों का इस्तेमाल प्रतिबंधित किया जाना चाहिए । मालूम हो कि अफलाटॉक्सिन ऐसे माइकोटोक्सीन है जो ऐस्परजिल्स फ्लेवस और ऐस्परजिल्स पैरासाइटिक्स नामक फफूंद के द्वारा बनाया जाता है ।

इसे फफूंद से पैदा होने वाला जहर भी कहा जाता है । यह इंसान और जानवर दोनो के लिए हानिकारक होता है । या इंसानों के लीवर को प्रभावित करता है और बच्चों के शारीरिक विकास को भी सीधे तौर से प्रभावित करता है तो आगे से पैर दूध के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है ।

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