“आप” के संघर्ष और सत्ता पर काबिज होने के सफरनामे को
राजनीति

जानते हैं दिल्ली में “आप” के संघर्ष और सत्ता पर काबिज होने के सफरनामे को

जैसा कि मालूम है दिल्ली के चुनाव में आम आदमी पार्टी आपको लगातार तीसरी बार दिल्ली में सरकार बनाने का अवसर मिला है । पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल किया है । इसी के साथ अरविंद केजरीवाल अब शीला दीक्षित की कतार में खड़े हो जाएंगे । शीला दीक्षित सबसे ज्यादा तीन बार दिल्ली का विधानसभा चुनाव जीत कर दिल्ली में कांग्रेस की सरकार बनाई थी । अब आप के अरविंद केजरीवाल लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव जीतकर दिल्ली में सरकार बनाने जा रहे हैं और तीसरी बार मुख्यमंत्री बनेंगे ।

जानते हैं आम आदमी पार्टी के  सफरनामा को :—

लोकपाल को लेकर संघर्ष और अनशन के दौरान आम आदमी पार्टी का गठन हुआ और उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि यह पार्टी कभी सत्ता का स्वाद भी चलेगी । लेकिन आज अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी एक मजबूत पार्टी के रूप में सामने हैं । 26 नवंबर 2012 को अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के गठन की घोषणा की थी । उन्होंने आम आदमी पार्टी के गठन की घोषणा भारतीय संविधान अधिनियम की 63 वीं वर्षगांठ के मौके पर दिल्ली के जंतर मंतर से की थी जहां पर अनशन चल रहा था । 2 अक्टूबर को इस पार्टी का अधिकारी गठन किया गया । इस तरह से आम आदमी पार्टी का इतिहास बस कुछ साल ही पुराना है ।

अप्रैल 2011 में इंडिया अगेंस्ट करप्शन की मांग को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे के नेतृत्व में जनलोकपाल के लिए आवाज बुलंद की गई थी और इस आंदोलन में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, योगेंद्र यादव, किरण बेदी, प्रशांत भूषण जैसे कई बड़े चेहरे गए थे । इस आंदोलन की आवाज जनमानस तक सोशल मीडिया के माध्यम से पहुंच बनी और हजारों की संख्या में समर्थक सड़क पर उतर आए और सभी ने सरकार से देश में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए लोकपाल विधेयक लेन की मांग की और हर किसी को इसके दायरे में रखने की बात कही । साथ ही लोकपाल विधेयक को लेकर एक मसौदा भी सरकार को सौंपा गया लेकिन सरकार ने तवज्जो नहीं दी तो 5 से 9 अप्रैल के बीच अन्ना हजारे ने अनशन शुरू कर दिया । प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने कुछ सकारात्मक रूप अपनाया और अन्ना हजारे ने अनशन खत्म करने का फैसला लिया ।

लेकिन मई 2011 में अन्ना हजारे ने फिर से अनशन शुरू किया और धीरे-धीरे यहां आंदोलन का रूप ले लिया और भारतीय युवा इससे जुड़ते गए और आंदोलन को समर्थन मिलने की वजह से सरकार ने 16 अगस्त 2011 तक विधेयक लोकपाल विधेयक संसद में लाने की मांग को मान लिया । संसद में जो विधेयक पेश किया गया वो मांग के अनुरूप नहीं था तो अन्ना हजारे ने एक बार फिर से अनशन पर बैठने की धमकी दी । लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया । अन्ना हजारे की गैरमौजूदगी में अरविंद केजरीवाल ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया और सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की । नतीजा यह हुआ कि अन्ना हजारे को जेल से रिहा कर दिया गया । अन्ना फिर से जंतर मंतर पहुंचकर अनशन शुरू कर दिए और इसी बीच लगातार सरकार से बातचीत होती रही अन्ना हजारे ने अपना अनशन समाप्त करने के लिए सार्वजनिक तौर पर तीन शर्तों का ऐलान किया   जिसमें कहा गया था कि –

  • सभी सरकारी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाया जाए
  • सभी सरकारी कार्यालयों में एक नागरिक चार्टर लाया जाए
  • सभी राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति हो

सरकार में अनशन को समाप्त करने के लिए लोकसभा में विधेयक लाने का ऐलान किया । जब आंदोलन समाप्त हो रहा था तब एक सोच पनप रही थी कि राजनीति में आए बिना अपनी मांगों को मनवाना मुश्किल है । हालांकि अन्ना हजारे राजनीति से अलग रहना चाहते थे । लेकिन अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगियों की राय थी कि एक राजनीतिक पार्टी बनाकर चुनाव में उतर जाए । इसी सोच के मद्देनजर अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी का गठन किया । आम आदमी पार्टी ने 2013 में ‘झाड़ू’ निशान के साथ पहली बार दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ा और 28 सीटों पर जीत दर्ज की ।

आप ने कांग्रेस को समर्थन दिया और पार्टी ने केजरीवाल के नेतृत्व में सरकार बनाई । हालांकि यह सरकार ज्यादा दिन नहीं चली और 49 दिन के बाद 14 फरवरी 2014 को अरविंद केजरीवाल को त्यागपत्र देना पड़ा । 2015 में विधानसभा के चुनाव में आम आदमी पार्टी को शानदार जीत मिली । आम आदमी पार्टी को 67 सीट मिली । इस चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली जबकि भाजपा को मात्र 3 सीटें ही मिली थी । इसके बाद साल 2020 के विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने 62 सीटों पर जीत दर्ज की है । एक बार फिर से अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बनने जा रहे है ।

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