सोशल मीडिया के दौर में डाक टिकट की बिक्री में कमी आई

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आज के इंटरनेट,सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के जमाने से पहले एक  दौर था सब लोग एक दूसरे का हालचाल लेने के लिए और एक दूसरे से संपर्क करने के लिए चिट्ठियों का इस्तेमाल करते थे लेकिन अब यह  बीते जमाने की बात हो गई है 21वीं सदी में तकनीकी में बहुत उन्नति कर  ली है सोशल साइट के जरिए लोगो तुरंत और आसानी से संपर्क बना लेते हैं और ऐसे में चिट्ठी भेजना काफी कम हो गया और डाक टिकटों की बिक्री में काफी गिरावट देखने को मिली है

इस बात की जानकारी सूचना के अधिकार कानून के तहत मिले डाक विभाग के आँकड़ो के माध्यम से होती है दिए गए आंकड़ों के अनुसार डाक टिकटों की बिक्री में साल दर साल गिरावट ही देखने को मिल रही है आंकड़े के अनुसार वर्ष 2018 – 19 डाक टिकटों से होने वाले राजस्व में 78.66% की कमी आई वित्त वर्ष 2017-18 में डाक विभाग नें टिकट  बेचकर 366.69 करोड़ रुपए कमाए थे  आज के जमाने में लोग सोशल मीडिया साइट जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम के माध्यम से बातें कर लेते है

इंदौर के एक वरिष्ठ पोस्टमैन ने बताया कि एक जमाना था जब थैला चिट्ठियों से ठसाठस भरा रहता था जिसमे सरकारी और निजी दोनों तरह के पत्र शामिल रहते थे लेकिन अब थैले में सरकारी विभागों और निजी कंपनियों के पत्र ही देखने को मिलते है । लोगों पर संचार के आधुनिक संसाधनों के प्रयोग के प्रभाव को लेकर मनोवैज्ञानिकों ने कई अध्ययन के किये है ।

मनोवैज्ञानिक डॉक्टर स्वाति ने कहा यह सच है कि हाथों से लिखी चिट्ठी  पढ़कर मन में अपनेपन  का एहसास होता है और पत्रों से एक भावनात्मक याद जुड़ जाती हैं लेकिन इस सोशल मीडिया के दौर में सोशल मीडिया का अपना अलग महत्व है मालूम हो कि डाक विभाग में डाक टिकटों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए माय स्टाम्प नामक एक योजना चलाई है  जोकि लोगों की अपनी पसंद के आधार पर है इसमें ग्राहक एक निर्धारित शुल्क देकर डाक टिकट पर अपने खुद के या अपने प्रियजनों की तस्वीर, उनके प्रतीक चिन्ह अथवा धरोहर भवनों की फोटो को छपवा सकता है इसके माध्यम से डाक विभाग में डाक टिकटों की बिक्री को बढ़ावा देने का प्रयास किया है

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