वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी कम एंटीबॉडी बनने से इस आयु वर्ग के लोगो को संक्रमित होने का अधिक खतरा

वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी कम एंटीबॉडी बनने से इस आयु वर्ग के लोगो को संक्रमित होने का अधिक खतरा

भारत में कोरोना वायरस की तीसरी लहर आने की आशंका बनी हुई है। कोरोना वायरस की नई वैरियंट से बचाव के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को जल्द से जल्द लगाने की सलाह दे रहे हैं।

ऐसा समझा जा रहा है कि वैक्सीन लगने के बाद शरीर में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडी बन जाएगी और इससे कोरोना वायरस से लोग सुरक्षित रह सकेंगे।

हालांकि इस संबंध में अलग-अलग नतीजे सामने आ रहे हैं। कई सारे शोध में एंटीबॉडी को लेकर अलग-अलग बात सामने आई है।

अभी हाल में ही हुए एक शोध में बताया गया है कि वृद्ध लोगों में कोरोना वायरस की वैक्सीन की दोनो डोज लेने के बाद भी युवाओं की तुलना में कम एंटीबॉडी बन रही है। ऐसे में वैक्सीनेशन के बाद भी उन्हें कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा अधिक है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीबॉडी एक प्रकार की प्रोटीन होती है जो इम्यूनिटी द्वारा निर्मित होती है। यही शरीर में संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करती है।

हाल में ही हुए शोध में कहा गया है कि वृद्ध लोगों में टीकाकरण के बाद भी नये वैरीअंट के खिलाफ उन्हें अतिसंवेदनशील माना जा रहा है।

इसका प्रमुख कारण यह है कि उनके शरीर में पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडी नहीं बन रही है। ऐसे में आइए जानते हैं कैसे ऐसे लोग कोरोनावायरस से खुद को सुरक्षित रखें।

उम्र के आधार पर एंटीबाडी के सम्बंध में शोध

अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन जनरल में एक शोध प्रकाशित किया गया है। जिसमें वैज्ञानिकों ने बताया है कि तमाम उम्र के लोगों में वैक्सीन लेने के बाद एंटीबॉडी किस तरह से बन रही है।

एक तरह से यह शोध एंटीबॉडी को लेकर किया गया है। एएचएसयू स्कूल मेडिसिन में मॉलिक्यूलर माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी के सहायक प्रोफेसर फिकाडू ताफोसे कहते हैं कि उम्रदराज लोगों में एंटीबॉडी वैक्सीन लेने की बात कम बन रही है।

हालांकि शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि वृद्ध लोगों में भले ही एंटीबॉडी की प्रतिक्रिया कम है लेकिन इससे वो कोरोना वायरस के गंभीर संक्रमण से सुरक्षित हैं।

वैक्सीन बचाती है कोरोना वायरस होने वाली मौत और गंभीर संक्रमण से:-

शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लग चुकी है, भले ही उनके शरीर में कम मात्रा में एंटीबॉडी बन रही है।

लेकिन वह कोरोना वायरस की गंभीर संक्रमण से और कोरोना वायरस से होने वाली मौत से सुरक्षित हैं। टीकाकरण गंभीर रूप से कोरोना वायरस के प्रसार को भी कम करने की क्षमता रखता है।

ऐसे में वृद्ध लोगों का टीकाकरण काफी जरूरी है क्योंकि यह लोग संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। वृद्ध लोगों को सुरक्षित रखने के लिए सभी को, जो उनकी उनके पास रहते हैं उनका टीकाकरण होना बहुत जरूरी है। इस संक्रमण को रोकने का यही एक बेहतर उपाय है।

युवाओं में अधिक एंटीबॉडी :-

शोधकर्ताओं का कहना है कि फाइजर वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के बाद 50 लोगों का ब्लड टेस्ट किया गया और उनकी एंटीबॉडी को जानने की कोशिश की गई।

शोधकर्ताओं ने पाया कि 70 से 82 आयु वर्ग के लोगों की तुलना में 20 साल के आसपास के आयु वर्ग के लोगों में एंटीबॉडी बनने की प्रक्रिया लगभग 7 गुना अधिक है।

शोध में यह भी कहा गया है कि उम्रदराज लोगों में एंटीबॉडी भले ही कम बन रही है लेकिन यह संक्रमण के खिलाफ अति संवेदनशील माने जाते हैं।

शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस के नए वैरीअंट के संबंध में कहा है कि युवाओं की तुलना में नए वैरीअंट से वृद्ध लोगों को अधिक खतरा है और टीकाकरण उन्हें काफी हद तक सुरक्षा प्रदान करता है।

शोध का निष्कर्ष

शोध का निष्कर्ष निकला है कि वृद्ध लोगों के साथ-साथ अन्य लोगों के लिए भी टीकाकरण बेहद जरूरी है।

इससे यह स्पष्ट हो चुका है कि प्राकृति की तुलना में वैक्सीन से शरीर में इम्यून सिस्टम तेजी से विकसित होता है। ऐसे में वृद्ध लोगों का टीकाकरण होना जरूरी है जिससे वह कोरोना वायरस के गंभीर संक्रमण से बच सकें।

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