“महाराजा” की नीलामी तक का सफर

हवा में उड़ने वाले “महाराजा” ( एयर इंडिया ) की नीलामी तक का सफर है दिलचस्प

मालूम हो कि टाटा एयरलाइंस ने 1932 में एयरलाइन की सर्विस शुरू की थी । 15 अक्टूबर 1932 को जेआरडी टाटा ने कराची से मुंबई की फ्लाइट खुद उड़ाई थी और वह देश के पहले लाइसेंसी पायलट भी थे । इसका नाम 1946 में बदलकर एयर इंडिया कर दिया गया और सरकार ने इसे 1953 खरीद लिया । एयर इंडिया सन 2000 तक मुनाफे में चलने वाली कंपनी थी ।

लेकिन साल 2001 में कंपनी को 57 करोड़ का घाटा हुआ और उसके बाद 2007 में केंद्र सरकार ने एयर इंडिया में इंडियन एयरलाइंस का विलय कर दिया जिससे दोनों का संयुक्त बढ़ गया और यह बढ़ता ही गया ।

एयर इंडिया को ज्यादा ऑपरेटिंग कास्ट और विदेशी मुद्रा में घाटे के चलते काफी ज्यादा भारी नुकसान का सामना करना पड़ा । घाटा होने की वेज से एयर इंडिया  तेल कंपनियों को ईंधन का बकाया चुकाने में असमर्थ हो गई और अब सरकारी इसे बेचने के लिए नीलामी प्रक्रिया को अपना रही है ।

अब देखते हैं एयर इंडिया किसके हाथ में जाती है और कैसे इतने बड़े कांटे से उभरती है ।एयर इंडिया की नीलामी होने वाली है । वित्तीय संकट में फंसने के चलते एयर इंडिया में सरकार ने अपनी 100% की हिस्सेदारी बेचने की सूचना जारी कर दी है ।

सूत्रों के मुताबिक सरकार एयर इंडिया एक्सप्रेस में अपनी 100% की हिस्सेदारी और ज्वाइंट वेंचर एयर इंडिया सैट्स में 50% हिस्सेदारी बेचेगी । यह बिक्री नीलामी के जरिये होगी और बोली लगाने की अंतिम तारीख 17 मार्च तय की गई है ।

कम्पनी की बोली लगाने के लिए सरकार ने सब्सिडियरी कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस और एयरपोर्ट सर्विस कंपनी को भी आमंत्रित किया है जो कम्पनी एयर इंडिया को खरीदेगी उसे 32447 करोड की देनदारी भी  हस्तांतरित हो जाएंगी जबकि 56334 करोड़ रुपये का ऋण देनदारी और कॉरपोरेट गारंटी विशेष उद्देश्य से बनाई गई कम्पनी एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड को ट्रांसफर कर दी जाएगी ।

नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार एयर इंडीया के कर्मचारी इस पूरी प्रक्रिया से प्रभावित नहीं होंगे । एयर इंडिया के स्थाई कर्मचारियों को 3% हिस्सेदारी दी जाएगी । मालूम हो एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के 17000 कर्मचारी हैं जिसमें से 9 हजार से अधिक स्थाई हैं जिनकी मुख्य देनदारी सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के देनदारी की है ।

यह सरकार द्वारा अदा किया जाएगा । स्थाई कर्मचारियों में से करीब 36% अगले 5 साल में रिटायर हो जाएंगे । एयर इंडिया को सबसे बड़े घाटे का कारण अधिकारियों के अनुसार पाकिस्तान द्वारा हवाई रुट बंद कर दिए जाने के बाद एयरलाइन को हर दिन करीब तीन से चार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ ।

मालूम हो कि जेआरडी टाटा ने 1948 में एयर इंडिया को लांच किया था और भारत सरकार ने 5 साल बाद ही इसे अपने नियंत्रण में ले लिया साल 2005 में एयर इंडिया ने 111 ने प्लेन खरीदे थे और उन दिनों कंपनी की हालत अच्छी नहीं थी और यह भी कारण है कि कंपनी पर 70 हजार करोड़ का इन प्लेन को खरीदने की वजह से खर्चा बढ़ गया ।

इसके अलावा एयर इंडिया ने अपने प्लेन को घाटे में बेच दिया गया था । जानकारों के मुताबिक यदि कोई निवेशक इस कंपनी को खरीदता है तो उसे एक बना बनाया बाजार मिलेगा साथ ही उस कंपनी की घरेलू स्तर पर उड़ानों के लिए जरूरतों की पूर्ति भी बड़ी आसानी से पूरी हो जाएगी । इंडिगो के बाद एयरक्राफ्ट के मामले में एयर इंडिया दूसरे स्थान पर है ।

एयर इंडिया को सरकार पिछले साल ही बेचना चाहती थी लेकिन उन दिनों कच्चे तेल की कीमतों में काफी अस्थिरता थी जिस वजह से सरकार ने इसे रोक दिया और एक बार फिर से अब सरकारी एयर इंडिया को बेचने के लिए सक्रिय हो गई है ।

दिल्ली और मुंबई में एयर इंडिया की जमीन और इमारतों को बेचकर ऋण की अदायगी की जाएगी और इसके बाद भी यदि भरपाई नहीं हो पाती है तो उस राशि को सरकार द्वारा अदा की जाएगी ।

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