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Saturday, February 27, 2021

आइए जाने अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया के बारे में

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कोरोना वायरस महामारी अमेरिका में कहर ढा रही है। इसी बीच अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव भी धीरे-धीरे नजदीक आता जा रहा है। इस राष्ट्रपति चुनाव में वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विपक्षी उम्मीदवार बिडेन और उप राष्ट्रपति की उम्मीदवार कमला हैरिस जीतने के लिये अपना पूरा जोर इस चुनाव में लगा रहे हैं।

इस चुनाव का एक बड़ा फैक्टर अमेरिका में रहने वाले भारतीय भी हैं जिन्हें हर कोई अपनी तरफ करने के लिए सभी जद्दोजहद कर रहा है। इसके अलावा चीन, कोरोना वायरस से लड़ाई और अन्य स्थानीय मुद्दे भी हैं जो राष्ट्रपति चुनाव का परिणाम प्रभावित करने में सक्षम है।

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है ऐसे में हर किसी के लिये अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया के बारे में जानना भी जरूरी है। जैसा कि मालूम है 3 नवंबर को अमेरिका की जनता अपनी राष्ट्रपति के चुनाव के लिए वोट करेगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति बनने की योग्यता : –

अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के लिए सबसे पहली योग्यता इस चुनाव में खड़ा होने वाला व्यक्ति जन्म से ही अमेरिका का नागरिक होना चाहिए और दूसरी योग्यता उसकी उम्र 35 साल से कम नही होनी चाहिये।

जो व्यक्ति इन दोनों शर्तों को पूरा करता है वह अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव लड़ सकता है। इसके अलावा एक तीसरी सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि वह कम से कम 14 साल से अमेरिका में रह रहा हो।

अमेरिका में पार्टी सिस्टम :-

अमेरिका में भारत की तरह चुनाव में बहुत सारी पार्टियां भाग नहीं लेती हैं। वहां पर दो पार्टी का सिस्टम है। अमेरिका में दोनों पार्टियों का नाम क्रमशः रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स है। इन्हीं के बीच मुकाबला होना है। इन दोनों पार्टियों के अलावा कोई भी तीसरी पार्टी वहां पर नहीं है और इन दोनों पार्टियों द्वारा ही अपना प्रत्याशी तय किया जाता है।

अमेरिका में प्रत्याशियों का चयन करने की भी एक प्रक्रिया है। इस तरह से यहां पर दो तरह का चुनाव होता है जिसे प्राइमरी और कॉकसस भी कहा जाता है। इस तरह से इस दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता में से कोई भी राष्ट्रपति के चुनाव में खड़ा हो सकता है बस उसे अपने समर्थक चाहिए होंगे।

प्राइमरी चुनाव अमेरिका के राज्य सरकारों द्वारा कराए जाते हैं, वह भी दो प्रकार से होता है – प्राइमरी चुनाव में खुली और बन्द प्रक्रिया शामिल है। खुला चुनाव में पार्टी के समर्थकों के साथ-साथ आम जनता भी इसमें मतदान करती है और बंद व्यवस्था में सिर्फ पार्टी के समर्थक ही उम्मीदवार को वोटिंग करते हैं।

राष्ट्रपति चुनाव में एक व्यवस्था करकस सिस्टम है जिसे पार्टी द्वारा ही अंजाम दिया जाता है। इस प्रक्रिया में पार्टी के समर्थक एकत्रित होते हैं और अलग-अलग मुद्दों पर विचार विमर्श करते हैं।

अगर उनकी राय लोगों को सही लगती है तो लोग उनके समर्थन में अपना हाथ खड़ा करते हैं। बता दें कि इस तरह की प्रक्रिया के द्वारा कुछ ही देशों में राष्ट्रपति का चुनाव होता है। इन दोनों प्रक्रिया में वोटिंग के लिए लोगों को किसी एक पार्टी के लिए पहले से ही रजिस्टर करना होता है। इसके बाद ही उन्हें वोट करने का अधिकार मिलता है।

यह भी पढ़ें : जानिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विमान “एयर फोर्स वन” के बारे में

दोनों पार्टियों द्वारा अमेरिका में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के लिए एक निश्चित संख्या होती है और जिसके ज्यादा समर्थक होते हैं वही नेशनल कंवेशन के लिए आगे बढ़ पाता है।

इस साल डेमोक्रेट्स के कुल डेलिगेट्स की संख्या 3979 है जबकि जीतने के लिए सिर्फ 1991 डेलिकेट्स की जरूरत है। इसी तरह रिपब्लिकन पार्टी के कुल डेलिगेट्स की संख्या 2550 है और उम्मीदवार बनने के लिए 1276 समर्थन की जरूरत है।

election 2020

दोनों ही पार्टियों द्वारा राष्ट्रपति पद के लिए प्रत्याशी तय करने के बाद इसका आधिकारिक ऐलान का किया जाता है और यह एलान डेमोक्रेट्स के लिए जुलाई महीने में होता है और रिपब्लिकन पार्टी के लिए अगस्त के महीने में।

इसी में पार्टी द्वारा सर्वोच्च टीम उम्मीदवार का ऐलान करती है कि राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार अपने समर्थकों के सामने भाषण देगा। यही पर प्रत्याशी द्वारा उपराष्ट्रपति के लिए भी चुनाव का ऐलान करना होता है।

यह भी पढ़ें : अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में चीन का मुद्दा बना साझा मुद्दा

इसी के बाद ही असली राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो पाती है। इसके बाद जनता स्थानीय तौर से एक इलेक्टोरल का चुनाव करती है और वही राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का प्रतिनिधि होता है। इसे इलेक्टोरल कॉलेज के नाम से भी जानते हैं। इसमें कुल 538 सदस्य विभिन्न राज्यों से आते हैं।

इस तरह से अमेरिका में राष्ट्रपति चुनने में जनता की चुनाव में हिस्सेदारी बेहद सीमित होती है। इसके बाद यह जनता द्वारा चुने चुने गए इलेक्टर ही वोटिंग करके राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को चुनाव को जीतने के लिए 270 से अधिक इलेक्टर्स के समर्थन की जरूरत होती है और जीतने वाला व्यक्ति राष्ट्रपति पद की शपथ 20 जनवरी को लेता है। अमेरिका में राष्ट्रपति का चयन 5 साल के लिए किया जाता है।

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