हो जाए सावधान यदि हाथ पैर हो रहे हो सुन्न
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हो जाए सावधान यदि हाथ पैर हो रहे हो सुन्न : हो सकती है स्लिप डिस्क की बीमारी

हो जाए सावधान यदि हाथ पैर हो रहे हो सुन्न , क्योंकि यह स्लिप डिस्क होने के लक्षण है । स्लिप डिस्क एक ऐसी बीमारी है जिसे फिजियोथैरेपी और दवा से ठीक नहीं किया जा सकता है । फिजियोथेरेपी और दवा से स्लिप डिस्क में राहत नहीं पहुंचती है ।

स्लिप डिस्क के मरीजों के लिए माइक्रो एंडोस्कोपी डिस्क सर्जरी एक उम्मीद की किरण है ।यह  तकनीक परंपरागत ओपन डिस्क सर्जरी की तुलना में कहीं जाएगा सुरक्षित और कारागार है ।

मालूम हो कि रीड की हड्डी में इंटर वर्टिकल डिस्को होती है और यह डिस्क हड्डियों के बीच में एक तरह से स्क्रीग की तरह काम करती है जैसे कि मोटर गाड़ियों के शॉकर झटकों को बर्दाश्त करते हैं ठीक उसी तरह यह वर्टिबल डिस्क भी शरीर के लिए शॉकर की तरह काम करती है ।

इस डिस्क के जरिए शरीर को सीधे झटका नहीं लग पाता है । इस डिस्क के बीच में एक जेल जैसा पदार्थ पाया जाता है । इस जेल जैसे पदार्थ को न्यूक्लियस पलपोसस कहा जाता है । यह कार्टिलेज की टिश्यूज और कैप से सुरक्षित रहती है जिसे एनुल्स फाइब्रोसिस कहा जाता है ।

जानते हैं स्लिप डिस्क के लक्षण

  • कंधे या कूल्हे में तेज दर्द होना
  • टहलने में तकलीफ होना
  • कमर के निचले भाग में तेज दर्द होन
  • किसी भी वस्तु को पकाने में परेशानी होना
  • हाथ या पैरों में सुन्नपन व भारीपन महसूस होना
  • पैर में तेज दर्द होना जिसे साइटिका का दर्द भी कहा जाता है
  • कभी-कभी पैरों में तेज बिजली जैसी चमक को महसूस करना

स्लिप डिस्क की समस्या होने पर रीड की हड्डी में दर्द होता है  और गर्दन पीठ और कमर में दर्द और जकड़न रहती है । लिखने, भोजन करने में समस्या आती है  । गंभीर मामलों में तो मल- मूत्र संबंधी समस्या भी उत्पन्न हो जाती है ।

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स्लिप डिस्क सबसे कारागार इलाज माइक्रो एंडोस्कोपी डिस्क सर्जरी है । इसकी खासियत यह है कि इससे किसी भी प्रकार का रक्त नहीं निकलता । कोई भी जोखिम या साइड इफेक्ट नहीं होता है ।

सर्जरी से किसी भी प्रकार का संक्रमण भी नहीं होता है और 90% से अधिक मामलों में सफलता पाई गई है । इस सर्जरी को करवाने के लिए अस्पताल में एक दिन से ज्यादा भरती भी नहीं रहना पड़ता ।

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स्लिप डिस्क बीमारी होने पर इसकी सख्त कैप में विकार आ जाता है और जिस वजह से इसकी संरचना बिगड़ जाती है और कमजोर हो जाती है । इसी वजह से न्यूक्लियस परपोज में स्थित जेल जैसे पदार्थ का रिसाव बाहर होने लगता है और यह स्थिति इंटर वर्टिबल डिस्क इसके पीछे से गुजर रही नसों पर दबा देता है और धीरे-धीरे यह जेल रिसने लगता है फूलने लगता है ।

जिसका आकार बड़ा हो जाता है और स्टोन की तरह सख्त हो जाता है । समय के साथ यह स्टोन नसों को तकलीफ देने लगता है और बाद में यही स्लिप डिस्क की समस्या पैदा करती है ।

इसलिए स्लिप डिस्क के कोई लक्षण नजर आएं या रीड की हड्डी में दर्द हो तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें और आवश्यकतानुसार इलाज करवाएं । तंदुरुस्त रहे सेहतमंद रहे ।

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