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Friday, January 22, 2021

कोरोना वायरस के स्वरूप में बदलाव इसे बना रहा है और भी घातक

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जैसा कि हम सब जानते हैं कोरोना वायरस का पहला मामला दिसंबर 2019 में पहली बार चीन में देखा गया था और देखते ही देखते पूरी दुनिया में महामारी बनके फैल गया।

वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस अपनी कॉपी बनाता जाता है और इस तरह से फैलता है। यूनिवर्सिटी आफ इलिनाइस के शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस अपने स्वरूप में बदलाव करके अधिक स्थिर बनाने की कोशिश कर रहा है जिसके चलते वह नए क्षेत्रों में भी फैल सकता है। बता दे यह शोध जनरल इवोल्यूशनरी बायोइनफॉर्मेटिक्स में प्रकाशित किया गया है।

कोरोना वायरस के स्वरूप में हो रहे इस बदलाव को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस के प्रोटिओम में हो रही म्यूटेशन को ट्रैक करने की कोशिश की। बता दें कि प्रोटिओम वायरस में जेनेटिक मैटेरियल से घिरा एक प्रोटीन का भंडार होता है।

बता दें कि मई से अब तक इसके करीब 15,300 से भी अधिक जीनोम की खोज हो चुकी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी कुछ क्षेत्र में इस वायरस में म्यूटेशन हो रही है।

जो यह बताता है कि अभी भी यह फैलने के लिए अनुकूल बनने की कोशिश में लगा है। वही कुछ क्षेत्र में इसकी म्यूटेशन की दर बेहद धीमी है, वजह यह है कि कुछ प्रोटीन आपस में ही सिमट रहे हैं।

इस शोध से जुड़े एक शोधकर्ता का कहना है कि यह वायरस बदल रहा है और लगातार बदलता ही जा रहा है। यह उन चीजों को अपना रहा है जो इसे फैलने और विकसित होने में मददगार साबित हो रहे है। वहीं कुछ ऐसे प्रोटीन स्थिर हो रहे हैं जो इसके इलाज में मदद कर सकते हैं।

शोधकर्ताओं की टीम के अनुसार कोरोना वायरस में हो रहे बदलाव की दर मार्च तक काफी तेज थी लेकिन अप्रैल के बाद इसमें कमी देखी जा रही है।

कोरोना वायरस के स्पाइक में भी मौजूद प्रोटीन में स्थिरता आ गई है। बता दें कि यह कोरोना वायरस के ऊपरी हिस्से में उभरे हुए होते हैं जो अब स्थिर हो रहे हैं।

यह भी पढ़ें : क्या शरीर में एंटीबॉडी बन जाने से कोरोना वायरस नही होता है?

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस स्पाईक की साइड में 614 एमिनो एसिड थे जो अब दूसरे स्पाईक में बदल गए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार कोरोना वायरस के इस्पाइक में अब बिल्कुल नए तरह का प्रोटीन पाया जा रहा है।

बता दें कि स्पाइक में मौजूद प्रोटीन 2 तरह से काम करता है। पहला मानव कोशिकाओं को वायरस से जोड़ने का काम करता है वही दूसरा जेनेटिक मैटेरियल को कॉपी करने का काम कैसा है।

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हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस में म्यूटेशन का इस बीमारी पर गंभीर यर कोई प्रभाव नहीं देखा गया था। हालांकि कई अन्य दूसरे शोध में इस वायरस से मृत्यु दर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

म्यूटेशन से बीमारी कितनी बढ़ती है और उसका क्या असर होता है अभी इस पर शोध किया जाना बाकी है। लेकिन म्यूटेशन की वजह से वायरस मेजबान कोशिकाओं में जल्दी से घुस जाता है।

इससे पता चलता है कि न्यूक्लियोकैप्सिद सबसे ज्यादा है। वही यह अलग-अलग बीमारियों में अलग-अलग होती है। किसी में यह अच्छी तरह से विकसित हो जाती है।

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शोधकर्ताओं ने इस वायरस के प्रोटियोम में भी उन क्षेत्रों का पता लगाया हैं जिनमें समय के साथ बदलाव की संभावना अधिक है। इस शोध से पता चलता है कि न्यूक्लियोकैप्सिद प्रोटीन में म्यूटेशन की दर सबसे ज्यादा है।

यह मेजबान सेल के अंदर प्रवेश करके वायरस की कॉपी बनाता है और होस्ट सेल में म्यूटेशन बना देता है और अपनी कॉपी बनाता जाता है और इस तरह आक्रमण करता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस पर ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि प्रोटीन के स्वरूप में बदलाव देख रहा है और वायरस तेजी से अपने प्रसार के लिए कई तरीके तलाश रहा है।

बता दें कि अब कोरोनावायरस से 43 करोड़ से भी ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। वही लगभग 12 लाख लोगों ने अपनी जान गवाई है।

कोरोना वायरस चीन से होते हुए आज दुनिया के लगभग 215 देशों में फैल चुका है। आज शायद ही धरती का कोई ऐसा हिस्सा बचा हो जहां पर यह वायरस अपनी पहुंचना न बना पाया हो।

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