चीन अंतरास्ट्रीय मंच पर घिरने लगा है।
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अंतरास्ट्रीय मंच पर घिरते ही चीन दूसरे देशों पर दबाव बनाने लगा

आज के बैश्विक परिस्थिति के कारण चीन अंतरास्ट्रीय मंच पर घिरने लगा है ।   दुनिया की अधिकांश जनसंख्या कोरोना वायरस से परेशान है । लोग अपने घरों में कैद हैं और सिर्फ जरूरी काम के लिए ही बाहर निकल पा रहे हैं । लोग जल्द से जल्द कोरोना वायरस से निजात पाना चाहते हैं और अपने सामान्य दिनचर्या की तरफ लौटना चाहते हैं । जैसा कि सबको मालूम है कोरोना वायरस फैलने की शुरुआत चीन से हुई थी।

पूरा विश्व समुदाय चीन पर सवाल उठा रहा है कि कोरोना वायरस का स्त्रोत क्या है ? अब विश्व स्वास्थ्य संगठन के 62 सदस्य देशों ने मिलकर इसकी हाल में हुई वर्ल्ड हेल्थ असेंबली के दौरान यह मुद्दा उठाया जिसमें कोरोना वायरस के स्त्रोत को लेकर स्वतंत्र जांच की मांग की गई है । इसकी वजह से चीन हैरान-परेशान हैं ।

भारत भी इस मुहिम में शामिल है जिसकी वजह से चीन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं । मालूम हो कि चीन और भारत पड़ोसी देश होने के साथ ही बड़े पैमाने पर व्यापारिक साझेदार भी हैं । लेकिन चीन हमेशा से भारत को परेशान करता रहता है जिसकी वजह यह है कि चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों को बढ़ाता रहता है । लेकिन इस समय चीन के सामने जो संकट है वह आने वाली वक्त में अब यह कहानी बदल देगा।

दबाव का तरीका अपनाता है चीन –  चीन पर लगातार सवालों की बौछार की जा रही है और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के प्रोफेसर और विदेश मंत्रालय मामलों के जानकार विशेषज्ञ हर्ष बी पंत का मानना है कि चीन दबाव के बदले दबाव की रणनीति अपनायेगा।  मालूम हो कि अभी हाल में ही भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़पें हुई हैं और चीन ने नेपाल को भारत के खिलाफ भड़काने के साथ ही अपने में मिलाने की कोशिश कर रहा है ।

चीन कोरोना वायरस के मामले में खुद को एक ताकतवर राष्ट्र के रूप में पेश करना चाहता था लेकिन ऐसा नहीं कर पाया । जब से चीन में शी जिनपिंग की सरकार है तब से उन्होंने एग्रेसिव पॉलिसी को अपनाना शुरू कर दिया है । चीन हमेशा अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करता है । यहां तक कि चीन ने विश्व के सबसे बड़े संस्थान डब्ल्यूएचओ का भी दुरुपयोग किया है । चीन ने पहले वैश्विक संस्थानों में अपने लोगों को शामिल करवा कर फिर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम किया ।

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चीन ने कोरोना वायरस के संबंध में जो भी जानकारियां उसके पास थी दूसरे देशों के साथ उसे नहीं बांटा । नतीजा यह है कि आज दुनिया कोरोना वायरस संकट से परेशान है । अगर चीन समय रहते ही इस संकट से सही तरीके से निपटा होता तो आज दुनिया के सामने कोरोना वायरस महामारी का संकट होता ही नहीं । मालूम हो कि चीन ने पहले कोरोना वायरस के संबंध में दुनिया के सामने फेक न्यूज रखी और गलतफहमियां पैदा की ।

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चीन ऐसा सोचता है कि वह एक शक्तिशाली देश है और दुनिया उसके बिना आगे नहीं बढ़ सकती है । मालूम हो कि चीन अपने यहां काफी पाबंदी लगा रखा है जिसकी वजह से चीन के अंदर की खबरें बाहर नहीं आ पाती हैं जबकि दूसरे देश में ऐसा नहीं करते हैं । दुनिया के कई देशों के एकजुट होने से चीन परेसान है ।

चीन को अलग-थलग करने और ग्लोबल सप्लाई चैन को नए सिरे से गढ़ने की इस समय जरूरत महसूस की जा रही है, जिसमें चीन की भागीदारी को कम से कम किया जा सके । मालूम हो कि चीन ने शुरू में अपनी पीटीई किट को एक्सपोर्ट करने से इंकार कर दिया था उसके बाद खराब क्वालिटी की पीपीई किट की सप्लाई की । अब आने वाले समय में ऐसी आशंका जताई जा रही है कि चीन की मुश्किलें बढ़नी तय है । लेकिन अब चीन क्या रणनीति अपनाएगा यह भी महत्वपूर्ण है ।

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