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Saturday, March 6, 2021

कोरोना वायरस से निजात पा चुके लोगो के खून में मौजूद प्लाज्मा से होगा कोरोना पीड़ितों का इलाज !

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कोरोना वायरस जिस तेजी से फैल रहा है इससे यह माना जा रहा है कि दुनिया की काफी बड़ी आबादी इसकी चपेट मे आजयेगी । दुनियाभर के वैज्ञानिक दिन रात इसका इलाज खोजने में जुटे हुए है । अब वैज्ञानिकों ने एक नया ट्रायल शुरू किया है जिसमें कोरोना वायरस से निजात पा चुके लोगों के ब्लड पर शोध किया जा रहा है ।

वैज्ञानिकों का मानना है कि जो लोग कोरोना वायरस से ठीक हो चुके हैं उनके खून में मौजूद प्लाज्मा एक ऐसी एंटीबॉडी विकसित कर सकता है जिससे कोरोना पीड़ितों का इलाज किया जा सकता है । वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना से निजात पा चुके लोगों का खून कोरोना वायरस के खिलाफ एक हथियार बन सकता है । वैज्ञानिक इसे प्लाज्मा थेरेपी के रूप में इस्तेमाल करेंगे ।

फिलहाल अभी इसका परीक्षण किया जा रहा है और इसके लिए जो लोग कोरोना वायरस ठीक हो चुकी हैं उन लोगों के खून से प्लाज्मा को निकाल कर कोरोना से पीड़ित लोगों को ठीक करने में किया जा रहा है । अमेरिका तथा इंग्लैंड में इस तरह का ट्रायल शुरू हो गया है । वहीं चीन ने भी इस बात का दावा किया है कि उसने प्लाज्मा थेरेपी के जरिए काफी मरीजों को अपने यहां ठीक किया है ।

अब इस बात की संभावना जताई जा रही है कि भारत में भी जल्द ही इस प्रकार की अनुमति लेने पर विचार हो सकता है ।मालूम हो कि फरवरी के महीने में चीन में 20 लोगों ने अपने प्लाज्मा दान किए जो कि कोरोना वायरस से पूरी तरीके से ठीक हो चुके थे और वुहान में ही दान में मिले प्लाज्मा का उपयोग करके कई सारे मरीजों को ठीक किया गया है ।

मालूम हो कि इन 20 लोगों में जिन्होंने अपना प्लाज्मा दान किया उसमें डॉक्टर और नर्से शामिल थी जो कोरोना वायरस के चपेट में आई थी और उसके बाद रिकवर हो गई थी । कहा जा रहा है कि ये लोग कोरोना वायरस से ठीक होने के 10 दिन बाद जब उनकी जांच हुई तो पता चला कि वह पूरी तरीके से रिकवर कर चुके हैं ।

चीन में किए गए कई शोधों के आधार पर इस बात का दावा किया जा रहा है कि कई गंभीर इलाजो में इस प्लाज्मा थेरेपी के जरिए 24 घंटे के अंदर ही सुधार देखने को मिल जाता है । ऐसे में जो लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके थे और ठीक हो चुके थे उन्होंने आगे आकर दूसरों की मदद के लिए अपने प्लाज्मा को दान किया ।

 काम करने की प्रक्रिया

इस प्रक्रिया को करने में हाइपर इम्यून वाले लोगों की पहचान की जाती है और इसमें वे लोग शामिल होते हैं जो कोरोना वायरस से जंग जीत चुके होते हैं या फिर जिनका शरीर अभी कोरोना वायरस चपेट में आया नहीं रहता है लेकिन उनका इम्यून सिस्टम काफी हाइपर होता है ।

जो लोग कोरोना वायरस ठीक हो चुके होते हैं उनके प्लाज्मा को कॉन्वलसेन्ट  प्लाज्मा कहा जाता है  और फरेक्शन्स प्रक्रिया के जरिए वाइट ब्लड सेल से प्लाज्मा को अलग कर लिया जाता है और इसके लिए अपेरेशिव मशीन का इस्तेमाल होता है ।

उसके बाद इस प्लाज्मा को उन लोगों में ट्रांसफर किया जाता है जो किसी गंभीर बीमारी या फिर कोरोना वायरस से पीड़ित होते हैं और इससे बीमार व्यक्ति के शरीर में जो ब्लड मौजूद होता है वह वायरस से लड़ने वाली एंटीबॉडी बना लेता है और इसका असर 24 घंटे के अंदर नजर आने लगता है और वह कोरोना वायरस से लड़ने में सक्षम हो जाता है तथा उसकी बीमारी ठीक होने लगती है ।

मालूम हो कि सबसे पहले 1918-20 पूर्व स्पेनिश फ्लू के इलाज के दौरान अमेरिका में प्लाज्मा ट्रांसफर की तकनीक अपनाई गई थी । इसके अलावा साल 2005 में सीवियर एक्यूट रेस्पिरेट्री सिंड्रोम वायरस से निपटने के लिए भी हॉन्गकॉन्ग ने यही प्रक्रिया अपनाया था । 2009 2009 में फैले  H1N1 के दौरान भी प्लाज्मा ट्रांसफर के जरिए मरीजों का इलाज किया गया था ।

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