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Tuesday, March 2, 2021

जानिए सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों ने कैसे पाया कोरोना वायरस पर नियंत्रण

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इस समय अगर किसी की जुबान पर कोई नाम है तो वह कोरोना वायरस का और हर कोई कोरोना वायरस को लेकर चिंतित है । हर किसी के मन में यह सवाल है कि आखिर यह लॉक डाउन कब तक रहेगा भारत में 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है लेकिन कुछ लोग कह रहे हैं कि लॉक डाउन को फिर से बढ़ाया जाएगा ।

हालांकि सरकार ने इसमें थोड़ी थोड़ी छोड़ देना शुरू कर दिया है जैसे कि किराना दुकानों को सशर्त खोलने का आदेश मिल गया है । दुनिया के अधिकांश देश कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहे हैं लेकिन वहीं कुछ ऐसे देश भी हैं जो कोरोनावायरस पर काफी तेजी से नियंत्रण पा लिया और उनके यहां इस वायरस के मामले बेहद कम पाए गए हैं ।

इसमें दक्षिण कोरिया, ताइवान, सिंगापुर, हांगकांग जैसे देश शामिल है । मालूम हो कि सिंगापुर के अलावा हांगकांग, ताइवान चाइना से सटे हुए देश हैं । ऐसे में सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं देशों के लिए था लेकिन इन्होंने कोरोना वायरस पर पूरी तरीके से काबू पा लिया है जो दुनिया के लिए एक मिसाल है ।

दक्षिण कोरिया उन देशों में गिना जा रहा है जहां पर कोरोना वायरस को लेकर लॉक डाउन करने की नौबत ही नहीं आई है और बिना लॉक डाउन किये ही दक्षिण कोरिया ने अपने यहां करोना वायरस पर नियंत्रण पा लिया है । ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि इन देशों ने कोरोना वायरस पर कैसे इतनी जल्दी और इतनी तेजी से नियंत्रण पा लिया ।

सबसे पहले जानते हैं दक्षिण कोरिया की रणनीति के बारे में कि आखिर दक्षिण कोरिया ने कोरोना वायरस को कैसे काबू किया ? दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस पर नियंत्रण के लिए वहां की सरकार ने 4 तरीके अपनाए हैं जिसमें इन्वेस्टिगेशन, जोखिम का मूल्यांकन, संपर्क वर्गीकरण और कांट्रैक्ट मैनेजमेंट शामिल है । अब बारी बारी से इनके बारे में जानते हैं –

इन्वेस्टिगेशन :- दक्षिण कोरिया में सबसे पहले कोरोना संक्रमित मरीज के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा की गई, यहां तक कि उसकी मेडिकल हिस्ट्री और उसके परिवार के बारे में पूरी जानकारी ली इकट्ठी की गई ।

जोखिम का मूल्यांकन :- इस वायरस के संदर्भ में ली गई जानकारी को वेरीफाई करने के लिए और उसके मेडिकल रिकॉर्ड को जांचने के लिए मरीज के फोन लोकेशन ट्रैस किया गया और उसके कार्ड ट्रांजैक्शन की भी पूरी जानकारी ली गई ।

संपर्क वर्गीकरण :- में मरीज के करीबी लोगों की जानकारी जुटाई गई जिसमें उसके दोस्त, रिश्तेदार और उनकी पुरानी बीमारियों को भी पता लगाया गया ।

कांटेक्ट मैनेजमेंट :-  में मरीज को तथा उसके संपर्क में आए लोगों को तुरंत क्वॉरेंटाइन किया गया और साथ ही उनके कहीं भी आने-जाने पर पूरी तरीके से रोक लगा दी गई ।

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सिंगापुर :- चीन के बाहर कोरोना वायरस का सबसे पहला मामला सिंगापुर में आया था और उसी के साथ सिंगापुर की सरकार सजग हो गई और अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया । सरकार ने पूरी सजगता दिखाई और करोना वायरस का मामला एक ही हफ्ते में सिंगापुर में शून्य तक पहुंच गया । इसके लिए सिंगापुर की सरकार ने लोगों को मास्क लगाने की अनिवार्यता कर दी ।

चीन, इटली, स्पेन समेत 9 देशों से आए लोगों को सीसीटीवी के जरिए उनका पता लगाकर कांटेक्ट ड्रेसिंग के जरिए कोरोना वायरस के मरीज के संपर्क में आए लोगों को ट्रेस करके उनकी जांच की गई । ऐप के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की कि कोई संक्रमित मिले हैं या नहीं ।

ताइवान :- चीन का  पड़ोसी देश ताइवान है इसलिए ताइवान में करोना वायरस का सबसे ज्यादा खतरा था लेकिन ताइवान ऐसे बहुत सारे तरीके अपनाए जिसके जरिए कोरोना वायरस से निपटा जा सके । ताइवान ने अपने यहां बाहर से आये सभी लोगों का टेस्ट किया उनके डेटा को इकट्ठा किया खास करके उन लोगों का भी डाटा लिया जो हाल में ही किसी फ्लू के संपर्क में आए थे ।

यह भी पढ़ें : कोरोना वायरस के चलते करोड़ो लोग आ सकते हैं गरीबी की चपेट में

लोगों को क्वॉरेंटाइन किया गया और सीडीसी के जरिए मॉनिटरिंग की गई । इसके अलावा जिन लोगों के पास फोन नहीं थी उन्हें फोन दिया गया । ताइवान ने अपने यहां रोज एक करोड़ मास्क बनाए जिससे उसकी आबादी को आपूर्ति सुनिश्चित हो सके । इसके अलावा कालाबाजारी पर भी सख्ती से कार्यवाही की । ताइवान ने 76 हजार का जुर्माना लगाया और मुनाफाखोरी करने वालों पर एक करोड़ का जुर्माना और 1 से 7 साल तक की सजा का प्रावधान रखा ।

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