कोरोना वायरस पूरी दुनिया में चीन से ही फैला
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नए शोध के अनुसार कोरोना वायरस पूरी दुनिया में चीन से ही फैला

कोरोना वायरस महामारी पूरी दुनिया में हाहाकार मचा रही है। एक नए शोध में खुलासा किया गया है कि कोरोना वायरस चीन से ही पूरी दुनिया में फैला है। इसके लिए इस शोध में चीन के बाहर कोरोना वायरस के 288 मामलों की ट्रैवल हिस्ट्री और उनके संक्रमण की श्रृंखला की जांच की गई है।

इस खोजबीन से यह जानकारी मिली है कि चीन को छोड़कर जब दुनिया के किसी भी देश को कोरोना वायरस के बारे में मालूम नही था तब चीन ने वुहान में यात्रा प्रतिबंध के साथ ही अन्य सख्त कदम उठाये थे जिससे कोरोना वायरस दुनिया में नाल फैल पाए।

लेकिन इस शोध में बताया गया है कि 3 जनवरी से 13 फरवरी के बीच चीन के बाहर कोरोनावायरस से संक्रमित होने वाले 288 लोगों द्वारा किस तरह से कोरोनावायरस फैला है। इसके लिए इन लोगों की यात्रा ट्रैवल हिस्ट्री, संक्रमण से जुड़ी पूरी जानकारी, अस्पताल में एडमिट होने से जुड़ी जानकारियों को इकट्ठा किया गया।

ये लोग कोरोना वायरस महामारी घोषित होने से पहले ज्यादातर लोग चीन के लोगों से संपर्क में आए थे या फिर चीन से लौटे थे।

चीन के बाहर 288 लोगों में 163 लोग ऐसे थे जो दूसरे देशों से आए थे। 109 मामले ऐसे थे जिन्होंने स्थानीय स्तर पर कोरोना वायरस फैलाया और 30 लोगों ने अपने देश में वापसी की थी और सिर्फ एक मामला ऐसा था जिसके  के बारे में पता नहीं चल पाया, इसके अलावा 15 मामले ऐसे थे जो अपने देश में दाखिल हुए और स्थानीय स्तर पर संक्रमण भी फैलाएं।

यह लोग चीन से बाहर कोरोना वायरस से संक्रमित हुए और उन्होंने कई देशों की यात्राएं भी की थी। बता दें कि जनवरी 2020 में चीन में एक गंभीर श्वसन सिंड्रोम सार्स सीओवी-2 फैल कर पूरी दुनिया में अपने पैर पसार लिए और 17 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया।

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जनवरी के आखिर में चीन के अधिकारियों ने इस महामारी को नियंत्रित करने के लिए कई कठोर कदम उठाए, बाहरी देशों से सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी और बाहर से आने वाले लोगों की निगरानी के लिए सर्विलांस लगा दिया ताकि कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को आम लोगों से अलग रखा जा सके, लेकिन इससे कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में कोई खास मदद नही मिली बल्कि यह स्थानीय स्तर पर फैलने लगा।

इस शोध से यह पता चलता है कि शुरुआत में कोरोना वायरस के लक्षण और आकार के आधार पर है इसकी जांच की जा रही थी। बाहर से आने वाले लोगों की स्क्रीन भी एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आई है क्योंकि कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति अपने रोजमर्रा के काम कर रहे थे, यात्रा में थे और उन्हें कोई लक्षण सामने नही आए थे और ऐसे मे ये लोग एयरपोर्ट पर होने वाले स्क्रीनिंग से बच कर निकल गए।

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इसके अलावा हल्के बुखार और विशेष लक्षण न दिखाई देने वाले लोगों ने कोरोना वायरस को फैलाने में मदद की और इसका प्रसार वैश्विक स्तर पर हो गया। इसके अलावा जांच में 10 में से 6 मामले ऐसे थे जो बिना जांच के ही बच कर निकल गए।

उस समय जांच के दर महज 36 फीसदी ही थ8 और इस तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में यह प्रयास निरर्थक साबित हुए। हालांकि इससे एक फायदा यह हुआ कि इसके जरिए  अन्य देशों को कम समय में ही सर्विलांस सिस्टम को मजबूत करने के लिए पर्याप्त समय मिल गया।

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इसके अलावा इस शोध में यह भी देखने को मिला है कि यात्रा की तारीख से जांच की तारीख के बीच शुरुआत में काफी गैप था हालांकि बाद में यह गैप घट गया और बाहर से आने वाले मामले में कमी देखी गई। लेकिन जहां पर यह बीमारी पैदा हुई वहां से निकलकर यह दुनिया भर में फैलती गई।

फरवरी के अंत में ईरान और इटली में कोरोना वायरस का कहर शुरू हो गया था जिसे उस समय सिर्फ चीन से यात्रा को ही आधार मानकर देखा जा रहा था।

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इस शोध में यह भी पाया गया कि फरवरी के शुरुआत में चीन के बाहर कई देशों में कोरोना वायरस के मामले देखने को मिले और उन्हें महामारी से इसका संबंध होने की कोई जानकारी भी नही थी, जाँच से बेहद कम हो रही थी और बिना लक्षण या हल्के लक्षण के मामले पकड़ में नहीं आ रहे थे।

इटली में भी कुछ ऐसा ही हुआ। 21 फरवरी को इटली में पहला गंभीर मामला कोरोना वायरस का आया और कुछ ही समय में बिना जांच किए ही कई लोगों में कोरोना वायरस के लक्षण दिखने लगे। फरवरी के अंत तक दुनिया के कई देशों में यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिए।

लेकिन कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों को स्थानीय स्तर पर अन्य लोगों को संक्रमित करने लगे और धीरे-धीरे कोरोना वायरस का प्रसार सामुदायिक स्तर पर होने लगा और आज करोड़ों लोग कोरोना वायरस से प्रभावित हो चुके हैं और लाखों लोग ऊनी जान गवा दिए।

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