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Wednesday, January 20, 2021

दिल्ली का पुराना किला ही है पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ..! आइए जानते हैं इसकी खुदाई में क्या-क्या चीजें मिली थी

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दिल्ली का पुराना किला महाभारत काल से संबंधित है की नही इसको लेकर हमेशा से एक अबूझ पहेली रही है महाकाव्य महाभारत के अनुसार पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ है और यह लोकप्रिय स्मारक से जुड़ाव को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने समझाने की कोशिश की है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने आखिरी बार साल 2018 में दिल्ली के पुराना किला के पास शेर मंडल के पास मिट्टी के बर्तनों के मिलने से इस आशा में उत्खनन कराया कि यहाँ कुछ और भी मिल सकता है और यह देखने का प्रयास किया गया कि क्या यह महाभारत काल में विकसित किला के रूप में रहा है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने दिल्ली के पुराना किला में 1955 के बाद 1969 और 1973, 2013-14 और 2017-18 में खनन का कार्य करवाया था। ऐसी मान्यता है कि पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ दिल्ली ही है। दिल्ली का पुराना किला ही इंद्रप्रस्थ की राजधानी का किला है।

शम्स सिराज अफिक ने 14 वीं शताब्दी में एक किताब लिखी थी जिसका नाम ‘तारीख ए फिरोजशाही’ है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि इंद्रप्रस्थ किसी परगना का मुख्यालय हुआ करता था। पश्चिमी दिल्ली के नारायण गांव में 14वीं शताब्दी के एक अभिलेख में भी इंद्रप्रस्थ का उल्लेख मिलता है।

वही अबुल फजल की 16वीं शताब्दी में लिखी गई पुस्तक ‘आईने अकबरी’ में भी हुमायूँ का किला उसी स्थान पर बनाए जाने की बात कही गई है जहां पर कभी पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ हुआ करती थी। भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण की प्रकाशित की गई पुस्तक में दिल्ली और उसके अंचल क्षेत्र में इस बात को मान्यता मिलती है कि पुराना किला यमुना के किनारे स्थित था।

इस पुस्तक के अनुसार मूल रूप से पुराना किला यमुना के किनारे स्थित था और किले के उत्तरी और पश्चिमी किनारों पर भूमि का गहरा दवा होने का संकेत भी इस बात का संकेत देता है कि किनारों पर नदी से जुड़ी हुई एक चौड़ी खाई भी रही होगी और किले की मुख्य भूमि से जोड़ने वाले एक उपसेतु के जरिए यहां तक पहुंचा जा सकता था।

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दिल्ली का पुराना किला प्राचीन किले पर स्थित है, शायद यही जगह महाभारत में वर्णित इन्द्रप्रस्थ नगर के उपखंड छिपे हो सकते हैं। 14 वीं शताब्दी में बने पुराने किले के नीचे परीक्षण के तौर पर भारत की आजादी के बाद 1954-55 में पहली बार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक प्रोफेसर बीबी लाल ने खुदाई करवाई थी ।

Puran Qila Delhi

अभी हाल में ही साल 2017-18 में भी किले की खुदाई बसंत कुमार स्वर्णकार की देखरेख में की गई है जो कि आगरा सर्कल में अधीक्षण पुरातत्वविद के पद पर इस समय नियुक्त हैं। साल 2019 में फिर से खुदाई के लिए अनुमति मिल गई थी लेकिन समय पर काम न शुरू हो पाने की वजह से बाद में इस अनुमति को निरस्त कर दिया गया था।

खुदाई में मिली यह चीजें :-

दिल्ली के पुराने किले की खुदाई में तीन बार में कई चीजें मिली जैसे कि टेराकोटा खिलौने और बढ़िया भूरे रंग के चित्रित मिट्टी के बर्तन  के टुकड़े जो कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के बीच भूरे रंग में चित्रित बर्तन के नाम से ही व्याख्यान किया गया है और कहा जाता है कि यह बर्तन  ईसा से 1000 वर्ष पूर्व के हैं क्योंकि ऐसे लक्षणों वाले बर्तन महाभारत काल की कहानियों से संबंधित हैं और उनका काल 1000 ईसा पूर्व निर्धारित किया गया था।

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यहां से प्राप्त होने वाली वस्तुओं से महाभारत के प्रसिद्ध पांडवों की राजधानी इंद्रप्रस्थ का पुराना किले के स्थल पर किए जाने वाले परंपराओं को भी बल मिलता है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा दिल्ली के पुराने किले की खुदाई में तीनों बार ही मुद्राएं मिली हैं। पुराने किले की खुदाई में पाई गई चीजों से प्रमुख रूप से प्रारंभिक इतिहास काल से लेकर मध्यकाल और दिल्ली के किले के आसपास आवास होने के प्रमाण पाए जाते हैं।

यहां पर मुगल सल्तनत, राजपूत, उत्तर गुप्त काल स्वर्ण काल से लेकर मौर्य काल तक के घरों और गलियारों के प्रमाण भी पाए गए हैं।

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