कोरोना संकट पर विदेशी मीडिया ने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना

कोरोना वायरस संकट पर विदेशी मीडिया लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना कर रहा। भारत विदेशी मीडिया में छाया हुआ है। चाहे वह ब्रिटेन का इंडिपेंडेंट हो या फिर गार्जियन, चीन के ग्लोबल टाइम्स और फ्रांस के ली मांडे यहां तक की पड़ोसी देश बांग्लादेश का छोटा सा अखबार न्यूज़ एज ने भी देश की राजधानी दिल्ली के शमशान की व्यथा की तस्वीर छाप कर भारत सरकार पर टिप्पणी की है।

फ्रेंच अखबार ली मांडे न्यू अपने संपादकीय आर्टिकल में लिखा है कि भारत में मौजूदा समय की स्थित कोरोना वायरस के लिए भारत सरकार जिम्मेदार है। जनता को बहला-फुसलाकर होने वाली सियासत और झूठी हेकड़ी की बात भी इसमें कहीं गई है।

अखबार ने अस्पतालों और शमशान के मंजर का चित्रण करते हुए लिखा है कि कोरोना वायरस महामारी ने अमीर हो या गरीब किसी को भी नहीं बख्शा है।

यहां तक कि रोगियों के बोझ से चरमराते अस्पताल, अस्पताल गेट पर लगे एंबुलेंस की लाइन, ऑक्सीजन के लिए गिड़गिड़ाते तमिरदार यह सारे ऐसे सच है जो झूठ नहीं बोलते हैं।

फरवरी में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का ग्राफ नीचे जा रहा था लेकिन अब उसकी लाइन लंबी हो गई है। बिगड़ते हालात के लिए सिर्फ कोरोना वायरस के म्यूटेशन को ही दोषी नहीं माना जा सकता।

साफ है कि इसके अन्य कारण भी है। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अदूरदर्शिता हेकड़ी और जनता को बहला-फुसलाकर होने वाली उनकी सियासत भी शामिल है। स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है। ऐसे में विदेशी मदद की दरकार की जा रही है।

साल 2020 में अस्त व्यस्त करने वाले और बेहद तकलीफदेय लॉक डाउन की घोषणा की गई थी। जिसमें करोड़ों प्रवासी मजदूरों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया था और साल 2021 में भी सरकार द्वारा कोई सुधार नहीं किया गया।

साल 2021 की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री ने सुरक्षा में ढील दे दी। उन्होंने स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सलाह के बजाय अपने उग्र राष्ट्रवादी भाषणों को प्राथमिकता दी।

फ्रांसिस संपादकीय आर्टिकल में कोरोना प्रसार के लिए कुंभ का भी जिक्र किया गया है और लिखा गया है कि उनके आयोजन में गंगाजल को संक्रामक बना दिया है।

ली मांडे अखबार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैक्सीन नीति की भी आलोचना की गई है। इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री की वैक्सीन नीति महत्वाकांक्षा को पोषण करने वाली रही है। उन्होंने यह भी नहीं देखा कि देश में वैक्सीन के उत्पादन की क्षमता कितनी है। बस निर्यात करना शुरू कर दिया।

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फ्रांस के अखबार के अलावा ग्लोबल टाइम्स, इंडिपेंडेंट, गार्जियन जैसे अखबारों ने भी जलती चिताओं के चित्र के साथ भारत के चिंताजनक हालात पर रिपोर्ट छापी है। इन अखबारों में भी लिखा गया है कि भारत मे श्मशान घाट छोटे पड़ रहे ।

हैं लोग कही भी खाली जगह पर ही शव जला रहे हैं। ग्लोबल टाइम्स ने भारत में रह रहे एक चीनी नागरिक जो कि कोरोना वायरस से पीड़ित है कि हवाले से कहा गया है कि अत्यधिक मौतों के कारण अंत्येष्टि से जुड़ा कारोबार भी पूरी तरह से चरमरा गया है।

इन तमाम रिपोर्टों के बीच मामला बांग्लादेशी अखबार में भी बहुत मार्मिक टिप्पणी करते हुए लिखा है कि कोरोना वायरस महामारी के वजह से भारत के हालात रात के वक्त उस जानवर की तरह हो गई है जिसकी आंखों के सामने कार की हेडलाइट चमक रही हो और वह नहीं समझ पा रहा हो कि अब हम क्या करें।

बता दें कि अभी पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया के एक अखबार में कोरोना संकट पर भारतीय सरकार की निंदा की थी। तब भारतीय हाई कमीशन में अखबार को फटकार लगाते हुए दोबारा इस तरह के लेख न छापने की हिदायत दी थी।

लेकिन यह भारतीय मीडिया नही है बल्कि यह विदेशी मीडिया  है। इस पर किसी भी प्रकार से कोई नियंत्रण नहीं हो सकता। इसे कोई भी नियंत्रित नहीं कर सकता है।

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