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Thursday, March 4, 2021

मिसाइल मैन के नाम से मशहूर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम दुनिया के कुछ बिरले लोगों में एक थे

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दुनिया में कुछ ही ऐसे बिरले लोग होते हैं जो अपनी जिंदगी में तमाम आभाव और चुनौतियों का सामना करते हैं और इसके बावजूद अपने सपने को पूरा करने से कभी भी पीछे नही हटते हैं और अपने सपने को पूरा करके रहते हैं।

कुछ ऐसे ही थे हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, जिन्हें लोग मिसाइल मैन के नाम से भी जानते हैं। एपीजे अब्दुल कलाम का कहना था कि मन में अपने सपनों को पूरा करने का जुनून होना चाहिए। वह अपने सपने को पूरा करने का जुनून रखते थे और उसे पूरा करके ही मानते थे।

परिचय

पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वर तमिलनाडु में एक साधारण मुस्लिम परिवार में हुआ था। इनके पिता मछुआरों को नाव किराए पर देने का काम किया करते थे। अब्दुल कलाम पांच भाई और पांच बहन थे।

उनके जीवन पर उनके पिता का बहुत प्रभाव रहा है, भले ही उनकी पिता पढे -लिखे नही थे, लेकिन उनकी लगन और संस्कार ने इनके जीवन को एक सही दिशा और आकार दिया था।

जब अब्दुल कलाम पांचवीं कक्षा में पढ़ते थे तब उनके अध्यापक में कक्षा में सभी बच्चों को पक्षी के उड़ने के तरीके के बारे में जानकारी दे रहे थे। जब छात्रों को समझ में नही आया तब अध्यापक ने सभी छात्रों को समुद्र तट पर ले जाने का फैसला किया और उड़ते हुए पक्षियों को दिखाकर उन्हें समझाया कि पक्षी कैसे होते हैं। यहीं पर पक्षियों को उड़ते देखकर एपीजे अब्दुल कलाम ने तय किया कि वह बड़े होकर विमान वैज्ञानिक बनेंगे।

अब्दुल कलाम ने अपने जीवन में आभाव को देखा है वह अपनी आरंभिक शिक्षा को जारी रखने के लिए आसपास के क्षेत्र में अखबार वितरित करने का काम करते थे। इसके बाद 1950 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से उन्होंने एस्ट्रोलॉजी में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की।

इसके बाद उन्हें भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (डीआरडीओ) में प्रवेश मिल गया। जहां पर उन्होंने कई उपग्रह प्रक्षेपण यान योजनाओं में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

परियोजना निदेशक के रूप में एपीजे अब्दुल कलाम ने भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान SLV -3 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिससे जुलाई 1982 में रोहणी नामक उपग्रह को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया था। यही वजह है कि उनके नाम के आगे मिसाइल मैन लिखा जाता है।

जब भी मिसाइल मैन का जिक्र आता है लोगों के मन में बस अब्दुल कलाम का नाम ही जहन में आता है। विक्रम साराभाई एपीजे अब्दुल कलाम के बॉस नही बल्कि उनके गुरु भी थे।

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एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी आत्मकथा अग्नि की उड़ान में लिखा है कि वह फाइटर पायलट बनना चाहते थे, लेकिन जब इस परीक्षा का आयोजन हुआ तब वह उसमें 9 वीं रैंक प्राप्त किये थे, जबकि सिर्फ 8 लोगों का चयन होना था, इसलिए उनका चयन नही हुआ और वह बेहद निराश हो गए। लेकिन उन्होंने अपने आप को निराशा से बाहर कर वैज्ञानिक बनने की ठान ली।

साल 2006 में जब अब्दुल कलाम राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त थे, तब उनका सालों पुराना सपना पूरा हुआ था। उनका सपना था जेट विमान में उड़ान भरने का। जब राष्ट्रपति बने तब उन्होंने सुखोई फाइटर जेट से उड़ान भरी थी।

इस अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा था कि वह विमान को काबू करने की कोशिश में इस कदर खोये रहे कि डरने के लिए समय ही नही मिला था। बता दें कि उन्होंने सुखोई विमान से करीब 40 मिनट की उड़ान भरी थी और यह कारनामा उन्होंने 74 साल की उम्र में किया था।

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वह भारत के 11 वें राष्ट्रपति के रूप में साल 2002 में शपथ लिए थे और साल 2007 तक राष्ट्रपति रहे। उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से भी 1997 में सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें 1981 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण और 1990 में पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। वह देश के जाने-माने राष्ट्रपति और वैज्ञानिक और इंजीनियर के रूप में दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

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राष्ट्रपति पद से मुक्त होने के बाद वह साल 2015 में शिलांग गए थे। वहां पर उन्हें एक लेक्चर दिया था। 27 जुलाई 2015 को आईआईएम शिलांग में Creating a livable planet विषय पर लेक्चर दे रहे थे। इस लेक्चर के दौरान वह गिर पड़े जिसके बाद उन्हें अस्पताल में ले जाया गया जहाँ पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

बता दें कि एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में ही भारत ने अपना दूसरा परमाणु परीक्षण 11 मई 1998 में किया था। इसे परीक्षण से पूरी दुनिया आश्चर्यचकित रह गयी थी और भारत परमाणु ताकत देश बन गया था। अमेरिका अपनी खुफिया सेटेलाइट के जरिए भारत पर लगातार नजर बनाए रखे हुए था।

लेकिन इसके बावजूद उसे भारत के इस मिशन की जानकारी नही लग पाई थी। परीक्षण के बाद अमेरिका ने भारत पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे। लेकिन इसके बावजूद भारत मजबूती के साथ खड़ा रहा और आज एक बड़े ताकतवर देश के रूप में जाना जा रहा है। भारत को परमाणु संपन्न देश बनाने में एपीजे अब्दुल कलाम का अमूल योगदान रहा है।

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