साल 2015 से चीन कोरोना वायरस को जैविक हथियार बनाकर तीसरे विश्व युद्ध की तैयारी कर रहा था

क्या कोरोना वायरस चीन के वेपन्स का हिस्सा है और इसके लिये सरकार है जिम्मेदार

क्या कोरोना वायरस चीन के वेपन्स का हिस्सा है और इसके लिये सरकार है जिम्मेदार

जैसे कि मालूम है कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत साल 2019 के आखिर में चीन से शुरू हुई थी और धीरे-धीरे यह पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया और तबाही मचा रहा है।

एक साल से ज्यादा समय बीत गया है लेकिन आज भी पूरी दुनिया इस संकट से जूझ रही हैं। चीन के बारे में अमेरिका और ब्राजील जैसे देश पहले ही कह चुके हैं कि कोरोना वायरस का इस्तेमाल चीन बायोलॉजिकल हथियार के तौर पर तैयार किया था और कई देशों ने इस मामले में चीन की जांच करने की भी मांग की है।

अब अमेरिकी शोधकर्ताओं ने बड़ा खुलासा किया है जिसमें कहा गया है कि बायो हथियार बनाने वाली बात सच हो सकती है। अमेरिकी जांचकर्ताओं की हाथ में एक सबूत लगा है जिसके आधार पर वह कह रहे हैं कि चीन पिछले 6 साल से यानी की साल 2015 से तीसरे विश्वयुद्ध की तैयारी कर रहा है।

जिसके लिए वह कोरोना वायरस जैसे बायोलॉजिकल और जेनेटिक हथियार की तैयारी कर रहा था। बता दें कि ऐसी संभावना जताई जा रही है कि तीसरा विश्वयुद्ध बायोलॉजिकल और जेनेटिक हथियारों से जाना जाएगा।

अमेरिकी जांचकर्ताओं को मिली सीक्रेट कोविड-19 लेटर में कहा गया है कि युद्ध में जीत के लिए यह प्रमुख हथियार हो सकता है। इसमें लिखा गया है कि वह बेहतर परिस्थितियां कौन सी होंगे जब बायो हथियार का इस्तेमाल किया जाएगा और उनका दुश्मन के मेडिकल सिस्टम पर किस तरह का प्रभाव पड़ेगा?

बता दें कि चीन 2015 से विश्व युद्ध के तौर पर कोरोना वायरस का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा था कई अधिकारियों का भी यही कहना है कि कोरोना वायरस चीन के लैब से निकला है।

वरिष्ठ अधिकारी है चिंतित –

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि जीन में बीमारी के साथ छेड़छाड़ करके एक ऐसे हथियार बनाने की जांच का जिक्र किया गया है जिसे पहले कभी भी नहीं देखा गया था।

ऐसे में वरिष्ठ अधिकारी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के करीबी लोगों के इरादों पर चिंता जाहिर की है। वहीं लोगों में डर है कि चीन में होने वाली इस तरह की गतिविधियों का कोई प्रतिबंध नहीं है।

ऐसे में दस्तावेज लिखने वाले व्यक्ति ने कहा है कि तीसरा विश्वयुद्ध बायोलॉजिकल होगा। यह दो विश्व युद्धों से बिल्कुल अलग होगा। बता दें कि पहला और दूसरा विश्व युद्ध न्यूक्लियर और केमिकल युद्ध हुआ था।

इस डॉक्यूमेंट में जापान पर गिराए गए परमाणु बम और उसके समर्पण के साथ दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति का जिक्र भी किया गया है और इस बात का दावा किया गया है कि तीसरा विश्व युद्ध जीतने के लिए बायो हथियार एक प्रमुख हथियार होंगे और उनके लिए ऐसी परिस्थितियों को चुना जाएगा जिससे ज्यादा से ज्यादा नुकसान हो सके।

चीनी वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि यह हमले दिन में साफ रोशनी में यानी सूरज की रोशनी में नहीं होंगे क्योंकि सूरज की रोशनी में रोगाणुजनक मारे जा सकते हैं।

जबकि बारिश या एयरोसोल प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में सुबह या रात के समय जब बादल छाए होंगे तब हवा की दिशा को टारगेट करके इस तरह के वायरस को छोड़ा जाएगा।

स्वास्थ्य सिस्टम को प्रभावित करने का है इरादा –

इस दस्तावेज में कहा गया है कि ऐसे हमलों से अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ जाएगी और देश में स्वास्थ्य सिस्टम ध्वस्त पड़ जाएगा। अमेरिका ने चीन के इस हरकत पर चिंता व्यक्त की है।

बता दें कि इस दस्तावेज के 18 लेखक हैं जो उच्च जोखिम वाले लैब में काम कर रहे हैं। खुफिया एजेंसियों का कहना है कि कोरोना वायरस चीन के वुहान लैब से ही पूरी दुनिया में फैला है। लेकिन अभी तक इसके लिए कोई ऐसा सबूत नहीं मिल पाया है जो यह साबित कर सके कि यह संक्रमण जानबूझकर फैलाया गया है।

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