आइए जानते हैं भारत का पहला मानव मिशन गगनयान के बारे में

आइए जानते हैं भारत का पहला मानव मिशन गगनयान के बारे में

आइए जानते हैं भारत का पहला मानव मिशन गगनयान के बारे में

भारत का पहला मानव मिशन गगनयान:

इसरो और रूसी लांच सेवा प्रदाता कंपनी कॉसमॉस के बीच 2019 में जून में एक समझौता हुआ था। जिसके तहत भारतीय वायुसेना के एक ग्रुप कैप्टन और तीन विंग कमांडर को ट्रेनिंग दी जा रही थी।

इन लोगों को ट्रेनिंग देने की शुरुआत 10 फरवरी 2020 से शुरू होनी थी। लेकिन कोरोना वायरस के प्रसार के चलते कुछ समय के लिए रोक दिया गया था।

बता दें कि भारत जल्द ही अपने मंगल मिशन के तहत गगनयान मिशन लॉन्च करने वाला है जो कि भारत का पहला मानव मिशन होगा।

गगनयान मिशन के लिए चुने गए यात्रियों ने भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने रूस में एक साल की ट्रेनिंग अपनी पूरी कर ली है।

इन यात्रियों को रूस से अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान इसरो और यूरो शिलांग सेवा प्रदाता कम्पनी के बीच समझौते के तहत ट्रेनिंग दी गई।

10 फरवरी 2020 ट्रेनिंग शुरू होनी थी लेकिन कोरोना वायरस के चलते ट्रेनिंग को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया।

अब इन यात्रियों की रूस में ट्रेनिंग पूरी हो गई है। अब यह रूस से लौटने के बाद इसरो द्वारा डिजाइन किए गए ट्रेनिंग मॉड्यूल में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

बता दे कि भारत में ट्रेनिंग के तीन प्रमुख भाग हैं पूरे प्रोजेक्ट पर एक मॉड्यूल चालक दल के सदस्य के लिए एक मॉड्यूल और फ्लाइट हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का एक मॉड्यूल है।

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इनको गगनयान मिशन के तहत अंतरिक्ष में भेजा जाना है। वायु सेना के अधिकारियों को रूस के अंतरिक्ष की परिस्थितियों के अनुसार ढालने की ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

मार्च महीने की शुरुआत में केंद्रीय परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने बताया कि इसरो के गगनयान प्रोजेक्ट के तहत मानव को अंतरिक्ष में भेजा जा सके, इसके लिए काम शुरू हो गया है।

गगनयान प्रोजेक्ट की लागत :-

भारत के पहले मानव मिशन गगनयान प्रोजेक्ट की लागत अन्य देशों की तुलना में काफी कम है। बता दें कि गगनयान प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2018 को लाल किले से इस मिशन की घोषणा की थी।

इस मिशन पर करीब 10000 करोड़ का खर्चा आ रहा है। जिसे पिछले साल केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूरी मिल चुकी है।

अंतरिक्ष मे प्रथम :-

बता दें कि स्पेस में जाने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री यूरी गागरिन है। यूरी गागरिन 1961 में स्पेस में गए थे। वहीं अगर हमारे देश भारत की बात की जाए तो भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा है। जो 2 अप्रैल 1984 को रूस के सोयूट T11 स्पेस यान से अंतरिक्ष में गए थे।

अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम महिला की बात करें तो अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम महिला रूस की वेलेंटीना टैरेशकोवा रही हैं।

जो 16 जून 1963 को अंतरिक्ष में गई थी। वहीं भारत के प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री होने का गौरव कल्पना चावला को प्राप्त है। कल्पना चावला दो बार अंतरिक्ष में गई थी। पहली बार 1997 में दूसरी बार 2002 में।

भारत के अंतरिक्ष इतिहास में भारत अपने पहले मानव मिशन को अंतरिक्ष में भेज कर इतिहास रचने वाला है। इसरो के प्रमुख के सिवान ने कहा कि साल 2021 अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के लिए बेहद अहम होगा।

साल 2021 में भारत का मानव मिशन गगनयान अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह मिशन भारत के वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षमता को बढ़ायेगा।

बता दें कि इसके पहले chandrayaan-2 मिशन चंद्रमा पर भेजा जा चुका है। जिसमें 98 फीसदी से अधिक सफलता हासिल कर ली है जिसका लोहा पूरी दुनिया ने माना।

अंतरिक्ष में भारत का पहला मानव मिशन गगनयान भारत की तरफ से पहला मानव मिशन है। जिससे स्वदेशी रॉकेट जीएसएलवी मार्क 3 के जरिए अंतरिक्ष के लिए लांच किया जाएगा।

यह प्रोजेक्ट भारत के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि इससे अंतरिक्ष के क्षेत्र में इसरो की धाक बढ़ेगी। गगनयान मिशन के तहत तीन वैज्ञानिकों की टीम को अंतरिक्ष में दिसंबर 2021 में भेजा जाना है। यह टीम कम से कम 7 दिन अंतरिक्ष में गुजार कर धरती पर वापस आएगी।

रूस की अंतरिक्ष एजेंसी कर रही मदद :-

भारतीय वायु सेना और इसरो ने मिलकर इस मिशन के लिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों का चयन किया था। चयनित अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षण के लिए रूस भेजा गया था।

प्रशिक्षण के लिए रूस की अंतरिक्ष एजेंसी ने भारत के साथ 2 जुलाई को करार किया था। स्पेस में यह अंतरिक्ष यात्री विभिन्न प्रकार के माइक्रोग्रैविटी परीक्षण को अंजाम देने वाले हैं।

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