हर्ड इम्युनिटी देश के लिए एक बड़ा जोखिम

सीएसआईआर ( CSIR ) के अनुसार हर्ड इम्युनिटी देश के लिए एक बड़ा जोखिम

आजकल हर्ड इम्युनिटी का बहोत चर्चा है। कोरोना वायरस के प्रसार को दुनिया का कोई भी देश रोकने में नाकाम रहा है। दुनिया भर की सरकारें इसे रोकने में प्रयासरत रही है लेकिन कामयाब नहीं हो पाई है। हालांकि इसके प्रसार की दर को कम करने में वह काफी हद तक कामयाब रही हैं। भारत में भी कोरोना वायरस के प्रसार के लिए जरूरी कदम उठाए गए। कोरोना के कहर को लगभग 5 महीना बीत चुका है। लेकिन अभी तक कोरोना वायरस का कोई इलाज नहीं मिल पाया है।

इस बीच हर्ड इम्युनिटी की चर्चा हो रही है लेकिन वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह एक जोखिम भरा कदम हो सकता है। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के महानिदेशक शेखर मंडी ने कहा है कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए हर्ड इम्युनिटी  भारत के लिए काफी जोखिम भरा है। कोरोना वायरस से उत्पन्न स्थितियों का आकलन करते समय इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसे कौन से कदम उठाए जाए जिससे कोरोना वायरस संक्रमण के फैलाव को रोका जा सके।

आइये जाने ‘हर्ड इम्युनिटी’ का मतलब : –

हर्ड इम्युनिटी का मतलब है कि यदि किसी बीमारी के खिलाफ टीकाकरण की मदद से एक बड़ी आबादी में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है तब शेष बचे लोग भी इस संक्रामक बीमारी से बच जाते हैं।

इसे दूसरे शब्दों में कहें तो जब कोई भी संक्रामक बीमारी एक देश के जनसंख्या के बड़े हिस्से में संक्रमण फैला कर उन्हें संक्रमित कर देती है तब बाकी बचे लोग भी उससे सुरक्षित हो जाते हैं। इसी को ही ‘जनसमूह की रोग प्रतिरोधक क्षमता’ कहते हैं।

किसी भी वायरस के मामले में हर्ड इम्युनिटी के लिए 60 से 70 फीसदी आबादी की इम्यूनिटी की जरूरत है। यानी कि इतनी बड़ी संख्या में आबादी अगर कोरोना वायरस संक्रमण से संक्रमित हो जाती है तो बाकी 30-40 फीसदी लोग इससे सुरक्षित हो जाएंगे। लेकिन यह अपने आप में एक जोखिम भरा फैसला होगा।

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भारत के संदर्भ में सीएसआईआर के निर्देशक ने कहा है कि यह एक बहुत बड़ा जोखिम लेने जैसा है और अभी इसमे और वक्त की जरूरत है। इस संक्रमण को रोकने के लिए यथासंभव जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि दूसरे देशों की तरह भारत में भी कोरोना वायरस की दूसरी लहर भी आने की पूरी संभावना है। इसके लिए लोगों को सजग रहना होगा।

मालूम हो कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के देशों में कोरोना वायरस महामारी फैलाने के लिए चीन पर आरोप मढ़ा है और इसलिए चीन पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी संबंध समाप्त कर लिया है। यहां हम यह बता दें ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ ने चेचक और पोलियो उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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सीएसआईआर के निर्देशक ने कहा है कि कोरोना वायरस से जंग जीतने के लिए 5 आयाम- निगरानी, निदान, नए उपचार हस्तक्षेप, अस्पताल के सहायक उपकरण और आपूर्ति श्रृंखला मॉडल को अपनाना चाहिए।

कोरोना वायरस के टीके के संबंध में उन्होंने कहा कि उसके लिए 3 तरीके अपनाए जा रहे हैं – जिसमें एक है रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाला टीका जिसका परिणाम 15 दिन के अंदर आने वाला है, दूसरा है मोनोटोनिक एंटीबॉडी का विकास करना जिसके तरह भारत में भी प्रयोग हो रहा है और तीसरा तरीके है प्लाज्मा थेरेपी, जिसका परीक्षण भी भारत में हो रहा है।

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