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Thursday, March 4, 2021

ब्रिटेन के एक शोध के अनुसार सर्दी खांसी और बुखार नही बल्कि यह है कोरोना वायरस का पक्के लक्षण

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कोरोनावायरस का संक्रमण दिन-ब-दिन पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ता ही जा रहा है। रूस और चीन जैसे देश इसकी वैक्सीन तो तैयार करनी है लेकिन भारत, अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देश अभी भी वैक्सीन की तैयारी में लगे हुए हैं और कामयाबी से बस थोड़ी ही दूर है।

कोरोनावायरस महामारी से बचने का सिर्फ एक ही तरीका है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच की जाए क्योंकि कोरोनावायरस संक्रमण का पता लगने के बाद ही इसके इलाज के लिए कुछ किया जा सकता है।

अब तो इसके इलाज के कई सारे विकल्प मौजूद हैं जो लक्षणों के आधार पर किए जाते हैं। आज लक्षणों के आधार पर ऐसी कई सारी कारागार दवाई दुनिया में उपलब्ध हो चुकी है जिससे इस संक्रमण से निजात पाई जा सकती है। लेकिन सही इलाज तभी संभव है जब इसके लक्षणों की सही पहचान हो जाए।

वैसे तो कोरोना वायरस के 15 लक्षण बताए गए हैं जिसमें सामान्य रूप से होने वाला सर्दी, खासी और बुखार भी इसके लक्षण में शामिल है। ज्यादातर लोग सर्दी, खांसी और बुखार होने पर कोरोना वायरस की जांच करवा रहे हैं लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या यह कोरोना वायरस का पक्का लक्षण है?

जैसा कि सभी जानते हैं कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है और एक से दूसरे लोगों में यह बहुत तेजी से फैलती है। इसलिए जैसे ही इन लक्षणों का आभास होता है अपने आप को आइसोलेट यानी कि खुद को अन्य लोगों से अलग-थलग कर लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन इसके लिए पहली सबसे जरूरी चीज है कि इसके लक्षणों की पहचान की जाए।

ज्यादातर देशों में सर्दी खांसी बुखार को ही कोरोना वायरस का अहम लक्षण माना जा रहा है लेकिन यह सामान्य और मौसमी बीमारियों का भी लक्षण हो सकता है इसलिए अब इस मान्यता को बदलने की जरूरत महसूस की जा रही है।

ब्रिटेन के एक शोध में दावा किया गया है कि सर्दी खांसी और बुखार के बजाय कोरोना वायरस के दो लक्षण सबसे विश्वासनीय है ये हैं संक्रमित व्यक्ति की गंध और स्वाद लेने की क्षमता का कम होना। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में यह जानकारी दी है कि गंध और स्वाद लेने की क्षमता का कम होना कोरोना वायरस का महत्वपूर्ण लक्षण है।

यह भी पढ़ें : क्या शरीर में एंटीबॉडी बन जाने से कोरोना वायरस नही होता है?

दरअसल दुनिया के अलग-अलग देशों में इन दो लक्षणों को ही कोरोना वायरस के प्रमुख लक्षणों के तौर पर देखा जा रहा है। यह पहली बार है जब किसी देश में उसके लक्षणों के आधार पर कोई शोध कार्य हुआ है।

ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने इस शोध को करने के लिए  लंदन के 23 अप्रैल से 14 मई के बीच के आंकड़ों का विश्लेषण करके यह निष्कर्ष निकाला है। बता दें कि यह वह दौर था जब कोरोनावायरस लंदन में बहुत तेजी से फैल रहा था।

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लंदन के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से मिले आंकड़ों के आधार पर शोधकर्ताओं ने यह पाया कि 78 फीसदी कोरोना वायरस से संक्रमित् ज्यादातर मरीजों में सूंघने ने और स्वाद लेने की क्षमता या तो कम हो जाती है या फिर पूरी तरह से खत्म हो जाती है।  वही 40 फ़ीसदी ऐसे मरीज थे जिनको न तो बुखार था न ही सर्दी खांसी फिर भी वह कोरोनावायरस से संक्रमित थे।

इस विषय में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर रचेल बैटरहम का कहना है कि इस समय ब्रिटेन कोरोनावायरस की दूसरी लहर शुरू हो गई है। ऐसे में इस शोध से मिली निष्कर्ष से कोरोना वायरस संक्रमित लोगो के इलाज में मदद मिलने की संभावना है।

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बता दे कि दुनिया की कई देशों ने अब तक इन दो लक्षणों को प्राथमिकता दी है। उनका कहना है कि यदि इन दोनों लक्षणों को शुरुआत में ही पहचान ले और इन लक्षणों के आधार पर ही संक्रमित की पहचान कर ली जाए तब कोरोनावायरस को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस शोध से कोरोना के इलाज में मदद मिलेगी। दरअसल लोगो को चाहिए कि इन लक्षणों का पता लगते ही लोगों को खुद को आइसोलेट कर ले और कोरोनावायरस की जांच करवानी चाहिए।

ऐसा करने से परिवार के सदस्यों और अन्य दूसरे लोगों को भी इस संक्रमण से बचाया जा सकता है और इस तरह से इसे फैलने से रोका जा सकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि स्वाद और गंध न महसूस होने पर लोग इस आधार पर अपनी जांच करवाने लगेंगे तब लोग सर्दी, खांसी और जुखाम होने या फिर स्थिति बिगड़ने का इंतजार नही करेंगे और इस तरह से दुनिया भर में कोरोना वायरस को फैलने से रुकने में मदद मिलेगी।

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