9 C
Delhi
Monday, January 25, 2021

चीन ने तिब्बत पर कैसे अपना नियंत्रण किया

Must read

आइए जानते हैं भारतीय संविधान की मूल प्रति क्यों रखी गई है गैस चेंबर में

26 जनवरी 2021 को भारत अपना 72 वाँ Republic Day ( गणतंत्र दिवस ) मनाने जा रहा है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत...

खांसी की समस्या को दूर करने के लिए इस तरह भाप में संतरा पका कर खाएं

खांसी की समस्या सर्दी के मौसम में बच्चे, बूढ़े, बड़े सब को परेशान करती है। लगातार खांसी की वजह से गले में दर्द और...

चाय बनाने के बाद इस्तेमाल की हुई चाय पत्ती से बनाए इस तरह बेहतरीन खाद Compost

भारत के लोग Tea पीने के बहुत शौकीन होते हैं। हर दिन हर घर में कम से कम एक बार चाय तो जरूर ही...

आइए जानते हैं सड़कों पर क्यों बनाई जाती है सफेद और पीले रंग की लाइन

हम सब ज्यादातर सड़क मार्ग से ही सफर करते हैं इसलिए ज्यादातर लोगों ने सड़क पर सफेद और पीले रंग की पार्टियों को देखा...

चीन ने तिब्बत पर कैसे अपना नियंत्रण किया आइये जानते है। लद्दाख के गालवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच अभी हाल में ही झड़प हुई थी, जिसमें देश के 20 सैनिक शहीद हो गए। इसके बाद से ही देशभर में चीनी सामानों के बहिष्कार की मांग उठी।

भारत सरकार ने 59 चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके अलावा चीन से होने वाले आयात पर टैरिफ बढ़ा दी और अन्य कई कदम उठाए।

मालूम हो  इसके पहले भी भारत और चीन की सेनाएं एक दूसरे के सामने आ चुकी है। चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश के तवांग घाटी तक भी आ जाते हैं और इस जगह पर चीन की निगाह काफी समय से है। चीन तवांग को तिब्बत का हिस्सा मानता है क्योंकि तवांग और तिब्बत की संस्कृति में काफी समानताएं हैं।

यहाँ पर बौद्धों का प्रमुख धार्मिक स्थल भी है। इसीलिए जब दलाई लामा ने तवांग का दौरा किया था तब चीन ने इसका विरोध किया था। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जब इस साल फरवरी के महीने में अरुणाचल प्रदेश दौरे पर गए थे तब भी चीन ने औपचारिक विरोध दर्ज किया था।

चीन तिब्बत के साथ ही अरुणाचल प्रदेश पर भी दावा करता रहता है और इसे दक्षिणी तिब्बत कहता है। मालूम हो कि अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ 3488 किलोमीटर की सीमा बनती है।

कैसे तिब्बत पर चीन ने किया कब्जा : –

1951 में तिब्बत पर चीन ने अपना नियंत्रण स्थापित किया था। जब कि भारत और चीन की सीमा रेखा जिसे मैकमोहन लाइन के नाम से जानते हैं, यह  1938 में खींची गई थी। उसके अनुसार अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है

तिब्बत और बौद्ध धर्म मानने वाले लोग गवांग ‘संसार की छत’ के नाम से भी जानते हैं। चीन के लिए तिब्बत एक स्वायत्तशासी क्षेत्र के तौर पर है। चीन हमेशा से दावा करता रहता है कि तिब्बत के क्षेत्र पर सदियों से उसकी संप्रभुता रही है। वही तिब्बती लोग अपनी वफादारी दलाई लामा के प्रति रखते हैं। तिब्बत के लोग दलाई लामा को एक जीवित ईश्वर के तौर पर देखते हैं और चीन दलाई लामा को एक अलगाववादी के रूप में।

तिब्बत का क्षेत्र पहले एक खुदमुख्तार कस्बे के रूप में था और एक वक्त था जब यहां मंगोलिया और चीन के ताकतवर राजाओ का शासन हुआ करता था।

चीन ने 1950 में इस इलाके पर अपना झंडा फहराने के लिए हजारों सैनिक भेजे थे और इस इलाकों को स्वायत्तशासी क्षेत्र में बदल दिया और शेष क्षेत्र को चीन के विभिन्न प्रांतों में मिला दिया गया। तिब्बत ने 1960 में चीन के खिलाफ विद्रोह किया लेकिन यह विद्रोह नाकामयाब रहा और 14वें बौद्ध गुरु दलाई लामा को तिब्बत छोड़ना पड़ा और उन्होंने भारत की शरण ली।

यह भी पढ़ें : आइए जाने किस लिए चीन अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा बताता है

इस दौरान चीन की सांस्कृतिक क्रांति हुई और तिब्बत के ज्यादातर बौद्ध मठों को नष्ट कर दिया गया। इसके लिए चीनी सैनिकों को तिब्बत भेजा गया था।

चीन और तिब्बत के बीच विवाद काफी समय से चला आ रहा है। चीन का मानना है कि 13वीं सदी के मध्य से ही तिब्बत चीन का हिस्सा रहा है। लेकिन तिब्बत खुद को कई शताब्दियों से एक स्वतंत्र राज्य कहता है और कहता है कि चीन उस पर निरंतर अधिकार नही रख सका था।

चीन तिब्बत के साथ ही अरुणाचल प्रदेश पर भी दावा करता रहता है
चीन तिब्बत के साथ ही अरुणाचल प्रदेश पर भी दावा करता रहता है

मंगोल राजा कुबुलाई खान युवान वंश के स्थापना के थे और तिब्बत के साथ ही चीन, वियतनाम और कोरिया तक उन्होंने अपने राज्य का विस्तार किया था। फिर 17वीं शताब्दी में चीन के एक राजवंश ने तिब्बत के साथ संबंध जुड़े और 260 साल तक यह रिश्ता बना रहा, उसके बाद किंग सेना ने तिब्बत पर अधिकार कर लिया।

यह भी पढ़ें : चीन ने चुपके से कब्जा कर ली नेपाल की जमीन

लेकिन तीन साल के अंदर ही तिब्बतियों ने चीनी सेनाओं को भगा दिया। 1912 में दलाई लामा ने तिब्बत के स्वतंत्रता की घोषणा की थी लेकिन 1951 में चीन ने सेना के दम पर फिर से तिब्बत पर नियंत्रण कर लिया, साथ ही तिब्बत के शिष्टमंडल ने एक संधि पर हस्ताक्षर करके तिब्बत की संप्रभुता को चीन को सौंप दिया और दलाई लामा को तिब्बत छोड़ कर भारत की शरण लेनी पड़ी और तब से तिब्बत अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहा है।

साल 2003 के जून महीने में भारत में भी आधिकारिक रूप से यह मान लिया कि तिब्बत चीन का हिस्सा है। जब चीन के तत्कालीन राष्ट्रपति जियांग जेमिन और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई मुलाकात की और इसी के बाद भारत में पहली बार आधिकारिक तौर से इस बात को मान लिया कि तिब्बत चीन का हिस्सा है।

दोनों नेताओं की इस वार्ता के बाद भारत से सिक्किम के रास्ते व्यापार करने की शर्त मान ली थी और चीन ने सिक्किम को भारत के हिस्से के रूप में स्वीकार किया था।

- Advertisement -corhaz 3

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -corhaz 300

Latest article

आइए जानते हैं भारतीय संविधान की मूल प्रति क्यों रखी गई है गैस चेंबर में

26 जनवरी 2021 को भारत अपना 72 वाँ Republic Day ( गणतंत्र दिवस ) मनाने जा रहा है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत...

खांसी की समस्या को दूर करने के लिए इस तरह भाप में संतरा पका कर खाएं

खांसी की समस्या सर्दी के मौसम में बच्चे, बूढ़े, बड़े सब को परेशान करती है। लगातार खांसी की वजह से गले में दर्द और...

चाय बनाने के बाद इस्तेमाल की हुई चाय पत्ती से बनाए इस तरह बेहतरीन खाद Compost

भारत के लोग Tea पीने के बहुत शौकीन होते हैं। हर दिन हर घर में कम से कम एक बार चाय तो जरूर ही...

आइए जानते हैं सड़कों पर क्यों बनाई जाती है सफेद और पीले रंग की लाइन

हम सब ज्यादातर सड़क मार्ग से ही सफर करते हैं इसलिए ज्यादातर लोगों ने सड़क पर सफेद और पीले रंग की पार्टियों को देखा...

आंखों की थकावट और सूजन को दूर करने के लिए अपनाएं ये तरीके

जब बहुत ज्यादा देर तक जब सोने के बाद सुबह सो कर उठे हैं तो अक्सर हमारी आंखें सूजी हुई और थकी हुई नजर...