कोरोना वायरस कब तक रहेगा लोगों के बीच वैज्ञानिकों ने किया खुलासा
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कोरोना वायरस कब तक रहेगा लोगों के बीच वैज्ञानिकों ने किया खुलासा

कोरोना वायरस की शुरूआत साल 2020 की शुरुआत के साथ ही हुआ था। लगभग साल भर के अंदर इस वायरस ने अमेरिका भारत सहित दुनिया के कई देशों को बड़ी संख्या में संक्रमित किया और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बुरी तरीके से प्रभावित किया, पर अब वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ सालों में कोरोना वायरस महामारी स्थायी बन जाएगी यानी कि यह आने वाले समय में लोगों के बीच सामान्य इन्फ्लूएंजा और सामान्य सर्दी की तरह हमेशा बनी रहेगी। कुछ इलाकों में यह सिमट जाएगी और यह सब कुछ मानव व्यवहार के कारण होगा।

कोरोना वायरस का एक पैटर्न है :

वैज्ञानिकों का कहना है कि हर वायरस की तरह इसका भी एक पैटर्न है। जबकि कुछ समय पहले कहा जा रहा था कि बदलते मौसम के साथ इसस राहत मिलेगी और गर्मी में यह खत्म हो जाएगा लेकिन ऐसा कुछ भी नही हुआ।

अब अमेरिका के जॉर्ज टाउन स्थित ग्लोबल इंफेक्शन डिजीज प्रोग्राम के निर्देशक एलियन कर्लीन का मानना है कि कोई वायरस कैसे व्यवहार करता है और बीमारी कैसे फैलती है यह सब मौसम के एक पैटर्न के आधार पर होता है जैसे इनफ्लुएंजाए मौसमी बीमारी है।

यह ठंड के मौसम में एक्टिव हो जाती है, वहीं गर्मियों का मौसम इसके लिए प्रतिकूल होता है। यह गर्मियों में उतना असरदार नही रहती है।

लेकिन किसी खास मौसम मे किसी वायरस को प्रभावित होना कई बिंदुओं पर निर्भर करता है जैसे सांस संबंधी वायरस, ज्यादातर वायरस नमी और तापमान की वजह से प्रभावित होते हैं क्योंकि नमी और तापमान से ड्रॉपलेट्स हवा में छोटे छोटे कण के रूप में बर्ताव करने लगते हैं वही कोरोना वायरस अलग है।

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इसके लिए ज्यादातर मौसम से ज्यादा इंसानों का व्यवहार जिम्मेदार है कि यह किस तरीके से व्यवहार कर रहे। उनका कहना है कि गर्मी में भी अमेरिका के और दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस का प्रसार कम हो जाएगा ऐसा माना जा रहा था, लेकिन मौसम की वजह से कोई भी बदलाव नही देखा गया।

सरकार पाबंदियां लगाई जिसके चलते लोगों को भीड़ में जाने से रोका गया, मास्क लगाने पर जोर दिया गया और लोगों को शारीरिक दूरी का पालन करने के लिए हिदायत दी गई, जिसकी वजह से केस कम हुए।

कोरोना वायरस के स्वरूप में बदलाव इसे बना रहा है और भी घातक
कोरोना वायरस के स्वरूप में बदलाव इसे बना रहा है और भी घातक

इससे यह बात साबित हो गई कि कोरोना वायरस के प्रसार में मौसम का कोई बड़ा रोल नही है। इसके लिए मौसम से ज्यादा इंसानी व्यवहार ही जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा शुरू में इस वायरस के प्रति लोगों की इम्युनिटी बहुत कमजोर थी इसलिए यह हर तरह के मौसम में तेजी से फैलता रहा।

किसी भी वायरस का फैलना सबसे ज्यादा इस बात पर निर्भर करता है कि दो लोग एक दूसरे के कितना पास रह रहे हैं, एक दूसरे को छू रहे हैं या नहीं छू रहे हैं। इस तरह के व्यवहार किसी भी वायरस को फैलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वायरस तब तक बना रहेगा जब तक एक बड़ी आबादी इस वायरस के प्रति इम्युनिटी विकसित नही कर लेती है। इसी के बाद संक्रमण की दर में गिरावट देखने को मिलेगी और यह समय के साथ स्थिर हो जाएगा।

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लेकिन यह कभी भी पूरी तरीके से खत्म नही रहेगा बल्कि हमारे बीच बना रहेगा। एक स्थिति आने के बाद हो सकता है यह वायरस मौसम के हिसाब से घटे या बढ़े, लेकिन फिलहाल इसके लिए अभी एक लंबा वक्त लगेगा और तब तक हम इस वायरस को फैलने के लिए यूं ही नहीं छोड़ सकते।

जल्द ही इसके लिए वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी और साल दर साल लोगों की इम्युनिटी भी इस वायरस के प्रति बेहतर हो जाएगी।

शोध में कहा गया है कि कभी भी यह न समझें कि यह वायरस गर्मी में नही फैलेगा। शोध से साबित हो चुका है कि इस वायरस को फैलने के लिए मौसम नही बल्कि इंसानी व्यवहार ज्यादा जिम्मेदार है। इसलिए मास्क, शारीरिक दूरी और हाथ धोने के नियम का सख्ती से पालन किया जाना जरूरी है।

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