भारत एक लोकतांत्रिक देश

भारत एक लोकतांत्रिक देश

एक लोकतांत्रिक  तरीके से पास हुआ बिल जो कानून का रूप लिया उसके विरोध में हो रहे प्रदर्शन से आप भारत को पहचान सकते है कि भारत कैसे विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश हैं ,जिसमें विरोध और सहमति के आवाज को जगह दिया जाता हैं भारत सिर्फ एक भूमि का टुकड़ा नहीं है, भारत लोगो का समूह मात्र नहीं है, भारत बहती हुई नदी का नाम नहीं है, भारत एक भौगोलिक सीमा नहीं है,भारत तो एक भाव है, भारत आत्मा की तरह हमारे शरीर में बसता है और भारत देश नही है भारत हमारा प्राण है॥

हम उस देश के वासी है जहाँ अनूठी संस्कृतिओं का अनुपम संगम है। जहाँ ये कहा जाता है की अगर दो कोष पे भाषा बदलती है तो चार कोष पे वस्त्र बदल जाते है, संस्कृतियाँ बदलती रहती है लेकिन अनेकता में एकता इससे बड़ी कोई मिसाल कोई हो नहीं सकती जो इस देश की है ।

भारत की संस्कृति कितनी प्राचीन है, भारत की संस्कृति  का सबसे प्राचीन उद्धरण है वेद ,हमारे वो चार वेद जो सारी दुनिया को प्रेरणा देते है यजुर्वेद, अथर्ववेद , सामवेद , ऋग्वेद। भारत ने सिर्फ दर्शन और अध्यात्म के क्षेत्र में ही दुनिया को राह नहीं दिखाई,इसने विज्ञान जो एक ऐसा विषय है जिसमे भारत ने पहल नहीं की होती तो हम अंतरिक्ष में नहीं पहुँच पाते ।

शून्य जिसकी खोज भारत ने की, आर्य भट्ट यहाँ हुए, अगर आज शून्य दुनिया को नहीं मिलता तो चाँद तक की दुरी हम नाप नहीं सकते थे ।भारत जिसका मस्तक कश्मीर जिसपे मुकुट की तरह जड़ा है हिमालय, और सागर हमारे चरण पखेरता है ।

वो सागर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक वो दुरी हमारी लगभग चार हज़ार किलोमीटर है। पूर्व से लेकर पश्चिम और ऊपर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारत लगभग साढ़ेसात हज़ार किलोमीटर में फैला हुआ एक देश जहा पे विभिन्न संस्कृतियाँ है, जहाँ पे लगभग बाइस संवैधानिक भाषाएँ है और आठ सौ चवालीस उप भाषाएँ है।

विश्व का सबसे बड़ा लोक तंत्र और हमारी अस्मिता का सबसे बड़ा प्रतीक हमारा तिरंगा, हमारा राष्ट्रीय ध्वज । हमारा राष्टीय ध्वज जो तीन रंगो का समागम है हरा-श्वेत-केसरिया और उसके बीच हमारे प्रगति हमारी उन्नति का प्रतीक अशोक चक्र जिसमे बीच में चौबीस तिलिआ है।

एक सौ पचीस करोड़ लोगो का यह देश उनत्तीस प्रदेशो में और 9 केंद्र शाषित प्रदेशो में बटा हुआ है । जहा की भाषाएँ अलग है, जातियाँ अलग है, वर्ग अलग है, लेकिन सबकी भावना एक है – हिन्दुस्तानियत । मुझे गर्व है की मैंने इस देश में जन्म लिया और मुझे यकीन है की आप सब लोगो को भी गौरव की अनुभूति हो रही होगी की मैंने भी अपने इस देश की माटी में जन्म लिया ।

प्रफुल्ल कुमार सिंह

महात्मा पोस्ट के लिए

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