"प्रेस" ब्लैक एंड व्हाइट से रंगीन चित्र का सफर

“प्रेस” ब्लैक एंड व्हाइट से रंगीन चित्र का सफर

जब से ” प्रेस “ की शुरुआत हुई और समाचार पत्र और टीवी की शुरुआत है तब पहले यह सब ब्लैक एंड वाइट ही हुआ करते थे धीरे-धीरे बदला हुआ और यह भी बदलने लगे । वैज्ञानिक खोजों का नतीजा यह था कि अखबार और टीवी ब्लैक एंड वाइट से कलरफुल हो गए । ब्लैक एंड वाइट से कलरफुल समाचार और टीवी होने में काफी वक्त लगा ।

1980 के पहले तक समाचार पत्र के सारे पन्ने ब्लैक एंड वाइट हुआ करते थे । उसके बाद कुछ संस्थाओं ने रंगी समाचार पत्र छापने शुरू किये। इसके लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया।  पहले समाचार और मैगजीन ही कलरफुल सपना शुरू हुई थी । उसके बाद अखबार और टीवी भी कलरफुल हो गए । 1990 के बाद तो काफी ज्यादा बदलाव देखने को मिला ।

अखबारों में ज्यादातर सबकुछ करलफुल नजर आने लगा और वे आसानी से पढ़े जाने लायक भी हो गए । यह बदलते समय का ही नतीजा रहा है कि अब पहले की तुलना में काफी ज्यादा समाचार पत्र पढ़े जाने लगे हैं । आज के समय में अखबारों में चार रंग का इस्तेमाल होता है जिसे CMYK के नाम से जाना जाता है ।

इसका फुल फॉर्म होता है क्रेयॉन, मैग्नेटात येलो और के यानी ब्लैक। नीले लाल और पीले काले रंग में होता है जबकि के काले रंग में । अब के का मतलब भी काला समझा जाने लगा है । अगर इन अखबार में छपे पीछे के पन्नों में इन चार रंगों वाले डॉट्स का क्रम और कलर बिल्कुल सही और गाढ़ा बन गई है तब समझ लीजिए की रंगीन प्रिंट भी बेहतरीन दिखेगा ।

अगर इन चारों में से कोई भी इधर उधर हो जाए या एक दूसरे पर चढ़ जाए तो पूरा अखबार और तस्वीर खराब हो जाती है और वे धब्बेनुमा नजर आने लगते हैं । हम सभी ने बचपन में 3 ही प्राइमरी कलर जाने लाल नीला और पीला और आज भी पेंटिंग के दुनिया में कलर बनाने के लिए इन्ही 3 प्राइमरी कलर का ही इस्तेमाल होता है लेकिन प्रिंटिंग में चार कलर को मिलाकर छपाई की जाती है ।

जनसंपर्क का दूसरा माध्यम टीवी है । टीवी में भी तीन ही बेस कलर का इस्तेमाल होता है और यह हैं लाल हारे और नीला । इन्हीं के जरिए सभी कलर डिस्प्ले को कलरफुल बनाया जाता है और आज के समय में तो लाखों रंग इस्तेमाल हो रहे हैं ।

यह कलर टीवी, कंप्यूटर और मोबाइल सभी जगह इस्तेमाल हो रहे हैं । आज से करीब 38 साल पहले की बात है 1982 में जब भारत एशियाई खेलो की मेजबानी कर रहा था तब पहली बार टीवी पर रंगीन प्रसारण के लिए परीक्षण की शुरुआत की गई । जब दूरदर्शन पर रंगीन प्रसारण शुरू होने लगे तो मात्र 6 महीने के भीतर ही टीवी की डिमांड भारत में बहुत ज्यादा बढ़ गई थी और उस समय भारत सरकार को 50,000 टीवी विदेश से आयात करके मंगवाए थे । 1975 तक मात्र सात शहरों में ही टीवी प्रसारण होते थे जिसमें 2 राष्ट्रीय चैनल थे और 11 क्षेत्रीय चैनल।

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भारत में कृषि दर्शन सबसे चरण लंबा चलने वाला दूरदर्शन चैनल का कार्यक्रम है । भारत में दूरदर्शन चैनल की शुरुआत 15 सितंबर 1959 को की गई थी तब यह विशेष शिक्षा, सूचना और मनोरंजन का एक प्रमुख साधन माना जाता था और आज भी माना जाता है । भारत में टीबी अजूबे की जैसे थी और यही वजह थी कि भारत के लोग इसे बुद्धू बक्से के नाम से वह पुकारते थे ।

भारत में पहली बार दिल्ली में 18 टेलीविजन लगे थे और इसके लिए एक बड़ा सा ट्रांसमीटर लगाया गया था लेकिन उसके बाद मुंबई, कोलकाता, चेन्नई में इसका प्रसारण शुरू हो गया और आज तो हर जगह पहुँच हो गई है ।

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