कैसे पढेंगा और कैसे बढ़ेगा भारत

कैसे पढेंगा और कैसे बढ़ेगा भारत

कैसे पढेंगा और कैसे बढ़ेगा भारत

कोरोना की दूसरी लहर में बच्चों का भविष्य डगमगा रहा था बड़ी ही कशमकश थी क्या होगा बोर्ड की परीक्षाएं होंगी , या स्थगित होंगे, या फिर बिन परीक्षा के उत्तीर्ण कर दिया जाएगा,असमंजस में पड़े हुए थे विद्यार्थी।

माता-पिता की भी कम चिंता नहीं थी परीक्षा को लेकर। कोरोना की महामारी मैं एक अहम फैसला कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी गई।
क्या प्रतिक्रिया दूं देश के रंगीन मिजाज को बड़े खुश हैं परीक्षाएं रद्द होने पर,
ऐसी खुशी की लहर सी आ गई मानो बिन मांगे सब कुछ मिल गया हो।

जब टिक टॉक पब्जी जैसे सोशल मीडिया बंद हो गए थे तो सब ने बड़ा ही दुख जताया था कि, किसी की रोजी-रोटी बंद हो गई तो किसी की फैन फॉलोइंग या फॉलोअर्स कम हो गए, लाइक कमेंट शेयर न मिलने पर सभी विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रिया दे रहे थे, ऐसा नहीं होना चाहिए।

तो बताइए हमारे देश में कैसे बड़े बड़े वैज्ञानिक और इंजीनियर तरक्की करेंगे, कैसे कोई बिलगेट बनेगा, कैसी नई नई तकनीकी हमारे देश में आएगी।

धीरे धीरे सब कुछ बिक रहा है सरकारी कर्मचारी निजी कार्यकर्ता में तब्दील होती जा रहे हैं, न जाने आने वाली पीढ़ी किताबों से कब जोंक की तरह सोशल मीडिया में जाकर चिपक गई।

जिन बच्चों के हाथों में देश की बागडोर होनी चाहिए उनके हाथों में इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सएप, टि्वटर जैसी तार आ गई, और इसके जाल में इतनी बुरी तरह फंस गए कि अपने पराए हो गए और पराए अपने हो गए।

अपने लिए बच्चों ने दोस्ती रिश्ते सब सोशल मीडिया में ढूंढ लिया। बच्चों ने इस भयंकर कोरोना संक्रमण काल में कुछ सीखा हो या ना सिखा हो, मगर सोशल मीडिया की दुनिया की अच्छी-खासी जानकारी हो गई है।

कब कहां कैसे किस को हैक करना है ब्लॉक करना है। सच में स्मार्ट बच्चे स्मार्टफोन में स्मार्ट बन गए हैं। तो बस बन गया इंडिया स्मार्ट। अब ऐसा लगता है, न भारत पड़ेगा न बढ़ेगा।

कोविड-19 से पूरा संसार बेहाल हो गया है। और आने वाले भविष्य में जिनके पास हमारे देश की बागडोर है उनका भविष्य अंधकार की ओर जाता दिखाई दे रहा है।

आज सरकार ने बच्चों को उत्तीर्ण कर दिया क्या जब बच्चे जॉब के लिए फॉर्म भरेंगे, कंपटीशन में बैठेंगे तो क्या उनको जॉब आसानी से मिल जाएगी क्या कंपटीशन आसानी से पास कर लेंगे।

जब छात्रों ने स्कूल के दर्शन ही नहीं किए ऑनलाइन में बस सोशल मीडिया में ही व्यस्त रहे तो बच्चे किस तरह से अपने भविष्य को उज्जवल बनाने की की तैयारी करेंगे।

न जाने क्यों ऐसा लगता है कि कोरोनावायरस का सबसे ज्यादा असर बच्चों की विद्या पर सबसे अधिक पड़ा। बाहर निकले तो कोरोना वायरस पकड़ लेगा ऑनलाइन पर पढे तो सोशल मीडिया जकड़ लेगा। आखिरकार विद्यार्थी करे तो क्या करें। वाह रे मेरी सरकार क्या है तेरी नीति और क्या है तेरी चाल।

लेखिका : गीता पति प्रिया
दिल्ली

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