अमेरिकी संसद में महात्मा गांधी के विचारों को बढ़ावा देने के लिए जल्द आ सकता है कानून

अमेरिकी संसद में महात्मा गांधी के विचारों को बढ़ावा देने के लिए जल्द आ सकता है कानून

अमेरिकी संसद में महात्मा गांधी के विचारों को बढ़ावा देने के लिए जल्द आ सकता है कानून

जल्द ही अमेरिकी संसद में महात्मा गांधी के विचारों को बढ़ावा देने वाला कानून पारित हो जाएगा। यह भारतीयों के लिए यह गर्व का क्षण होगा।

अमेरिका की संसद में गुरुवार को बहुप्रतीक्षित कानून गांधी -किंग का एक्सचेंज एक्ट पारित होने की पूरी संभावना है। इस कानून के जरिए महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर के विरासत को प्रचारित करने के साथ ही अध्ययन करने को बढ़ावा देने के लिए यह एक्ट पारित किया जाएगा।

इस एक्ट को तैयार कर लिया है इसे नागरिक अधिकारों के पैरोकार करने वाले सांसद जॉन लेविस ने तैयार किया है, लेकिन दुर्भाग्य से इसे कानून बनने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई है, पिछले साल ही उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया है।

बता दें कि अमेरिकी संसद में भारतीय मूल के सांसद डॉक्टर एनी बोरा इस कानून को लगातार समर्थन दे रहे हैं और इसकी पैरवी कर रहे हैं। इस एक्ट को सांसद की विदेशी मामलों की समिति ने पहले से ही पारित कर रखा है, जब यह अमेरिकी संसद में पारित हो जाएगा तब यह कानून का रूप बन जाएगा।

बता दें कि अमेरिकी सांसद में इसे कानून बनने के लिए संसद में दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता है। गुरुवार को इस पर बहस होने की भी संभावना है।

इस पर बहस करने के लिए 40 मिनट का समय सीमा को निर्धारित रखा गया है। बता दें कि इस कानून के बनने के बाद भारत और अमेरिका की सरकार एक ऐसे वैश्विक मंच की स्थापना कर सकने में सक्षम होंगे जिसके जरिए छात्रों को महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर के अहिंसा के सिद्धांतों को जानने और उस पर अध्ययन करने में सुविधा मिलेगी।

इस अधिनियम के तहत भारत् अमेरिका गांधी-किंग फाउंडेशन की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है। बता दें कि जब इस पर कानून बन जाएगा तब मानवाधिकार, समानता, न्याय और लोकतंत्र स्थापना के लिए यह कानून बेहद महत्वपूर्ण होगा और इसकी भागीदारी महत्वपूर्ण रहेगी।

महात्मागांधी और मार्टिन लूथर किंग :-

भारत में महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता का दर्जा प्राप्त है। महात्मा गांधी के जन्मदिन 2 अक्टूबर को पूरे देश ही नही बल्कि दुनिया भर में अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है और उनके विचारों का पालन करने और उन पर चढ़ने की बात कही जाती है। गांधीजी ने भारत को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

गांधी जी की तरह ही मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने भी अमेरिका के लोगों को गुलामी की प्रथा से आजाद करवाया था। यही वजह है कि अब अमेरिका का राष्ट्रपति खुद को “लीडर ऑफ द फ्री वर्ल्ड” कहते संबोधित करता है।

अमेरिका में हुए सिविल राइट्स आंदोलन में मार्टिन लूथर किंग जूनियर एक हीरो बनकर उभरे थे। उन्होंने 1963 में अफ्रीकी अमेरिकी समुदाय के लोगों के हक की मांग की थी और 28 अगस्त 1963 को अब्राहम लिंकन मेमोरियल की सीढ़ियों पर खड़े होकर उन्होंने एक जोरदार भाषण दिया था।

इस भाषण को आई हैव ए ड्रीम (I Have A Dream) नाम से जाना जाता है। इसी के चलते मार्टिन लूथर को 1963 में टाइम्स द्वारा पर्सन ऑफ द ईयर से नवाजा गया था और 1964 में मार्टिन लूथर किंग जूनियर सबसे कम उम्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले पहले व्यक्ति बने थे।

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