शशि थरूर
राजनीति

मिलिंद देवड़ा शशि थरूर जैसे पुराने कांग्रेसी नेताओं ने भी कांग्रेस के खिलाफ खोला मोर्चा

कांग्रेस पार्टी के अंदर घमासान रुकने का नाम ही नही ले रहा। यह दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। अब यूपीए काल की खामियों का हवाला देकर पुराने कांग्रेसी नेता भी राहुल ब्रिगेड के खिलाफ मोर्चा खोल दिए हैं।

इसमें मनीष तिवारी, शशि थरूर, मिलिंद देवड़ा जैसे नेता शामिल हैं। इस समय  में कांग्रेस पार्टी के मौजूदा हालात से इसी बात की आशंका  व्यक्त की जा रही है कि पार्टी के अंदर का घमासान अब गंभीर होता जा रहा है।

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने 2014 और 2019 में कांग्रेस के लोकसभा चुनाव में हार का विश्लेषण करने के लिए सिलसिलेवार कई सारे सवाल उठाए और यूपीए सरकार के मसले पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया।

मनीष तिवारी ने ट्वीट करते हुए कहा भाजपा 2004 से 2014 तक 10 साल तक सत्ता में नहीं थी लेकिन भाजपा ने  कभी भी बीजेपी या उनकी सरकार के कार्यकाल पर किसी भी प्रकार का दोषारोपण नहीं किया।

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लेकिन अगर कांग्रेस पार्टी की बात करें तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस के भीतर ही भाजपा एनडीए पार्टी से लड़ने के बजाय मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाले यूपीए सरकार पर ही इन लोगों ने सवाल खड़ा किया है। मनीष तिवारी ने राहुल गांधी की अगुवाई की युवा ब्रिगेड पर हमला किया है।

milind deora

इसके पहले उन्होंने सोनिया गांधी की अध्यक्षता में गुरुवार को कांग्रेस पार्टी की राज्यसभा सांसदों की बैठक में कांग्रेस की बदहाली को लेकर सवाल उठाए। तब एनके एंटनी, कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा पी.चितम्बरम जैसे नेताओं ने उसपर अपनी असहमति जताई थी।

वहीं कई वरिष्ठ नेताओं का यह भी कहना है कि युवा बनाम बुजुर्ग जैसे सोच के चलते पार्टी की यह हालत हो रही है और इसमें सामंजस्य ल कर ही कांग्रेस सही राह पर आ सकती है।

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मनीष तिवारी के ट्वीट के समर्थन में दिग्गज नेता मिलिंद देवड़ा जो कि राहुल गांधी की टीम का हिस्सा है, मनीष तिवारी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 2014 में जब मनमोहन सिंह ने सत्ता छोड़ी थी तब कहा था कि इतिहास उनके साथ उदारता बरतेगा लेकिन उन्होंने इस बात की कल्पना भी नहीं की होगी कि उनकी पार्टी के अंदर के लोग ही देश के लिए की गई उनकी सेवाओं को नकार देंगे।

वही शशि थरूर ने ट्वीट करके मनीष तिवारी और मिलिंद देवड़ा का समर्थन किया और कहा कि यूपीए ने 10 साल से दुर्भावना से प्रेरित होकर दुष्प्रचार किए हैं। शशि थरूर ने यह भी कहा कि पार्टी को हार से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है और कांग्रेस को फिर से पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।

लेकिन वैचारिक शत्रुओं के हाथ खिलौना बन कर ऐसा कर पाना मुश्किल है। इस तरह यह साफ है कि राहुल गांधी की युवा ब्रिगेड की राह आसान नही होने वाली है।

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