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Thursday, March 4, 2021

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा नियामक की स्थापना, मातृभाषा पर विशेष ध्यान

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केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा बुधवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी मिल गई और चार वर्षीय यूजी पाठ्यक्रम में एमफिल को समाप्त करते हुए कई बदलाव गए है। अब कई विकल्पों के साथ चार साल की स्नातक की डिग्री प्रदान की जाएगी। इसके लिए एक एक सामान्य उच्च शिक्षा नियामक को स्थापित करना की बात कही गई है।

यह नई शिक्षा नीति 2030 तक प्रारंभिक बचपन की शिक्षा के सार्वभौमिककरण करने और कक्षा 6 से कोडिंग और व्यावसायिक अध्ययन के साथ एक नया स्कूल पाठ्यक्रम लागू करने और कक्षा 5 तक की शिक्षा में माध्यम(मीडियम) के रूप में बसहो की मातृभाषा में शिक्षा देने की बात की गई है।

बता दे एक तरह से 34 बाद यह पहली नई शिक्षा नीति है, और 2014 में भाजपा ने चुनावी वादो में नई शिक्षा नीति लागू करने को बात कही थी। इसके लिए इसरो के पूर्व प्रमुख के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक पैनल ने दिसंबर 2018 में एक मसौदा प्रस्तुत किया था। इसमे कुछ मुद्दे रहे है –

भाषा के मुद्दे

भाषा के मुद्दों ने ने इसमे सबसे अधिक आक्रोश पैदा किया, जैसा कि मूल मसौदे में सभी स्कूली छात्रों को हिंदी के अनिवार्य शिक्षण की बात कही गई अब वह खंड हटा दिया गया और अंतिम दस्तावेज  में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि “तीन-भाषा के फॉर्मूले में अधिक लचीलापन होगा, और किसी भी राज्य पर कोई भाषा भी थोपी जाएगी।

अब बच्चों द्वारा सीखी गई तीन भाषाएं राज्यों, क्षेत्रों और निश्चित रूप से स्वयं छात्रों की पसंद की होंगी,  संस्कृत को स्कूल और उच्च शिक्षा के सभी स्तरों पर एक विकल्प के रूप में पेश किया जाएगा,” नई शिक्षा नीति में कहा गया है कि अन्य शास्त्रीय भाषाएं भी ऑनलाइन मॉड्यूल के रूप में उपलब्ध होंगी, जबकि विदेशी भाषाओं को माध्यमिक स्तर पर ही लागू किया जाएगा।

National education

“जहां तक ​​संभव हो, कम से कम ग्रेड 5 तक शिक्षा का माध्यम,मातृ भाषा ही रहे लेकिन इसे अधिमानत ग्रेड घर की भाषा / मातृभाषा / स्थानीय भाषा / क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा होगी। यह सार्वजनिक और निजी दोनों स्कूल में लागू होगी।

नई शिक्षा नीति में स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक में काफी बदलाव किए गए हैं और स्कूली शिक्षा को एक नया रूप दे दिया गया है। नई शिक्षा नीति में प्री प्राइमरी को भी जोड़ दिया गया है और इसके पाठ्यक्रम में भी बदलाव करने की बात कही गई है और फिलहाल यह जिम्मेदारी एनसीईआरटी को ही थी। इसके साथ ही लगभग दो करोड़ बच्चों को फिर से स्कूलों से जोड़ा जाएगा जो स्कूल से बाहर हो चुके हैं। इसमें दसवीं और बारहवीं में फेल होने वाले बच्चे भी शामिल है।

यह भी पढ़ें : भारत शक्तिशाली देशो के वैश्विक मंच जी-7 मे हो सकता है शामिल

नई शिक्षा नीति कौशल विकास के तहत बच्चों के रुचि के मुताबिक उन्हें ट्रेनिंग दिलाएगी। नया पाठ्यक्रम कुछ इस तरह से तैयार किया जाएगा कि बच्चे अपने कोर्स को बीच में छोड़कर कोई दूसरा पसंद का विकल्प चुन सकेंगे और इसमें क्रेडिट ट्रांसफर भी आसानी से हो सकेगा। इसका मकसद है कि इससे छात्रों की अभिरुचि को नया आयाम देने की कोशिश की जाएगी।

नई शिक्षा नीति में फीस जैसे मसलों को भी ध्यान में रखा गया है अब नई शिक्षा नीति तय करेगी कि कौन से संस्थान के किस कोर्स के लिए कितनी फीस होगी इसके लिए एक मानक निर्धारित किया जाएगा और उसी के दायरे में फीस रखी जाएगी।

इस दायरे में निजी और सरकारी दोनों संस्थान शामिल होंगे। क्योंकि मौजूदा समय में बच्चों की पढ़ाई में सबसे बड़ी बाधा बढ़ती हुई फीस बनी है। इसलिए नई शिक्षा नीति द्वारा एक ऐसी फीस का दायरा रखा जाएगा जिसमें हर कोई पढ़ सके।

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