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Saturday, February 27, 2021

निर्भया कांड के दोषियों को हुई फाँसी : आखिर 7 साल बाद हो ही गया इंसाफ

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16 दिसंबर 2012 को देश की राजधानी दिल्ली में एक दिल दहला देने वाली दरिंदगी की घटना हुई थी जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया । निर्भया कांड सालों से सबसे चर्चित मामला रहा है जिसकी बातें भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी होती रहे हैं । आज उस निर्भया को इंसाफ मिल गया । शायद अब जाकर उसकी आत्मा को शांति मिले ।

निर्भया एक काल्पनिक नाम है जिसका 16 दिसंबर 2012 की रात को छह दरिंदों द्वारा चलती बस में दुष्कर्म किया गया था और उसके बाद उसे तथा उसके दोस्त को चलती बस से नीचे फेंक कर कुचलने की कोशिश की गई थी और दोनों को बेरहमी से मारा भी गया था । 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में कड़ाके की ठंड वाली रात थी और उसमें इस तरह की घटना को अंजाम दिया गया था जिससे पूरी दिल्ली के साथ पूरे दिल देश का दिल दहल गया था ।

निर्भय का दोस्त तो बच गया और कई साल बाद एक सामान्य इंसान हो पाया है लेकिन उसके जहेन से यह घटना निकलना नामुमकिन है ।वही निर्भया दरिंदगी के 13 दिन बाद 29 दिसंबर को जिंदगी की जंग हार गई । इसी के साथ सिलसिला शुरू हुआ इंसाफ पाने का जो कि 7 साल बाद जाकर आज 20 मार्च को मिला है ।

निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले चारों लोगों को आज सुबह भारतीय समय अनुसार दिल्ली स्तित तिहाड़ जेल में सुबह के समय 5:30 बजे फांसी के फंदे पर लटका दिया गया । निर्भया कांड के आरोपियों को पुलिस ने अपने ताबड़तोड़ कार्रवाई के जरिए घटना के बाद जल्दी से गिरफ्तार कर लिया था ।

मालूम हो कि निर्भया के साथ चलती बस में दुष्कर्म हुआ था । इस बस को राम सिंह नाम का चालक चला रहा था जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था और तिहाड़ जेल में बंद किया था जिसने 11 मार्च 2013 को जेल में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी ।इसके बाद आज चारों आरोपियों को फांसी दे दी गई इन चारों आरोपियों का नाम अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और मुकेश कुमार सिंह है ।

चारों ने बचने के लिए खूब दांवपेच खेले और अदालती कार्यवाही हुई मामला लंबा खींचता गया और दिल्ली कि कोर्ट को चार बार इन आरोपियों का डेथ वारंट जारी करना पड़ा । इन चारों आरोपियों ने फांसी से बचने के लिए हर दांव पेंच अपनाए लेकिन इंसाफ इंसाफ होता है और हर गुनाह की सजा एक ना एक दिन मिलकर रहती है ।

नतीजा यही हुआ निर्भया के साथ इंसाफ हुआ और चारों आरोपियों को आखिरकार फांसी दे दी गई । इन चारों को फांसी इस बात की गवाह है कि भले ही कितने भी दांव पेंच अपनाए जाएं, सजा से बचने की कितनी भी कोशिश कर ली जाए, हर गलत काम करने की सजा एक न एक दिन मिलकर रहती है, देर हो सकती है लेकिन सजा जरूर मिलती है ।

मालूम हो कि भारत में अक्सर ही टीवी में अखबारों में महिलाओं, लड़कियों, यहां तक की छोटी बच्चियों के साथ दरिंदगी की घटनाएं देखने और सुनने को मिल जाती हैं । इन आरोपियों को फांसी शायद अब इस पर कुछ हद तक लगाम लग सके और लोगों के मन में डर बैठ सके कि अगर वह किसी भी तरह की दरिंदगी और गलत काम करते हैं तो उन्हें कानून सजा जरूर देगा ।

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