नीतीश कुमार सातवीं बार बने हैं बिहार के सीएम
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नीतीश कुमार सातवीं बार बने हैं बिहार के सीएम आइये जानते हैं कुछ महत्वपूर्ण बातें

एक बार फिर से बिहार की कमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों मे आ गई है। वह सातवीं बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं इनके साथ 7 अंकों का गजब का सहयोग देखा जा रहा है।

उन्होंने 16 तारीख को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली जिसमे 7 अंक का संयोग बन है 1+6= 7 और उन्होंने 7 बार वह मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।

उन्होंने चुनावी अभियान में 7 वचनों का जिक्र किया था और कहा था कि यदि सातवीं बार पुनः उन्हें बिहार के लिए काम करने का मौका मिलता है तब वह यह सात निश्चय काम करेंगे।

इस साथ वचन की खासियत यह है कि इसमें युवा, महिला, गांव को विशेष महत्व दिया जा रहा है, साथ ही इसमें आधारभूत संरचना के लिए नए स्वरूप पर काम करने की भी बात कही गई है।

सुशासन के कार्यक्रम के अंतर्गत सात निश्चित तत्वों को शामिल करके इससे जुड़ी योजनाओं पर काम करने की भी बात नीतीश कुमार ने कही थी।

बता दें कि साल 2015 में जब महागठबंधन की सरकार आई थी तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सात निश्चय के तहत हर घर को बिजली देने की योजना पर काम करना शुरू किया था और इस लक्ष्य को समय से पहले ही हासिल कर लिया गया।

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अब वह हर खेत को पानी उपलब्ध करवाने की बात कह रहे है जिसे बिहार में एक बड़े एजेंडे के रूप में शामिल किया गया है। बता दें कि जल अनुसंधान विभाग द्वारा कुछ समय पहले ही बिहार में इस पर सर्वे किया गया था।

गांव के भीतर सड़कों को मुख्य सड़क और बाईपास से जोड़ने की भी योजना पर लगातार काम हो रहा है। गांव में उजाले के लिये सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने की भी बात कही गई है साथ ही गांव के अंदर दूषित जल के ट्रीटमेंट के लिए भी प्लांट लगाए जाने की बात कही गई है, जिससे ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन नई व्यवस्था के तहत किया जाएगा।

nitish kumar

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बार सात निश्चय के साथ सात वचन में यह बात भी कहा था कि शहरों में वृद्धजनों के लिए आश्रय स्थल बनाए जाएंगे और उनके बेहतर प्रबंधन और संचालन की व्यवस्था करवाई जाएगी साथ ही शहरी गरीबों के लिए बहुमंजिला इमारतों के निर्माण का भी वादा उन्होंने किया था।

नीतीश कुमार ने यह भी तय किया है कि 8 में से 5 पंचायतों पर पशु अस्पताल का इंतजाम करवा दिया जाएगा, जिससे पशुओं को चिकित्सा सुविधा, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान जैसी सेवाएं पशुपालकों को मिल सकेंगी। इसके लिए एक कॉल सेंटर बनाने की भी योजना है। यह सभी काम मोबाइल ऐप के माध्यम से किए जाएंगे।

युवाओं के लिए रोजगार सृजन के तहत क्वालिटी तकनीकी ट्रेनिंग के लिए नई संस्था को तैयार करने की बात कही गई है। महिलाओं को उद्योग के क्षेत्र में सक्रिय करने के लिए आर्थिक सहयोग की भी बात कही गई है।

मंत्रिमंडल में सब को प्रतिधिनित्व देने की कोशिश :-

सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बनने पर नीतीश कुमार ने 15 सदस्य मंत्रिमंडल का गठन करके जातिगत सामाजिक व्यवस्था में संतुलन कायम करने का बखूबी ध्यान रखा है।

सोशल इंजीनियरिंग में शिक्षा ग्रहण करने वाले नीतीश कुमार इसे साधने की अपनी बेहतर कोशिश किए हैं। उन्होंने बीजेपी के वैश्य बिरादरी के तारा किशोर प्रसाद और नोनिया जाति के रेणु देवी को उपमुख्यमंत्री का पद देकर सियासी दांव खेला ही है साथ ही हर जाति वर्ग को प्रतिनिधि देने की कोशिश की है।

नए मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार कुर्मी जाति का प्रतिनिधित्व स्वयं कर रहे हैं और भूमिहार तथा यादव जाति के लिए दो-दो मंत्री बनाए गए हैं। बता दें कि जनता दल यूनाइटेड के विजय कुमार चौधरी और बीजेपी के देवेश मिश्रा भूमिहार जन जाति से आते हैं।

वही बृजेंद्र प्रसाद यादव और बीजेपी के राममूर्ति राय को मंत्री पद देकर यादव बिरादरी को भी साधने की कोशिश की गई है।

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जेडीयू के पासी जाति के अशोक चौधरी को हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के मतहर जाति के संतोष सुमन को और बीजेपी के रामप्रीत पासवान को प्रतिनिधि बनाकर महादलित वर्ग का प्रतिनिधि शामिल किया गया है।

ब्राह्मण जाति से मंगल पांडे को और राजपूत जाति से अमरेंद्र प्रताप सिंह को मंत्री पद दिया गया है। इस तरह से उन्होंने लगभग हर जाति के प्रतिनिधि को मंत्रिमंडल में जगह दी है।

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