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Sunday, January 17, 2021

अच्छी खबर : ओजोन परत में बना सबसे बड़ा छेद अपने आप भर गया

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कोरोना वायरस से जहां सारी दुनिया परेशान है वही अप्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी के वातावरण के लिए यह काफी अच्छा है । हम इसलिए ऐसा कह रहे हैं क्योंकि कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में लॉक डाउन की रणनीति अपनाई गई और नतीजा यह रहा कि पर्यावरण पर इसका सकारात्मक असर दिखने लगा ।

मालूम हो कि पृथ्वी के बाहरी आवरण ओजोन परत में प्रदूषण के चलते एक बड़ा सा छेद हो गया था जो अब अपने आप ही बाहर गया है । यह आर्कटिक के ऊपर करें 10 लाख वर्ग किलोमीटर की परिधि में बना था और इतना बड़ा ओजोन में हुआ छेद अप्रैल के शुरुआती महीने में वैज्ञानिकों को पता चला था । वैज्ञानिकों का मानना था कि यह छेद उत्तरी ध्रुव पर निम्न तापमान की वजह से था ।

मालूम हो कि ओजोन परत सूर्य की पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी की रक्षा करती है और ये सूर्य की किरणें इंसानों के त्वचा कैंसर का प्रमुख कारण है । बढ़ती जनसंख्या और इंसान की गतिविधियों का सीधा असर पृथ्वी के वातावरण पर पड़ता है । यूरोपियन आयोग कॉपरनिकस एटमॉस्फेयर मॉनिटरिंग सर्विस के कॉपरनिकस ने ट्वीट करके इसके बारे में जानकारी दी ।

इसका कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में लोगों लॉक डाउन में है । जिसकी वजह से वातावरण पर सकारात्मक प्रभसव दिख रहा । ओजोन परत के छेद के ठीक होने की वजह पोलर वोर्टेक्स है । पोलर वोर्टेक्स ही ध्रुवीय क्षेत्र में ठंडी हवा के बहाव का कारण बनता है और इस साल पोलर वोर्टेक्स काफी शक्तिशाली रहा है ।

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इन्हीं पोर्टल पोलर वोर्टेक्स की वजह से एस्ट्रोस्फेरिक बादल की उत्पत्ति होती है जोकि सीएफसी क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस के साथ रिएक्शन करके ओजोन की परत को नष्ट करने का काम करता है । मालूम हो कि 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की संधि हुई थी जिसमें सीएफसी गैस के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की बात हुई थी ।

यह भी पढ़ें : कोरोना वायरस एशिया और प्रशांत महासागर के लिए वरदान

अब जब पोलर वोर्टेक्स कमजोर हो गया है तो ओजोन परत अपने सामान्य स्थिति में पुनः आ गया है । हालांकि कोपर्निक्स का मानना है कि पोलर वर्टेक्स की वेज से दोबारा फिर से होल बन सकता है और यह ओजोन परत को फिर से प्रभावित करेगा लेकिन अब यह उतना ज्यादा ओजोन परत को नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा । मालूम हो कि आर्केटिक में इस ओजोन परत के छेद को वैज्ञानिकों ने अब तक का सबसे बड़ा छेद बताया था ।

मालूम हो कि ओजोन परत हमारे वायुमंडल की छोभ मंडल के सबसे ऊपर की परत में पाई जाने वाली परत ही ओजोन की परत है । लॉक डाउन की वजह से पर्यावरण में काफी सुधार देखने को मिल रहा है क्योंकि तमाम औद्योगिक गतिविधियां बंद हो गए हैं और इससे रासायनिक गैसों का उत्सर्जन भी बेहद कम हो गया है ।

एक रिपोर्ट के अनुसार पृथ्वी का वातावरण इतना साफ हो जा रहा है जितना कि 70 -80 के दशक में था । लॉक डाउन की वजह से धरती की आबोहवा में काफी शुद्धता देखने को मिल रही है । गंगा में भी प्रदूषण कम हो गया है और ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ गई है ।

 

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