दर्द से राहत देने वाली पेन किलर सेहत के लिए है नुकसान देह जाने कैसे

दर्द से राहत देने वाली पेन किलर

दर्द से राहत देने वाली पेन किलर

अच्छी सेहत के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल के चलते दर्द जिंदगी का एक हिस्सा हो गया है। सर दर्द, कमर दर्द, बदन दर्द, गर्दन दर्द, घुटने का दर्द आदि दर्द से जुड़ी समस्याएं काफी लोगों को होती हैं।

आज कल बहुत सारे लोग दर्द से निजात पाने के लिए पेनकिलर को सबसे बेस्ट ऑप्शन के रूप में मानते हैं। महिलाएं अपने बैग में पेनकिलर की गोलियां रखती हैं, जब भी उन्हें हल्का दर्द महसूस होता है तब वे उन्हें तुरंत खा लेती हैं।

लेकिन क्या आप भी ऐसा करते हैं यदि ऐसा करते हैं तब थोड़ा सा सतर्क हो जाने की जरूरत है क्योंकि हाल में ही ब्रिटेन के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड केयर एक्सिसीलेंस ने एक नई गाइडलाइन जारी करते हुए कहा है कि पेनकिलर के रूप में अधिकतर लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली आइब्यूफ्रेन या पेरासिटामोल की गोलियां दर्द से जल्दी राहत दिलाती है या नही लेकिन ये शरीर के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह है।

इस स्वास्थ्य एजेंसी ने एक गाइडलाइन जारी करते हुए डॉक्टरों को सलाह दी है कि क्रॉनिक पेन यानी कि वे लोग जो पुराने दर्द से पीड़ित हैं उन रोगियों के लिये पेनकिलर की दवाइयां न लिखें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की दर्द निवारक दवाइयाँ राहत देने के बजाय शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं।

इस एजेंसी ने दावा किया है कि उसके पास पुख्ता सबूत है कि यह दवाइयां फायदा पहुंचाने से बहुत ज्यादा शरीर को नुकसान पहुंचा देती हैं और इसमें यह बात भी कहा कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि दर्दनिवारक दवाओं का इस्तेमाल दर्द पर किस तरीके से पड़ता है। यह दर्द में राहत दिलाता भी है या नहीं?

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गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि जिन मरीजों को क्रॉनिक दर्द में ये दर्द निवारक गोलियां  जैसे पेरासिटामोल देना उचित नहीं है। बता दें कि आमतौर पर डॉक्टर क्रॉनिकपेन उसे कहते हैं जो 3 से 6 महीने से हो रहा हो और पूरी तरीके से सही न हो रहा हो।

दूसरे शब्दों में कहे तो जो दर्द 6 महीने से भी ज्यादा पुराना हो उसे क्रॉनिक पेन कहा जाता है। ऐसे दर्द का इलाज करना काफी मुश्किल भरा होता है और जब ऐसे दर्द से पीड़ित व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर या दुखी होता है तब कार्यात्मक अपंगता इसकी एक विशेषता है।

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स्वास्थ्य एजेंसी का कहना है कि एक तिहाई से भी अधिक जनसंख्या क्रॉनिक पेन से ग्रस्त है और उसमें भी आधे से ज्यादा लोग डिप्रेशन के शिकार हैं और दो तिहाई लोग दर्द के कारण काम नहीं कर पाते हैं।

 इस तरह पाएं क्रॉनिक पेन से छुटकारा :-

एक्सरसाइज :-

क्रॉनिक पेन से छुटकारा पाने का एक बेहतर तरीका है नियमित तौर से एक्सरसाइज की जाये। इसके लिए वाकिंग, साइक्लिंग, जॉगिंग, स्वीमिंग, योगा, डांसिंग आदि को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जाना चाहिए। जिन लोगों का मन किसी भी काम में न लग रहा हो उनके लिए भी एक्सरसाइज और योगा करना फायदेमंद है।

दर्द की स्थिति में काम में मन नही लगता है लेकिन इससे निपटने का तरीका है कि काम करते रहे क्योंकि काम छोड़ने से शरीर स्थूल हो जाएगा और फिर अन्य तरह की समस्याएं उत्पन्न होंगी।

फिजिकल थेरेपी :-

दर्द से राहत पाने के लिए हल्का-फुल्का व्यायाम किया जा सकता है, लेकिन अगर दर्द ज्यादा होता है और नियमित रूप से बना रहता है तब इसके लिए फिजियोथेरेपिस्ट की निगरानी में कुछ दिनों तक फिजियो करना काफी लाभ देता है। फिजियोथेरेपी से दर्द से छुटकारा मिल जाता है।