विश्व स्वास्थ्य संगठन ने माना कोरोना वायरस से उबरने के बाद भी काफी समय तक पूरी तरह ठीक नही महसूस कर रहे मरीज
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने माना कोरोना वायरस से उबरने के बाद भी काफी समय तक पूरी तरह ठीक नही महसूस कर रहे मरीज

विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस महामारी के मामलों को लेकर चिंता जताई है उसने माना है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से उबरने के बाद भी काफी समय तक पूरी तरीके से मरीज ठीक नही महसूस कर रहे हैं।

इसके लिए डब्ल्यूएचओ ने एक इमरजेंसी कमेटी की मीटिंग भी बुलाई थी जिसमें कोरोनावायरस के चलते उत्पन्न हुए मौजूदा हालात पर चिंता व्यक्त की गई और उसकी समीक्षा भी की गई है।

इस मीटिंग के बाद ही डब्ल्यूएचओ ने अपने बयान में कहा है कि कोरोना वायरस अभी भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक मुद्दा है और अभी भी यह सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा बना हुआ है।

बता दें कि कोरोनावायरस की शुरुआत दिसंबर 2019 के आखिर में चीन के वुहान शहर से हुई थी। पहला मामला यही पर देखा गया था।

इसके बाद जनवरी और फरवरी तक यह लगभग आधी दुनिया में फैल चुका था, और देखते ही देखते पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले लिया।

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इसके बाद अभी तक लगातार कोरोना वायरस के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। इसका असर स्वास्थ्य प्रणाली के साथ-साथ अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा जिसके चलते दुनियाभर की अर्थव्यवस्था बुरी तरीके से चरमरा गई।

रायटर्स के ताजा आंकड़े के अनुसार दुनिया में अब तक 46,120,511 मामले सामने आए हैं जिसमें से 1,195,428 लोगो की मौत हुई है। करीब 31,058,352 लोग संक्रमण से पूरी तरीके से ठीक हो चुके हैं।

वहीं डब्ल्यूएचओ के आंकड़े की मानें तो अब तक दुनिया में 45,678,440 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए है, और 1,189,945 लोगो की मौत हुई है।

यह आंकड़े 1 नवंबर दोपहर 2 बजे तक के हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के ये आंकड़े दुनिया के 219 देशों से इकट्ठे किए गए हैं। बता दें कि पिछले 9 महीने में कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मामले अमेरिका में पाए गए हैं।

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अमेरिका में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक है और बीते कुछ महीने से अमेरिका पहले स्थान पर बना है।

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वही संक्रमित की कुल संख्या के आधार पर देखें तो अमेरिका के बाद दूसरा स्थान भारत का है। हालांकि अगर भारत के कुछ राज्यों को छोड़ दिया जाए तो भारत में पिछले कुछ सप्ताह से कोरोना वायरस के मामले में गिरावट देखी जा रही है और रिकवरी रेट भी बढ़कर 91 फ़ीसदी पहुंच गया है, जो कि अन्य देशों के मुकाबले काफी अच्छा बताया जा रहा है। इसके पहले भी भारत में प्रति दस लाख की आबादी पर कोरोनावायरस के कम ही मामले सामने आये।

संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक का कहना है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान ऐसे काफी मरीजों सामने आ रहे हैं जिनका कहना है कि वे कोरोनावायरस के मध्यम और दीर्घकालीन प्रभावों का सामना कर रहे हैं और उन्होंने इस बात पर चिंता जताई है कि इसके अनेक लक्षण हैं जो कि समय के साथ-साथ बदल रहे हैं। यह शरीर के किसी अंग की कार्यप्रणाली को भी प्रभावित कर रहा है।

कोरोनावायरस के लक्ष्ण में थकान, खांसी, सांस फूलने की समस्या, फेफड़े और दिल में सूजन जैसी समस्याएं मिल रही हैं।

भारत में कोरोना दो लाख लोगों को अब तक कर चुका है संक्रमित

इसके अलावा यह न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर भी अपना प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी भी इस वायरस के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

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उन्होंने कहा कि यह वायरस न केवल लोगों की जान ले रहा है बल्कि इसका असर उनके स्वास्थ्य पर भी व्यापक रूप से पढ़ रहा है और संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से गुजर रहे हैं और उबरने के बाद भी पूरी तरह से ठीक होने मे समय लग रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस संक्रमण पर काबू पाने के लिए ज्यादा से ज्यादा शोध की बात कही है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य देखभाल के लिए सर्वश्रेष्ठ मानक स्थापित करने से ही इसे रोकने में मदद मिलेगी।

इसके लिए सदस्य देशों से अंतरराष्ट्रीय यातायात निगरानी, कांट्रैक्ट, ट्रेसिंग, जोखिम रहित और सुसंगत उपाय पर बल दिया जा रहा है। समिति ने यह भी कहा है कि इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में राजनीतिकरण से बचना होगा।

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