पीआरपी तकनीक करेगा गर्भाशय की विकारों को दूर

पीआरपी तकनीक करेगा गर्भाशय की विकारों को दूर और मिल सकेगा मातृत्व सुख

हर महिला मां बनना चाहती है लेकिन जब किसी  महिला के लिए यह मुमकिन नही हो पाता है तो उसमें निराशा की भावना आ जाती है । लेकिन तकनीक की मदद से यह अब सम्भव भी हो गया है ।  महिलाओं में प्रजनन से संबंधित रोगों के इलाज में पीआरपी तकनीक काफी महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि हर महिला की ख्वाहिश होती है मां बनना लेकिन कई महिलाएं विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के चलते मां नहीं बन पाती हैं ।

ऐसे में असिस्टेंट रिप्रोडक्टिव तकनीक के मदद के जरिए उन महिलाओं को संतान की प्राप्ति हो सकती है जो किसी वजह से मां नहीं बन पाती रहती हैं । पीजीएस तकनीक की वजह से आईवीएफ की तकनीक काफी सफल हो रही है और अब इसी कड़ी में एक और नया नाम जोड़ने जा रहा है जिसका नाम है – पीआरपी तकनीक ।

आइए जानते हैं क्या है – पीआरपी तकनीक

पीआरपी तकनीक दरअसल रक्त चार घटकों से मिलकर बना होता है । ये चार घटक है – रेड ब्लड सेल्स, वाइट ब्लड सेल्स, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा ।प्लाज्मा रक्त का तरल भाग है । प्लेटलेट रिच प्लाजमा यानी की पीआरटी को रेड ब्लड सेल्स और वाइट ब्लड सेल्स को निकालकर बनाया जाता है । पीआरपी मरीज के स्वयं के ब्लड से ही तैयार किया जाता है ।

एझ ब्लड को विशेष तकनीक की सहायता से निकाला जाता है जिसमें केवल प्लेटलेट्स और प्लाज्मा होते हैं । पीआरपी तैयार करने की प्रक्रिया के बाद एक पीले रंग का द्रव प्राप्त होता है जिसमें ग्रोथ फेक्टर काफी अधिक मात्रा में पाए जाते है ।

इस गाढ़े पीली रंग केंद्रों को गर्भाशय में इंजेक्ट कर दिया जाता है जिससे नई तकनीक और नई और स्वस्थ कोशिकाओं और टिशूज विकसित हो सके । पीआरपी तकनीक की मदद से समय से पहले मोनोपॉज को रोकने में मदद मिलती है और अंडाणुओं की बढ़ाने में मदद होती है । इसका लाभ अधिक उम्र में जो लोग मां बनना चाहती है उनके लिए यह मां बनने में सहायक हो सकती है ।

यह तकनीक उन महिलाओं के लिए भी काफी फायदेमंद है जिनका बार बार गर्भपात हो जाता हो या जिन महिलाओं के गर्भाशय की अंदरूनी परत बहुत पतली हो ।

पीआरपी तकनीक का इस्तेमाल कर के गर्भाशय की परत की मोटाई बढ़ाई जा सकती है साथ ही अंडाणुओं की संख्या को इससे बढ़ाने में मदद मिलती है । यही वजह है कि यह तकनीक आईवीएफ की सफलता दर को बढ़ा दी है क्योकि विशेषज्ञो का मानना है कि आईवीएफ की असफलता का मुख्य कारण भ्रूण का विकारग्रस्त होना नही बल्कि गर्भशय से जुड़ी समस्याएं होती है ।

ऐसे में पीआरपी तकनीक गर्भाशय के विकारों को दूर कर सकता है । आज के समय मे नई नई तकनीक हो गई है जिसके जरीए एस तरह जो महिलाएं मां नही बन पाती रहती है उनको मां बनने में यह एक आखिरी उम्मीद की किरण होती है ।

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