अमेरिका में नस्ली हिंसा का इतिहास है पुराना, हिंसा से हालात बेकाबू

अमेरिका में नस्ली हिंसा का इतिहास है पुराना, हिंसा से हालात बेकाबू

अमेरिका में इस समय जबरदस्त नस्ली हिंसा और तोड़फोड़ हो रहा है। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन वाइट हाउस तक पहुंच चुके हैं। दरअसल एक अश्वेत व्यक्ति जार्ज फ्लॉयड की मौत पुलिस हिरासत में हो गई। जिससे अमेरिका के कई शहरों में आगजनी और हिंसा प्रदर्शन हो रहा है।

इसके चलते हालात बिगड़ रहे हैं और अपने करीब 40 शहरों में अमेरिका ने कर्फ्यू लगा दिया है। प्रदर्शनकारी व्हाइट हाउस के करीब पहुंचकर उपद्रव कर रहे, इसी बीच उन्होंने कई इमारतों पर अमेरिकी राष्ट्रीय ध्वज को जला दिया और सड़कों को बाधित करने का प्रयास किया।

वहीं पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े। हिंसा फैलाने के आरोप में अमेरिका में इस समय 4000 से भी अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और अब तक इसमें 5 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी राज्यों के गवर्नर को फटकार लगाते हुए हालात पर नियंत्रण करने के लिए कहा है।

वाइट हाउस के पास प्रदर्शनकारी के जमा होने के चलते सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके परिवार को कुछ समय के लिए बंकर में ले जाया गया था। यह कदम सुरक्षा की दृष्टि से ऐतिहात के तौर पर उठाया गया है। हालांकि बाद में उन्हें ऊपर लाया गया।

अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी, वर्जीनिया, कैलिफोर्निया में सभी सरकारी इमारतों को बंद रखने के साथ ही 15 शहरों में पांच हजार से भी अधिक नेशनल गार्ड को तैनात कर दिया गया है जिससे हालात पर नियंत्रण पा सके।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस कर के  राज्य के गवर्नर और विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी के गवर्नरों को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्हीं के चलते ही हिंसा काबू में नहीं आ पा रही है और हिंसा भड़की है।

ट्रम्प ने गवर्नर को कहा कि उन्हें कठोर होना होगा और हिंसा को रोकने की कोशिश करनी होगी। हिंसा को रोकने के लिए राज्यों को अपने यहाँ नेशनल गार्ड की तैनाती करनी होगी। बता दें कि पुलिस की हिरासत में अश्वेत नागरिक की मौत के बाद यह हिंसा भड़की है।

अमेरिका अपने आपको साधन संपन्न होने के साथ ही हाईटेक मानता है लेकिन अमेरिका में नक्सली हिंसा का इतिहास काफी पुराना है। यहां पर अश्वेतों पर तरह तरह के जुल्म किये जाते रहे हैं और उन्हें गुलाम की तरह रहना पड़ता था लेकिन आज भी यहां पर नस्ली हिंसा देखने को मिलती है।

जब अमेरिकी राष्ट्रीय राष्ट्रपति बराक ओबामा राष्ट्रपति चुने गए थे तो यह माना गया था कि अब अमेरिका में इस तरह की घटनाएं नहीं होंगी और अमेरिका को दुनिया के सामने खुलेपन की एक बड़ी मिसाल के तौर पर देखा गया था। लेकिन तब भी हिंसा नहीं रुकी न अब। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जो अश्वेत थे। वह अफ्रीकी मूल के अमेरिकी नागरिक है और अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे।

यह भी पढ़ें : चीनी मीडिया ने कहा अमेरिका अपने उठाये गए कदम का परिणाम भुगतेगा

अमेरिका के इतिहास में श्वेत स्टेलर सोसाइटी का दबदबा हुआ करता था। काफी लम्बे समय से अमेरिका में नाशलवाद सबसे बड़ा मुद्दा था। इसका सबसे ज्यादा असर लैटिन अमेरिका, मूल अमेरिकी और एशियाई अमेरिकी और अफ्रीकी अमेरिकियों पर पड़ा है, जिनके लिए अमेरिका की समाज में एक अलग जगह थी।

अमेरिका में इस समय जबरदस्त नस्ली हिंसा और तोड़फोड़ हो रहा है।
अमेरिका में इस समय जबरदस्त नस्ली हिंसा और तोड़फोड़ हो रहा है।

उनके लिए हर चीज अलग थी, उनके साथ गुलामों जैसा व्यवहार किया जाता था। ये अश्वेत आश्रित गुलाम होते थे, यहां तक कि अमेरिका में इनको उस समय शिक्षा पाने, रोजगार हासिल करने और घर बनाने में भी भेदभाव का सामना करना पड़ता था, जिसके लिए समय समय पर अमेरिका में विरोध प्रदर्शन होते रहे तो काफी बदलाव हुआ।

यह भी पढ़ें : एक बार फिर से हांगकांग में चीन बिरोधी प्रदर्शन, लोग सड़को पर उतरे

कहा जाता है कि 1619 में पहली बार अमेरिका में वर्जिनिया से अश्वेत गुलाम लाया गया था और उसके बाद यह सिलसिला बढ़ता ही चला गया। इन गुलामो से कुछ साल काम करवा कर इन्हें छोड़ देते थे लेकिन कुछ को जिंदगी भर गुलामी में ही काम करना पड़ता था।

मैसाचुएट्स में पहली बार 1641 मे गुलामी प्रथा को समाप्त करने का कानून आया था फिर 1787 में अमेरिका के संविधान में परिवर्तन किया गया और लोगो को ज्यादा से ज्यादा आजादी देने पर जोर दिया गया। लेकिन उसके बाद भी अश्वेतों को काफी संघर्ष करना पड़ता था और 1908 में अमेरिकी संसद ने अपने यहाँ अंतरराष्ट्रीय गुलाम व्यापार पर रोक लगाई थी।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *