भारतीय वायुसेना में शामिल होने वाले राफेल विमान से जुड़ी कुछ बाते
राजनीति

भारतीय वायुसेना में शामिल होने वाले राफेल विमान से जुड़ी कुछ बाते

राफेल विमान फ्रांस से उड़कर बुधवार को भारत के अंबाला एयर बेस पर पहुंच गया है। पहली खेप में भारत में पांच राफेल विमान पहुंच चुके हैं। इसी के साथ ही भारतीय वायुसेना के स्वर्णिम इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है।

राफेल विमान दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। यह 4.5 पीढ़ी का अपनी पीढ़ी का सबसे सर्वश्रेष्ठ युद्धकविमान है जोकि अपने कौशल का परिचय लीबिया और अन्य दूसरे जगहों पर दे चुका है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय वायुसेना में राफेल विमान  के शामिल होने से  भारतीय वायुसेना की क्षमता कई गुना बढ़ गई है और यह ऐसे समय में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया है जब भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन से भारत में लगातार हमले हो रहे हैं और भारत खतरे झेल रहा है।

बता दें कि भारत में राफेल विमानों के मुकाबले  पड़ोसी देशों के युद्धक क्षमता कुछ भी नहीं है।  राफेल विमान की तुलना अमेरिकी युद्धक विमान एफ 35 और एफ22 से भी की जाती है। यह राफेल विमान सभी तरह के युद्धक अभियानों के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

इस विमान की खासियत यह है कि इससे सुदूर हवाई हमलों के दौरान जमीन कर को टच करने की भी जरूरत नहीं होगी और यह युद्धपोत के अलावा परमाणु हमले के लिए भी उपयुक्त है। यह युद्ध विमान का इस्तेमाल अफगानिस्तान, लीबिया, माली, इराक और पिछले साल सीरिया में अपनी युद्ध क्षमता को प्रदर्शित कर चुका है।

बता दें कि फ्रांस की रक्षा कंपनी द्वारा बनाये गए इस  राफेल विमान को 2004 में फ्रांस की नौसेना में शामिल किया गया था और वायुसेना में 2006 में शामिल किया गया था। इस विमान में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जिससे 50 किलोमीटर की दूरी से ही बम फेंका जा सकेगा और डेढ़ सौ किलोमीटर की दूरी सही हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागी जा सकेंगी।

Rafale at Aero

इसे दुश्मनों के लिए घेर पाना भी काफी चुनौतीपूर्ण रहेगा क्योंकि इसमें हाईटेक रडार लगा हुआ है जो भारत के पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान के पास फिलहाल नहीं है और सबसे खास बात यह है कि यह रडार को जाम भी नही करता है। इस राफेल विमान को अम्बाला के 17 वीं स्क्वाड्रन में शामिल किया गया है।

बता दें कि अंबाला में भारतीय वायुसेना की 17वीं स्क्वाड्रन है। इसे गोल्डन एरोज उसके नाम से भी जानते हैं। इस तरह से अंबाला का यहां स्क्वाडर्न फ्रांस के द्वारा निर्मित राफेल को शामिल करने वाली पहली स्क्वाडर्न है। भारतीय वायुसेना में अंबाला एयर बेस स्थित  और 17 बी स्क्वाडर्न का नाम इतिहास में बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है।

यह भी पढ़ें : भारत इस तरह करता है चीन से लगी सीमा की निगरानी

यह पहली बार 1951 में अस्तित्व में आई थी और इसमें हेवी लैंड एंपायर  एके 52 लड़ाकू विमान थे। यह पश्चिमी एयर कमांड के अंतर्गत आने वाला ऑपरेशनल कमांड है जिसे 8 नवंबर 1988 में प्रेसिडेंट स्टैंडर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। बता दें कि यह सम्मान युद्ध या शांति के समय बेहतरीन सेवा के लिए वायुसेना की यूनिट को दिया जाता है।

अंबाला एयर बेस रणनीतिक रूप से भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस एयरवेज से भारत-पाकिस्तान की सीमा महज 220 किलोमीटर की होती है। अंबाला का यह एयरवेज भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान 1965 और 1971 में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों की भारी बमबारी की चपेट में भी आ गया था।

कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सागर और 2000-02 के दौरान भारत पाकिस्तान सैन्य तनाव के दौरान ऑपरेशन पराक्रम के तहत अंबाला एयर बेस से ही सफल ऑपरेशन किया गया था। कारगिल युद्ध के दौरान अंबाला के इस एयरवेज से दुश्मनों पर हमला करने और अन्य उद्देश्यों से 234 उड़ान लड़ाकू विमानों ने भरी थी।

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *