भारत अपने गणतंत्र दिवस पर पाकिस्तान को दो बार मुख्य अतिथि बना चुका है

भारत अपने गणतंत्र दिवस पर पाकिस्तान को दो बार मुख्य अतिथि बना चुका है

जैसे कि मालूम है भारत हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाता है क्योंकि 26 जनवरी को भारतीय संविधान पूर्ण रूप से देश भर में लागू हुआ था । भारत एक गणतंत्र अर्थात लोकतंत्र देश है । इस बार भारत अपने 71 वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है । हर साल भारत गणतंत्र दिवस के मौके पर किसी देश की नेताओं को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित करता है ।

भारत पहले दो बार पाकिस्तान के नेताओं को गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था लेकिन 1965 के बाद से यह सिलसिला बंद हो गया । 1965 के बाद से भारत ने पाकिस्तान के किसी भी नेता को गणतंत्र दिवस की परेड के लिए आमंत्रित नहीं किया, ना ही किसी भी नेता को भारत ने किसी भी कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए बुलाया ।

गणतंत्र दिवस के मौके पर किसी भी मुख्य अतिथि का आना काफी महत्वपूर्ण होते हैं । भारत उन देशों को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाता है जिसके साथ भारत का रिश्ता दोस्ती वाला और मजबूर होता है या फिर उनके साथ दोस्ती शुरू करना चाहता है ।  फ्रांस एकमात्र देश है जो आज तक सबसे ज्यादा पांच बार भारत के गणतंत्र दिवस के मौके पर बतौर मुख्य अतिथि आ चुका है ।

भारत की विदेश नीति को मजबूती देते हुए ज्यादातर सोवियत संघ को मेहमान के तौर पर हमेशा से चुनता था । समय बदलता गया और विदेशी नीति में भी बदलाव आने लगा और इसी के साथ गणतंत्र दिवस के मौके पर बतौर मेहमान आने वाले अतिथि  में भी बदलाव  नजर आने लगा ।

अब तक भारत में गणतंत्र दिवस के मौके पर फ्रांस ने पांच बार तथा  भूटान ने चार बार शिरकत की है । सन 2015 का गणतंत्र दिवस  एक ऐतिहासिक गणतंत्र दिवस कहा जाता है क्योंकि  2015 के गणतंत्र दिवस में बतौर मुख्य अतिथि अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत  आए थे ।

भारत हमेशा से ही गणतंत्र दिवस के मौके पर खास मेहमान को बुलाने के लिए एक अलग और संतुलित रणनीति अपना रहता था । दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति नेलसन मंडेला को साल 1995 में  भारत ने गणतंत्र दिवस  के मौके पर मुख्य अतिथि के रुप में बुलाया था । इसके अलावा लेटिन अमेरिका, ब्राजील, मॉरीशस और नेपाल को इस दशक में गणतंत्र दिवस में शामिल होने का मौका मिला है ।

भारत एक मजबूत देश के तौर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुआ और अपनी विदेशी नीति में बदलाव करता रहा है और इसी के साथ भारत सरकार की प्राथमिकता भी बदल गई । भारत एक समय ईरान को अपना अहम रणनीतिक साझीदार बनाया था और साल 2003 में  इराक के राष्ट्रपति मोहम्मद खातामी को बतौर मुख्य अतिथि बुलाया था ।

2006 में  सऊदी अरब के राजा  अब्दुल्लाह बिन अब्दुल अजीज अलसोद को बतौर मेहमान बुलाया था । 2007 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मुख्य अतिथि बनकर भारत आए थे । 2003 में भारत में यूरेनियम सप्लाई करने वाली कजाखस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान को गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रुप में मनाया था ।

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