नदी जोड़ो: रिवर लिंक प्रोजेक्ट के जरिए लोगों की प्यास बुझाने और विकास में अहम योगदान

नदी जोड़ो: रिवर लिंक प्रोजेक्ट के जरिए लोगों की प्यास बुझाने और विकास में अहम योगदान

नदी जोड़ो: रिवर लिंक प्रोजेक्ट के जरिए लोगों की प्यास बुझाने और विकास में अहम योगदान

रिवर लिंक:

केन बेतवा लिंक प्रोजेक्ट की प्रतीक्षा तब से की जा रही है जब प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री थे। इतना लंबा समय बीत जाने के बाद अब आखिरकार वह समय नजदीक आ गया है जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक समझौता किया है।

इस समझौते के साथ ही दोनों ने एक स्टेटमेंट जारी किया है और कहा है कि यह सिर्फ कागज तक सीमित नहीं होगा बल्कि बुंदेलखंड की भाग्य रेखा को एक नया रूप देने की कोशिश की जाएगी। इससे लोगों की प्यास बुझेगी और विकास भी होगा।

मालूम हो कि केन और बेतवा दोनों नदियों को जोड़ने के लिए प्रयास पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने शुरू किया था। लेकिन इसके बाद सरकारें आई और गई लेकिन काम आगे नहीं बढ़ सका।

नदियों को जोड़ने के पीछे एक विचार था। इसके दो उद्देश्य थे पहला आम तौर पर भारत में मानसून के दौरान बादल खूब बरसते हैं। सागर से पानी बादल लेकर आते हैं और धरती की कोख को हरा भरा कर देते हैं।

जब तक पर्यावरण संतुलित रहता है यह क्रम चलता रहा लेकिन अब बादल बरसते तो है लेकिन पानी ढलान पर बहकर नदियों और नदियों के जरिए पुनः सागर में चला जा रहा है।

धरती प्यासी ही रह जाती है। पानी का ठहराव हो नहीं पा रहा है और इसका साइड इफेक्ट अब देखने को मिल रहा है। बुंदेलखंड में पानी के अभाव से धरती बंजर होती जा रही है।

केन बेतवा लिंक नदी जोड़ो परियोजना का पहला कदम माना जा रहा है। इससे पानी का संग्रहण और वितरण करके बुंदेलखंड की धरती की प्यास बुझाने में मदद मिलेगी।

बता दें कि बुंदेलखंड का क्षेत्र दशकों से उपेक्षित रहा है। इसका कारण यह है कि यहां पर पानी का अभाव होता है। जिसकी वजह से पलायन खूब-खूब होता है।

जब यह परियोजना अब शुरू हो रही है तो ऐसे में बुंदेलखंड के विकास के लिए केन बेतवा का पानी अमृत के समान काम कर सकता है। बता दें कि परियोजना के पूरा हो जाने के बाद उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 12 लाख हेक्टेयर की भूमि में दो से तीन बार फसल को उगाया जा सकेगा।

इससे आम आदमी की आमदनी बढ़ेगी। विशेष करके बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, ललितपुर जैसे जिलों को इससे काफी लाभ होगा। क्योंकि यह जिले से प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। इसके अलावा कई जिले अप्रत्यक्ष रूप से भी लाभान्वित होंगे।

केन नदी और बेतवा नदी उद्गम  –

बता दें कि केन नदी मध्य प्रदेश के जबलपुर के पास कैमूर की पहाड़ियों से निकलती है और करीब 427 किलोमीटर उत्तर की दिशा में बहते हुए बांदा जिले के चिल्ला गांव में यमुना नदी से मिल जाती है।

इसी तरह बेतवा नदी मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से निकलती है और 576 किलोमीटर उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में आकर यमुना नदी से मिल जाती है।

अब उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकार के बीच हुए समझौते से मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में गांव के पास केन और बेतवा नदी को जोड़ दिया जाएगा। इसका इस्तेमाल बिजली उत्पादन के साथ-साथ भूमि की सिंचाई में भी किया जाएगा।

यह भी पढ़ें :– आइए जानते हैं आयरलैंड में सांप क्यो नही पाए जाते हैं?