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Wednesday, January 20, 2021

दक्षिण चीन सागर में चीन को ले कर कई देश हुए लामबंद आइए जानते हैं दक्षिण चीन सागर के बारे में विस्तार से

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जैसा कि सबको मालूम है लद्दाख में भारत और चीन सेना के बीच झड़प हुई थी और तब से भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति बना बनी हुई है। लद्दाख में भारतीय सेना के जवानों ने चीन को करारा जवाब दिया था।

लेकिन इसके बावजूद चीन लगातार सीमा पर अतिक्रमण की अपनी कोशिशों से बाज नही आ रहा है। दरअसल चीन की विस्तारवादी नीति चलते चीन का कई देशों के साथ सीमा को लेकर विवाद चल रहा है।

वहीं चीन की कम्युनिस्ट सरकार अपने फायदे के लिए किसी भी सौदे में पीछे नही हटना चाहती है, भले ही वह गलत ही क्यों न रहे। यही वजह है कि चीन दक्षिण चीन सागर में गैरकानूनी रूप से कब्जा बढ़ा रहा है जिसके लिए अब कई देश चीन के खिलाफ लामबंद हो गए हैं।

आइए जानते हैं दक्षिण चीन सागर के बारे में :-

दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन के खिलाफ भारत समेत कई देशों लामबंद हुए हैं। अमेरिका ने भी दक्षिण चीन सागर में अपने युद्धपोत तैयार की तैनात किये है।

अब भारत ने भी अपने युद्धपोत इस क्षेत्र में तैनात कर दिए हैं और इस क्षेत्र में चीन को रोकने के लिए भारत के साथ अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई अन्य देश शामिल है।

बता दें कि अमेरिका काफी लंबे समय से चीन के खिलाफ इस क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर आक्रामक रुख अख्तियार किए हुए हैं। अमेरिका के युद्धपोत और विमान वाहक पोत दक्षिण चीन सागर की निगरानी के लिए जाते रहते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर क्या वजह है जिसकी वजह से चीन दक्षिण चीन सागर को लेकर कई देशों से दुश्मनी मोल लिए हुए हैं और किसी भी कीमत पर इस क्षेत्र में अपनी संप्रभुता को बनाए रखना चाहता है।

दरअसल अंतरराष्ट्रीय नियम के अनुसार किसी भी देश की जमीनी सीमा के बाहर समुद्र में करीब 20 नॉटिकल मील तक उसकी सीमा होती है। लेकिन उसके बाहर का क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र के नियमों के अंतर्गत आता है।

लेकिन चीन इन नियमों की अनदेखी करते हुए 1200 नॉटिकल मील तक अपने इलाकों को बताता है। वही दुनिया के कई देश इस क्षेत्र को अपना बताते हैं, इसमें फिलीपींस, ब्रूनोई, इंडोनेशिया, ताइवान जैसे देश शामिल है। हालांकि इन देशों को चीन डरा धमका कर शांत कर देता है।

यह भी पढ़ें : चीन धीरे-धीरे बेनकाब हो रहा है ! अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने दी चेतावनी

दरअसल दक्षिण चीन सागर पूर्वी एशिया से प्रशांत महासागर के पश्चिमी किनारे स्थित है। इस तरह से यह पूरा क्षेत्र करीब 35 हजार स्क्वायर किलोमीटर का बनता है जोकि दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों से घिरा हुआ है।

इस क्षेत्र में ब्रूनोई, चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, ताइवान और वियतनाम की सीमाएं मिलती हैं। चीन दक्षिण चीन सागर में आक्रामक रूप इसलिए अपना है क्योंकि यहां पर तेल और प्राकृतिक गैस का अपार भंडार है।

यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के एक अनुमान के मुताबिक इस क्षेत्र में 11 बिलियन बैरल्स आयल और 190 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस संरक्षित है। इस वजह से चीन हर कीमत पर इस इलाके को छोड़ना नही चाहता है और अमेरिका भी इसमें पीछे नहीं हटना चाहता है।

south china sea

इसके अलावा दक्षिण चीन सागर का क्षेत्र व्यापारिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि पूरी दुनिया के समुद्री व्यापार का लगभग 70 फ़ीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र के जरिए हो रहा है। एक अनुमान के मुताबिक इस क्षेत्र से हर साल करीब 5 खरब डालर के कमर्शियल गुड्स की आवाजाही होती रहती है।

यह भी पढ़ें : चीन के कुछ दोस्त देश, दुनिया मे ये देश किस नजरिये से देखे जाते हैं !

इसीलिए दक्षिणी चीन इस क्षेत्र में अपनी ताकत बनाए रखना चाहता है। अगर दूसरे देश उसकी प्रभुता को स्वीकार करते हैं तब चीन के लिए कमाई का यह एक बड़ा जरिया बन जाएगा।

बात 1997 की है चीन के कुओमितांग कि सरकार ने सीमांकन कर Eleven Dash Line के जरिए इस क्षेत्र में अपना दावा किया था। 1949 में पीपल्स रिपब्लिकन ऑफ चाइना का गठन किया गया और टॉकिंन की खाड़ी को इलेवन डेट लाइन से बाहर कर दिया गया और नाइन लाइन को लाया गया।

उसके बाद 1958 में चीन की सरकार द्वारा एक घोषणा पत्र जारी हुआ जिसमें नाइस लाइन को आधार मानकर दक्षिणी चीन सागर के बड़े हिस्से को चीन का हिस्सा बताया गया था। इससे वियतनाम, फिलीपींस, इंडोनेशिया के कई क्षेत्र इस नाइस लाइन के अंतर्गत आ गए।

लेकिन इन एशियाई देशों के पास इतनी हिम्मत नही थी कि वह चीन के इस कदम से असहमति जता सके। तब से यह क्षेत्र विवादित है। चीन पूरे समुद्री क्षेत्र के करीब 80 फ़ीसदी हिस्से पर अपना दावा करता है।

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