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Wednesday, January 20, 2021

भारत इस तरह करता है चीन से लगी सीमा की निगरानी

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भारत और चीन की सीमा को एलएसी यानी की लाइन आफ एक्चुअल कंट्रोल के नाम से जानते हैं। यह करीब 3488 किलोमीटर लंबी सीमा है जो भारत के 4 राज्य और 1 केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से गुजरती है। लेकिन यहां यह जानना जरूरी है कि यह कोई वास्तविक सीमा रेखा नहीं है बल्कि भारत और चीन द्वारा अपनी अपनी एलएसी ( लाइन आफ एक्चुअल कंट्रोल) है। ऐसे में भारत और चीन के बीच विवाद होता रहता है और कई बार छोटी मोटी झड़प और युद्ध भी हुए हैं ।

भारत और चीन भारत की चीन से लगी सीमा रेखा के निगरानी की जिम्मेदारी भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने 2004 में आईटीबीपी (इंडो तिब्बत बॉर्डर फोर्स) को दी है। पहले आइटीबीपी की मदद के लिए असम राइफल्स के जवान भी होते थे।

मालूम होगी आईटीबीपी यानी कि इंडो तिब्बतन बॉर्डर फोर्स (भारत तिब्बत सीमा सुरक्षा बल) का गठन भारत और चीन के बीच हुए युद्ध के दौरान हुआ था। आइटीबीपी की स्थापना 24 अक्टूबर 1962 को की गई थी। आइटीबीपी के पूर्व डीआईजी (डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल) जय वीर चौधरी अपनी 37 साल की सेवा के बाद 2010 में रिटायर हुए थे। इस दौरान वे एलएसी से गुजरने वाले राज्य में तैनात थे।

एलएसी पर भारत की नगरानी व्यवस्था के बारे में जय बीर चौधरी का कहना है कि आइटीबीपी के तौर पर एक सुरक्षा बल तो भारत के पास है लेकिन उसकी जरूरतें अभी भी पूरी नहीं हो सकी है।

हमें और ज्यादा जरूरतों की आवश्यकता है। हालांकि अब कुछ समय से एलएसी पर भारत अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है। गृह मंत्रालय द्वारा साल 2018-19 की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में भारत चीन सीमा की निगरानी के लिए आइटीबीपी के 32 बटालियन तैनात किए हैं।

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मालूम हो कि प्रत्येक बटालियन में कम से कम एक 1000 जवान रहते हैं। ई6स तरह से प्रत्येक बटालियन पर 110 किलोमीटर की सीमा की निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। मालूम हो कि यह सीमाएं 9000 से लेकर 18750 फीट की ऊंचाई वाले पार्वती और जंगली इलाके हैं।

ऐसे में रिटायर रिटायर्ड डीआईजी जय वीर सिंह का कहना है कि हमें जवानों की संख्या को बढ़ाने की जरूरत है जिससे प्रभावी ढंग से सीमा की निगरानी की जा सके। 2018-19 की रिपोर्ट के अनुसार भारत और चीन की सीमा पर 178 बॉर्डर पोस्ट हैं।

भारत और चीन की सीमा को एलएसी यानी की लाइन आफ एक्चुअल कंट्रोल के नाम से जानते हैं।
भारत और चीन की सीमा को एलएसी यानी की लाइन आफ एक्चुअल कंट्रोल के नाम से जानते हैं।

इस तरह लगभग 2 पोस्टों की दूरी करीब 20 किलोमीटर की बनती है जो कि अपने आप में एक लंबी दूरी है। इसे कम करने की जरूरत है क्योंकि यह इलाके पर्वती होते हैं और जंगल भी घने हैं। इस वजह से ज्यादा दूर तक निगरानी कर पाना संभव नहीं हो पाता है।

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सरकार को इन कमियों पर ध्यान देने की जरूरत है और बजट बढ़ाने की जरूरत है। सरकार अब अपनी सुरक्षा बजट पर ध्यान दे रही है साल 2010 में आईटीबीपी का बजट 11 34.05 करोड था जो कि अब 2018-19 में बढ़कर 6190.72 करोड़ हो गया है।

वहीं अगर बात करें चीन की तो चीन के सैनिक जहां पर भी तैनात होते हैं उनके साथ एक राजनीतिक प्रतिनिधि भी तैनात होता है और सैनिकों को अपने इस प्रतिनिधि के निर्देश के अनुसार ही काम करना होता है यानी कि चीनी सेना सैनिक कोई भी फैसला खुद नहीं करते हैं।

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