लैब में विकसित हृदय कोशिकाओं से कोरोना के मरीजों का इलाज संभव
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लैब में विकसित हृदय कोशिकाओं से कोरोना के मरीजों का इलाज संभव

अमेरिका के एक मेडिकल जनरल में छपी रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज लैब में विकसित हृदय कोशिकाओं के जरिए संभव है । इस थेरेपी की मदद से कोरोना वायरस के उन मरीजों की जान बचाई जा सकती है जिन्हें सांस लेने में समस्या होती है ।

जैसा कि सब को मालूम ही है कि दुनिया भर के अधिकांश देश कोरोना वायरस  जैसे महामारी की वजह से परेशान है और दुनिया भर के वैज्ञानिक दिन-रात इस महामारी के इलाज के लिए दवाई और टीका विकसित करने में लगे हुए हैं ।

लेकिन उसके बावजूद अभी तक कोई असरदार इलाज संभव नहीं हो पाया है । इस वायरस की  वैक्सीन के लिए शोध जारी है और कई जगह इंसानों पर इनका ट्रायल भी किया जा रहा है । इसी बीच अमेरिका से एक खबर आई है कि सीडर सिनाई मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने एक थेरेपी के जरिए वायरस का इलाज ढूंढा है ।

एक थेरेपी  कोरोना वायरस से बचाने में काफी कारागार मालूम पड़ रही है । जनरल बेसिक रिसर्च इन कार्डियोलॉजी में एक शोध प्रकाशित हुआ है जिसमें हार्ट सेल थेरेपी के जरिए कोरोनावायरस के मरीजों के इलाज की बात कही गई है ।

इस थेरेपी के जरिए लैब में विकसित हृदय कोशिकाओं को इंसानों के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है और ये कोशिकाएं इंसान के इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का काम करती हैं ।

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शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि यह कोशिका शरीर में एक विशेष प्रकार का एक्सोसोम का उत्पादन करती है जो पूरे शरीर में फैल कर कई सारी बीमारियों की वजह से होने वाली सूजन को कम करने का काम करता है । इस थेरेपी को CAP 1002 के नाम से जाना जाता है ।

इस थेरेपी में कार्डियोस्फीयर ड्राइव सेल का प्रयोग होता है, जोकि लैब में विकसित इंसानों के हार्ट की कोशिका से तैयार होता है। इस शोध को करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि इस प्रयोग के जरिए कोरोना वायरस के कुछ मरीज ठीक हुए हैं और इस थेरेपी से मरीजों में किसी भी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट भी देखने को नहीं मिला है ।

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शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने कोरोना वायरस के उन मरीजों पर इस थेरेपी का इस्तेमाल किया जिन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और वेंटिलेटर पर थे  इस थेरेपी के जरिए मरीजों का इलाज करने के 3 हफ्ते बाद ही मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज भी कर दिया गया ।

शोधकर्ता इसका बड़े पैमाने पर ट्रायल करना चाहते हैं । उनका मानना है कि अगर यह ट्रायल सफल होता है, तो इससे कोरोना वायरस का इलाज करने में काफी मदद मिलेगी ।

मालूम हो कि भारत में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या एक लाख पार पहुंच चुकी है और भारत में चौथी बार लॉक डाउन को 31 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है । हालांकि इस बार चौथे लॉक डाउन में काफी रियायते दी गई हैं, साथ ही अंतर्जनपदीय बसों के संचालन को भी मंजूरी मिलने की बात कही गई है हालांकि यह राज्यों पर निर्भर करेगा कि वह क्या कदम उठाते हैं ।

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