आइए जानते हैं टीवी चैनल्स के आमदनी का जरिया टीआरपी(TRP) के बारे में

आइए जानते हैं टीवी चैनल्स के आमदनी का जरिया टीआरपी(TRP) के बारे में

आइए जानते हैं टीवी चैनल्स के आमदनी का जरिया टीआरपी(TRP) के बारे में

आज कल हम अक्सर यह सुनते हैं कि टीवी चैनल की टीआरपी बढ़ रही है या फिर घट रही हैं। दरअसल टीवी चैनल की टीआरपी ( TRP ) का सीधा अर्थ होता है टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट  , लेकिन हममें से बहुत सारे लोग इसके बारे में बहुत ज्यादा नहीं जानते हैं तो आज हम इसी के बारे में जानेंगे।

क्या है टीआरपी (TRP) : –

टीआरपी लोगों के बीच किसी टीवी चैनल की लोकप्रियता के बारे में बताता है। सभी टीवी चैनल पर आने वाले कार्यक्रमों की टीआरपी भी अलग-अलग होती है और यह कम ज्यादा होती रहती है।

टीवी चैनल्स के कार्यक्रमों के TRP को मापने का काम ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल आफ इंडिया – बीएआरसी करती है।

इन दिनों टीआरपी को लेकर उसकी प्रक्रिया पर बहस हो रही और सवाल उठ रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार डॉ वर्तिका नंदा का कहना है कि टीआरपी को मापने के मौजूदा स्वरूप में बदलाव लाने की जरूरत है।

इसके लिए कई बार आवाज भी उठाई गई है लेकिन अभी तक इस में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है। सूचना प्रसारण मंत्रालय के द्वारा समय-समय पर चैनल्स पर मीडिया को लेकर गाइडलाइन जारी की जाती है।

हालांकि भारत में अभी तक टीआरपी के संबंध में कोई ठोस कानून नही बन पाया है। अभी टीवी के रेगुलेटरी बॉडी नेशनल ब्रॉडकास्ट एसोसिएशन के काम सिर्फ कागजों पर ही दिखाई पड़ रहे हैं।

इसके लिए कुछ कानूनी निकाय बनाए गए हैं लेकिन ये सिर्फ कानून ही बनकर रह गए हैं। इनका यदि अधिकार क्षेत्र बढ़ा दिया जाए तब इन समस्याओं से निपटारा पाया जा सकता है।

आज भी देश में करोड़ों दर्शकों को इस बात की जानकारी नहीं है कि टीआरपी कैसे तय होती है। वैसे तो टीआरपी तय बीएआरसी करती है।

लेकिन वह इसके बारे में दर्शकों को सही जानकारी अभी तक नही दी है। टीआरपी को मापने के लिए देश के सभी राज्यों को भी शामिल नहीं किया गया है।इन दिनों टीआरपी को लेकर बहस छिड़ी हुई है। टीवी की विश्वसनीयता तेजी से नीचे गिर रही है।

आज के समय में पत्रकारिता के भविष्य को लेकर अनिश्चितता है लेकिन इसके बावजूद इस पर कोई चिंतित नहीं नजर आ रहा है और मौजूदा हालात से तो यही लगता है आने वाले समय में यदि यही हालात रहे तब पत्रकारिता के लिए समय बेहद बुरा हो जाएगा।

टीआरपी का निर्धारण :-

टीआरपी का निर्धारण वास्तविक आंकड़ों के आधार पर न होकर अनुमानित आंकड़ों के आधार पर किया जाता है।

भारत जैसे विशाल देशों में जहां की जनसंख्या करोड़ों में है यहां पर टीआरपी को मापना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल ऑफ इंडिया टीआरपी को मापने के लिए कुछ सैंपल्स लेती है।

यह सैंपल देश के विभिन्न राज्यों के विभिन्न शहरों और इलाकों से लिए जाते हैं, जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को शामिल किया जाता है।

इनके सैंपल में  इनमें विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को भी शामिल किया जाता है कि वे लोग विभिन्न कार्यक्रम किस तरीके से देख रहे हैं। इसके बाद टीआरपी को मापने के लिए सैंपल साइज के आधार पर ही वहां पर  बार ओ मीटर लगाया जाता है।

बीएआरसी की रिपोर्ट के अनुसार देशभर के 45 हजार घरों में यह मीटर लगाए गए हैं और इन्हें न्यू कंजूमर क्लासिफिकेशन सिस्टम के अंतर्गत 12 श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

इसमें शिक्षा और रहन-सहन के स्तर को भी मापा जाता है जिसके लिए अलग से एक ग्यारह श्रेणियां बनाई गई हैं।

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इन दर्शकों को अलग से एक आईडी दी जाती है और जब कोई दर्शक अपने रजिस्टर आईडी के अनुसार प्रोग्राम देखता है तब उससे जो आंकड़े प्राप्त होते हैं उसी से बीआरसी अपने काम को करती है। इस तरह से बीआरसी 2015 से इस प्रक्रिया के तहत टीआरपी का निर्धारण करते आ रही है।

अब सवाल यह उठता है कि देश के दो करोड़ लोग दर्शक क्या देखते हैं यह मायने नही रखता लेकिन जिन 45 हजार घरों में मीटर लगे हैं वह क्या देख रहे हैं यह मायने रखता है क्योंकि उन्हीं के द्वारा टीआरपी का निर्धारण होता है।

इसी के जरिए यह भी पता चलता है कि किस वक्त में कौन से चैनल पर कौन सा प्रोग्राम सबसे ज्यादा देखा जा रहा है और इनसे जो भी आंकड़े प्राप्त होते हैं उन्हीं का विश्लेषण करके विभिन्न चैनल की टीआरपी निर्धारित की जाती है और दर्शकों की पसंद नापसंद का अनुमान लगा लिया जाता है।

टीआरपी ही किसी चैनल की आमदनी का जरिया होता है इसलिए यह किसी भी चैनल के लिए बहुत खास होता है, क्योंकि टीआरपी का सीधा असर जाना उसकी आमदनी पर पड़ता है।

ज्यादातर विज्ञापन टीआरपी के आधार पर ही चैनल्स को मिलते हैं और अलग-अलग समय में इन विज्ञापनों की कीमत अलग-अलग होती है।

इस तरह से टीआरपी का खेल बहुत बड़ा है और इससे यह भी पता चलता है कि किस विशेष चैनल का कौन सा प्रोग्राम ज्यादा पसंद किया जा रहा है और कितने समय देखा जा रहा है इसी के द्वारा चैनल्स और कार्यक्रम की लोकप्रियता का निर्धारण भी किया जाता है। TRP का निर्धारण किया जाता है।