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Sunday, January 17, 2021

आइये जानते है क्या है UNSC Resolution 2231जिससे खाड़ी देश डरे है और इरान बेहद खुश हैं

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ईरान पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के रिजर्वेशन 2231 के तहत ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध की सीमा को 18 अक्टूबर 2020 को समाप्त कर दिया गया है इससे खाड़ी देश तो चिंतित है लेकिन ईरान बेहद खुश है।

बता दें इस समय सीमा को खत्म होने से पहले खाड़ी सहयोग परिषद ने एक पत्र के जरिए सुरक्षा परिषद से गुहार लगाई थी कि वह ईरान पर लगाए गए हथियार प्रतिबंध की अवधि को और विस्तारित कर दे। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र अमीरात, बहरीन, सऊदी अरब, ओमान, कतर, कुवैत एकजुट होकर यह गुहार लगाए थे कि प्रतिबंध की अवधि को और ज्यादा बढ़ा दिया जाना चाहिए।

लेकिन जब यह समय सीमा खुद ही समाप्त हो गई तो अब ईरान नए सिरे से अपनी योजनाओं को विस्तार देने के लिए घोषणा कर दी है। ईरान का कहना है कि वह अब हथियारों की खरीद भी करेगा और बेचेगा भी। हालांकि ईरान का मकसद हथियार को खरीदने से ज्यादा हथियार को बेचना है।

बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच साल 2015 में परमाणु समझौता हुआ था जिसमें अमेरिका सहित छह अन्य देश भी शामिल थे, जिसमें संयुक्त व्यापक कार्रवाई की योजना की बात कही गई थी।

लेकिन साल 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया था। उनका कहना था कि यह समझौता अमेरिका के हित में नहीं है।

अमेरिका के अलग होने के बाद ईरान ने भी खुद को इस समझौते से अलग कर लिया था और कहा कि लंबे समय से हथियारों के व्यापार पर लगाया गया प्रतिबंध अब खत्म होता है। अब वह हथियारों की खरीद और बिक्री कर सकता है।

बता दें कि यह Resolution की अवधि 10 साल के लिए थी जिसमें यूएन द्वारा ईरान पर बड़े हथियारों की खरीद पर प्रतिबंध लगाया गया था।

यह प्रतिबंध ईरान पर साल 2010 में लगाया गया था। इसकी वजह यह थी कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को विस्तार देना चाहता था और चेतावनी देने के बाद भी बंद नहीं कर रहा था। अब इरान भी सुखोई -30, फाइटर जेट, ट्रेनर एयरक्राफ्ट जैसे हथियारों की खरीद कर सकेगा।

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अब ईरान रूस से भी एझ 410 एयर डिफेंस सिस्टम भी खरीदने में सक्षम हो गया है। इसके अलावा ईरान चीन से भी हथियार खरीद सकता है। ईरान पर प्रतिबंध बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों की सहमति प्राप्त होना जरूरी है।

बता दें कि रूस और चीन ईरान को हथियार की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देश हैं और यह दोनों देश स्थाई सुरक्षा परिषद के सदस्य भी हैं। ऐसे में प्रतिबंध की अवधि को विस्तार देने की अमेरिका की मनसा को यह दोनों देश सफल नहीं होने देंगे क्योंकि चीन और रूस दोनों के पास ही वीटो पावर है।

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बता दें कि इसके पहले मार्च 2007 में ईरान पर UN RESOLUTION 1747 लागू किया गया था जिसके तहत ईरान पर सभी तरह के हथियारों के हस्तांतरण के आयात और निर्यात शामिल थे, को प्रतिबंधित कर दिया गया था।

इसके बाद 17 जुलाई 2015 से लागू Regulations के तहत आर्मी ट्रांसफर के आयात निर्यात पर रोक लगाई गई थी और एक सूची जारी करते हुए ईरान पर प्रतिबंध लगाया गया था और कहा गया

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था कि वह फाइटर जेट, टैंक, युद्धपोत जैसे हथियार खरीद या बेच नहीं पाएगा और फिलहाल ईरान पर 18 अक्टूबर 2023 तक परमाणु हथियार बनाने वाली सभी प्रकार की बैलेस्टिक मिसाइलों को विकसित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सभी उपकरणों पर रोक लगाई गई है।

अब ईरान के विदेश मंत्रालय की तरफ से बयान आया है कि ईरान हथियारों को खरीदने से पहले हथियार को बेचने की क्षमता रखता है।

साथ ही यह भी कहा है कि वह अमेरिका के जैसा नहीं है जिसके राष्ट्रपति यमन के लोगों का संघार करने के लिए घातक हथियार बेचने के लिए तैयार रहते हैं। बता दें कि ईरान का इशारा सऊदी अरब की तरफ था, जिसने अभी अमेरिका से हथियार खरीदे हैं।

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