दुनिया भर के 52 फीसदी Waste water का नही हो पाता ट्रीटमेन्ट, इससे गहरा सकता है जल संकट

दुनिया भर के 52 फीसदी Waste water का नही हो पाता ट्रीटमेन्ट, इससे गहरा सकता है जल संकट

दुनिया भर के 52 फीसदी Waste water का नही हो पाता ट्रीटमेन्ट, इससे गहरा सकता है जल संकट

Waste water : यूट्रस विश्वविद्यालय और संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा अपशिष्ट जल (वेस्ट वाटर) के ट्रीटमेंट के संदर्भ में एक शोध किया गया है।

जिससे पता चलता है कि दुनिया भर के लगभग आधे से अधिक लगभग 52 फीसदी वेस्ट वाटर (waste water) का ट्रीटमेंट नहीं हो पाता है।

इंसानों और कारखाना द्वारा प्रति भारी मात्रा में Waste water निकलता है। इसका ठीक ढंग से एकत्र और उपचार न किए जाने की वजह से मानव स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

यह पर्यावरण को भी प्रदूषित करता है। अध्ययनकर्ताओं ने जल उत्पादन, संग्रह, उपचार और पुनः उपयोग की मात्रा का अनुमान लगाने के लिए राष्ट्रीय आंकड़ों को विश्लेषण किया।

यूट्रस विश्वविद्यालय के शोधकर्ता एडवर्ड जॉन्स का कहना है कि विश्व स्तर पर हर साल लगभग 35900 करोड़ क्यूबिक मीटर Waste water का उत्पादन हो रहा है।

जोकि 14.4 करोड ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल को भरने के बराबर है। वर्तमान में सिर्फ 48 फीसदी जल का ही ट्रीटमेंट हो पा रहा है।

शोधकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि आने वाले समय में चुनौतियां बढ़ेंगी। एडवर्ड जॉन्स का कहना है कि विशेष रूप से विकासशील देशों में जनसंख्या वृद्धि की संभावना है।

ऐसे में Waste water के ट्रीटमेंट इन देशों में पिछड़ा रही है। इन देशों में अपशिष्ट जल का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। जो मुसीबत बन सकता है।

यहां बुनियादी ढांचे और उपचार सुविधाओं के वर्तमान विकास की तुलना में काफी अधिक है। यह मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी एक गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

मालूम हो कि विकासशील देशों में Waste water को एकत्रित करने के लिए कोई ठोस बुनियादी ढांचा नहीं है। बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए इन देशों में वित्तीय संसाधनों की कमी है।

विशेष रूप से उन्नत उपचार तकनीकी काफी महंगी होने की वजह से विकासशील देशों में Waste water का ट्रीटमेंट नही हो पा रहा है।

शोधकर्ताओं ने Waste water के पुनः उपयोग के संभावित अवसरों पर भी ध्यान दिया है और उम्मीद जताई है कि अपशिष्ट जल उपचार में सुधार किया जा सकता है।

यह शोध अर्थ सिस्टम साइंस डाटा में प्रकाशित किया गया है। एक आंकड़े के अनुसार वर्तमान समय में दुनिया भर के केवल 11 फीसदी वेस्ट वाटर का पुनः उपयोग किया जा रहा है। इस आंकड़े को बढ़ाने की जरूरत है।

कचरे को संसाधन में बदले –

शोधकर्ता एडवर्ड जॉन्स का कहना है कि केवल ताजे पानी में वृद्ध करना ही एकमात्र विकल्प नहीं है। Waste water में पाए जाने वाले पोषक तत्व और ऊर्जा का उपयोग एक संसाधन के रूप में किया जा सकता है।

साथ ही शोधकर्ताओं ने जल उपचार संयंत्र की निगरानी के महत्व पर भी ध्यान दिया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मजबूत कानून और नियम के साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि Waste water का पुनः उपयोग कैसे किया जा सके।

इस दिशा में एक अन्य महत्वपूर्ण अवरोध सार्वजनिक स्वीकृति भी है। भारत के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 2015 की रिपोर्ट के अनुसार 37 फ़ीसदी Waste water का रिट्रीटमेंट भारत में हो सकने की क्षमता है। जबकि भारत में प्रतिदिन 61554 मिलियन लीटर सीवेज का उत्पादन होता है।

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