आइए जानते हैं क्या है आईयूसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट

आईयूसीएन की रेड लिस्ट क्या है

आईयूसीएन की रेड लिस्ट क्या है

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन -IUCN) के अनुसार दुनिया की लगभग 37400 से अधिक प्रजातियां अब विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई हैं। ये वे प्रजातियां है जिनका मूल्यांकन किया गया है। मालूम हो कि यह सिर्फ 28 फ़ीसदी ही है। कितने प्रजातियों की तो गणना ही नहीं की गई है।

आईयूसीएन की रेड लिस्ट क्या है?

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की रेड लिस्ट (लाल सूची) को लिस्ट ऑफ थ्रेटड स्पीशीज की नाम से जानते हैं। इसकी स्थापना 1964 में की गई थी। यह लिस्ट दुनिया की लुप्तप्राय जातियों के संरक्षण की स्थिति के बारे में सूचित करने वाले सबसे बड़ा सूचना स्त्रोत है।

इसमें पशुओं, पक्षियों, स्पीशीज, पौधों की प्रजातियों को दुनिया से लुप्त होने की स्थिति के बारे में दर्शाया जाता है। आईयूसीएन की रेड लिस्ट में विश्व के जैविक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। यह जैव संरक्षण और नीति परिवर्तन हेतु कार्यवाही करने का एक बेहतरीन व शक्तिशाली उपकरण माना जाता है।

यह प्राकृतिक संसाधनों के रक्षा करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है। जिसे बचाना अत्यावश्यक है। यह उनके जनसंख्या, आकार, आवास पर स्थिति उपयोग और संरक्षण आदि से जुड़े समस्त जानकारियां प्रदान करता है, जो आवश्यक संरक्षण नियमों के बारे में जानकारी और सूचना देता है।

क्यों होती है इसकी जरूरत ?

हजारों प्रजातियों की आबादी की स्थिति में आईयूसीएन की रेट लिस्ट द्वारा हमें महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। यह विभिन्न प्रजातियों का विश्लेषण करता है और उनकी कमी को सामने रखता है, जिसे यह प्रजातियां झील रही होती हैं।

यह वन्यजीवों और उनकी प्रजातियों के विलुप्त होने के खतरे के बारे में बताता है। यह उनके संरक्षण के प्रयासों को प्राथमिकता देने के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, राष्ट्रीय सरकारों, संरक्षण संगठनों व वैज्ञानिक संस्थानों के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराता है।

कौन करता है इस सूची का संकलन ?

स्विट्जरलैंड आधारित आईयूसीएन (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर) प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ रेड लिस्ट का निर्माण करता है।

लेकिन दिन प्रतिदिन के आधार पर इसे प्रतिबंधित और संकलित करने के लिए कैंब्रिज में स्थित ग्लोबल स्पेस प्रोग्राम रेट लिस्ट यूनिट द्वारा आंकड़ा इकट्ठा करते हैं। इसमें दुनिया के लगभग हर देश के 16,000 वैज्ञानिक और 1,300 भागीदार संगठन मिलकर जानकारी इकट्ठा करते हैं।

संरक्षण स्थिति का आकलन कैसे करते हैं?

आईयूसीएन प्रजाति उत्तरजीविता आयोग और रेड लिस्ट साझेदारी के कई अन्य सदस्यों के सुझाव के साथ संख्या और माप के आधार पर प्रत्येक प्रजाति का मूल्यांकन बेहद बारीकी से किया जाता है। मूल्यांकन की सत्यता की जांच के बाद ही प्रजाति को 8 श्रेणियों में रखा जाता है

आठ श्रेणियां।

  • विलुप्त श्रेणी – जिसमें किसी विशेष जन्तु या पौधे की प्रजाति विलुप्त होती है और दुनिया में कहीं भी जीवित नहीं होती है के बारे में बताता है।
  • जंगली मगर विलुप्त
  • गंभीर रूप से खतरे में –  जो जंगली है और विलुप्त होने के कगार पर हैं।
  • खतरे में – जो जंगली है और उनके विलुप्त होने का खतरा बहुत अधिक है।
  • अति संवेदनशील – जो जंगली है और विलुप्त होने के कगार पर है।
  • खतरे के पास – भविष्य में इनके विलुप्त होने के खतरे की श्रेणी में जाने की आशंका है।
  • जिनके बारे में कम से कम चिंता – जिनके अधिक खर्च वाली श्रेणी में नही रखा जा सकता।
  • आंकड़ों की कमी – जिनके मूल्यांकन के लिए आंकड़ों की कमी है
  • 9वी श्रेणी – उन प्रजातियों को रखते हैं जिनका अभी तक मूल्यांकन नहीं किया गया।

क्या हर प्रजाति का मूल्यांकन किया जाता है ?

दुनिया में जितने भी जीव जंतुओं और पौधों की प्रजातियां हैं। सभी का मूल्यांकन नहीं किया जाता है। अब तक 17.4 लाख प्रजातियों की खोज की गई है और उन्हें वैज्ञानिक नाम दिया गया है। लेकिन यह आंकड़े एक करोड़ से भी अधिक हो सकते हैं।

अभी तक 93500 का मूल्यांकन किया गया है। 26,000 जाति को अधिक विलुप्त होने का खतरा है, जिनमें से 41% उभयचर, 34% शंकुधारी, 33% चट्टान निर्माण, कोरल 25% आस्थान धारी 13% बच्चे शामिल हैं। बता दें कि इन प्रजातियों का मूल्यांकन एक समय लेने वाली और बेहद महंगी प्रक्रिया होती है।

यह भी पढ़ें :– आइए जानते हैं कैसे बनते हैं ओले? और ओलावृष्टि से जुड़ी अन्य बातें